उत्तराखंड में लॉ’क”डा”उ”न के बाद दिखी तितलियों की अनेक प्रजातियां

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उत्तराखंड के कार्बेट नेशनल पार्क में अब तितलियों का रंगबिरंगा संसार पर्यटकों के सामने उपलब्ध होगा। पार्क के वनों में ग्रे पैन्सी, कामन नवाब, कामन जैस्टर, ओरेंज आकलेट, कामन सेलर, कामन लाइम, ब्लू पैंसी आदि सैकड़ों प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं। पार्क में लैंटाना व हरी झाड़ियों व ईश्क पेचा के फूलों पर तितलियां मंडराती रहती हैं। अब पार्क प्रशासन ने योजना तैयार की है कि तितलियों के संरक्षण के लिए पार्क में तितली पार्क बनाया जाए।


बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह के साथ धीरेंद्र और अन्य सदस्य एक वर्ष से आगरा, मथुरा, भरतपुर और धौलपुर में तितलियों पर अध्ययन कर रहे हैं। डॉ. केपी सिंह का कहना है कि सर्द और नम हवाओं का मौसम तितलियों को बहुत सुहाता है। आगरा में यमुना व चंबल नदी के अलावा जंगल और हरियाली भरपूर है। लॉकडाउन की वजह से मौसम में सुधार होने से तितलियों की लुप्तप्राय प्रजातियां भी देखने को मिल रही हैं। तितलियों की विश्वभर में करीब 2400 प्रजातियां हैं, इनमें से 1600 प्रजातियां भारत में देखी गई हैं। इसमें से करीब 150 प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। पर्यावरण में सुधार होने से कई प्रजातियों के माइग्रेट करके आने की संभावनाएं बन रही हैं।

इन कारणों से वि”लु”प्त” हो रहीं तितलियां

डॉ. केपी सिंह के मुताबिक अंधाधुंध शहरीकरण, आवश्यक नेटिव पौधों के उजड़ने, अनुपयोगी पौधों के रोपण, मोबाइल टॉवरों की तरंगें, इंटरनेट वाले स्मार्ट फोन का तितलियों के हेवीटाट तक पहुंचना, फसलों में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवाइयां, तस्करी आदि तितलियों के विलुप्त होने का मुख्य कारण हैं।

इन पेड़-पौधों पर निर्भर है ति”त”लि”यों का जीवन

तितलियां जैव विविधता का महत्वपूर्ण अंग हैं। परागण की प्रक्रिया में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी कमी फसल के उत्पादन को भी प्रभावित करती हैं। तितलियों का जीवन चक्र होस्ट प्लांट व नेक्टर प्लांट पर निर्भर रहता है। होस्ट प्लांट पर तितलियां अंडे देती हैं व नेक्टर प्लांट से भोजन और ऊर्जा ग्रहण करती हैं। होस्ट प्लांट में पत्थरचटा, मीठा नीम, केसिया, लैमन, मैंगा, पीलू, पीकॉक फ्लॉवर, अरंडी आदि आते हैं। नेक्टर प्लांट में गुलाब, चित्रक, पलाश, सैभल, शिरिश, जैट्रोफा, गेंदा, अनार, गुड़हल, खैर, कैथ, महुआ, पलाश, सहजन, सूरजमुखी आदि पौधे आते हैं।

राज्य तितली का दर्जा


उत्तराखंड और महाराष्ट्रने अपने यहाँ पायी जाने वाली विशेष तितलीयों को राज्य तितली का दर्जा दिया है। ‘कॉमन पीकॉक’ नाम की तितली प्रजाति को उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड ने राज्य तितली का दर्जा दिया है। ‘कॉमन पीकॉक’ तितली की एक दुर्लभ प्रजाती है जो केवल भारत के हिमालयी क्षेत्रों (7000 फीट) में पाई जाती है। दूसरी ओर महाराष्ट्र ने सहयाद्रि की पहाड़ियों में मिलने वाली ब्लू मॉरमॉन प्रजाति की तितली को राजकीय तितली घोषित किया है। महाराष्ट्र में राजकीय प्राणी बड़ी गिलहरी और राजकीय पक्षी हरियल है।

आम राज्य का राजकीय वृक्ष और जारूल राजकीय फूल है। राज्य में करीब 225 प्रजातियों की तितलियां हैं। मखमली कालेरंग की ब्लू मॉरमॉन तितली बर्डविंग के बाद आकार में सबसे बड़ी तितली है। देश में पाई जाने वाली कुल तितलियों में से 15 फीसदी तितलियां महाराष्ट्र में पाई जाती हैं। श्रीलंका के अलावा इस प्रजाति की तितली महाराष्ट्र के पश्चिम घाट, दक्षिण भारत व पूर्वी समुद्री किनारे वाले इलाके में पाई जाती है।
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तितली फक्त फाइल

  •  तितली कीट की श्रेणी में आने वाला एक जीव है। तितलियों का जीवनकाल बेहद छोटा होता है और यह लगभग 1 से 2 सप्ताह तक ही जीवित रह सकती है। तितली का सम्पूर्ण जीवन चार भागों में विभाजित होता है जिनमें अंडा, लार्वा (केटरपिलर), प्यूपा (क्रिस्लिस) और वयस्क शामिल है।
  • तितली 17 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से उड़ सकती है।
  •  तितली को ठंडे खून का प्राणी माना जाता है।
  •  दुनिया की सबसे बड़ी तितली का नाम जायंट बर्डविंग है जो सोलमन द्वीपों पर पाई जाती है। विश्व में पाई जाने वाली तितलियों में सभी बड़ी तितली 12 इंच की और सबसे छोटे तितली आधे इंच की होती है।
  • तितलियाँ किसी भी चीज का स्वाद उस पर खड़ी होकर लेती हैं। क्योंकि इनके स्वाद चखने वाले सेंसर पैरों में पाए जाते है।
  •  तितलियां 100 किलोमीटर तक बिना अपना रास्ता भटके सटीक तरीके से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती हैं।
  •  तितली में सुनने की क्षमता नहीं होती लेकिन यह वाइब्रेशन को महसूस कर सकती है।
  • तितलियां अगले दिन के मौसम का अंदाजा एक दिन पहले ही लगा सकती हैं।
  • तितली भोजन के रूप में फूल,पत्तियां इत्यादि खाती हैं और लगभग अधिकांश तितलियां शाकाहारी ही होती हैं।
  •  तितलियां पराबैंगनी किरणों को देख सकती हैं जिन्हें इंसान नहीं देख सकते और तितली का आँख में 6000 लेंस होते हैं।
  • तितलियां 3000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं। विश्व की सबसे तेज़ उड़ने वाली तितली मोनार्च है जो एक घंटे में 17 मील की दूरी तय कर लेती है।
  • तितलियां होस्ट प्लांट पर अंडे देती हैं व नेक्टर प्लांट से भोजन और ऊर्जा ग्रहण करती हैं। होस्ट प्लांट में पत्थरचटा, मीठी नीम, आम, केसिया, नींबू, पीलू, पीकॉक फ्लॉवर, अरंडी आदि आते हैं। नेक्टर प्लांट में गुलाब, चित्रक, पलाश, सैभल, शिरिश, जैट्रोफा, गेंदा, अनार, गुड़हल, खैर, कैथ, महुआ, पलाश, सहजन, सूरजमुखी आदि पौधे आते हैं।

कार्बेट पार्क में तितलियों का संसार

यह तो साफ है दिख रहा है कि लॉक डाउन की वजह से हमारा वातावरण काफी स्वच्छ हो रहा है। आजकल तो मौसम भी अपने जलवे दिखा रहा है बादलों की मस्ती देख कर तो कोई भी मनुष्य मंत्रमुग्ध हो जाता है। लॉकडाउन के बाद कई ऐसे पौधे, जीव-जंतु कई सालों बाद देखने को मिल रहे हैं जिन्हें हम नहीं देख पाते थे या नहीं देखने को मिलते थे। जिन्हें हम लुप्त प्राय जातियां बोलते थे।लॉकडाउन में वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण कम होने रंग-बिरंगी तितलियां फिर से दिखने लगीं हैं। पर्यावरण वैज्ञानिक उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले दिनों में इनका कुनबा और बढ़ेगा। पर्यावरण प्रदूषण की वजह से तितलियां विलुप्त हो रही थीं।

 

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