देहरादून में मिली दुर्लभ प्रजाति की विशालकाय पीली छिपकली, अंधविश्वासी धार्मिक कर्मकांडों में होता है इसका उपयोग

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देहरादून में रिस्पना पुल के पास दुर्लभ प्रजाति की विशालकाय पीली छिपकली (येलो मॉनिटर लिजर्ड) देखी गई। दून में हरिद्वार बाईपास स्थित रिस्पना के करीब पहली बार दुर्लभ जंगली छिपकली मिली है। लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने उसे पकड़कर जंगल में छोड़ा। भारतीय वन्यजीव संस्थान के सरीसृप विज्ञानियों का  कहना है कि येलो मॉनिटर लिजर्ड सिर्फ गंगा के मैदानी क्षेत्रों में ही पाई जाती है। राजधानी क्षेत्र में इसका पाया जाना अपने आप में चौंकाने वाली बात है।

दरअसल यह छिपकली गंगा के किनारे घने जंगलों में रहती है। ये यहां आबादी में कैसे पहुंची, इस पर विभाग ने गोपनीय टीम लगाई है। छिपकली के तस्करी कर यहां लाए जाने की भी आशंका जताई गई है। क्योंकि छिपकली के एक अंग को कुछ अंधविश्वासी धार्मिक कर्मकांडों में प्रयोग में लाते हैं। रविवार को हरिद्वार बाईपास पर विधायक उमेश शर्मा काऊ के आवास के पास रिस्पना के करीब एक सफाई कर्मचारी सफाई कर रहा था। जिसे कुछ जंतु दिखाई दिया तो उसने पार्षद मनमोहन सिंह को सूचना दी। पार्षद ने इसकी जानकारी डीएफओ राजीव धीमान को दी।

डीएफओ के निर्देश पर रेस्क्यू टीम के हेड रवि जोशी एवं जितेंद्र बिष्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि ये तो दुर्लभ प्राणि येल्लो मॉनीटर लिजार्ड यानि जंगली छिपकली है।बता दें कि ये छिपकली गंगा के किनारे घने जंगलों में तराई इलाकों में पाई जाती है। ये छिपकली भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की उस श्रेणी में शामिल है जिसमें शेर, बाघ शामिल हैं। इसे मारने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। लोग इसे बेहद जहरीला मानते हुए अमूमन इसे मार देते हैं जबकि हकीकत यह है कि यह बिल्कुल भी जहरीली नहीं होती है।

 

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