जोशीमठ: गर्म पानी के इस कुं’ड में अ’ब सिर्फ भाप ही भाप दिखा’ई दे र’ही है | लोग देखकर हुए हैरान

अजब गजब पर्यटन प्रकृति शहर

कोरो’नावा’य’रस की वजह से इंसा’न जस का तस वही अटक गया है। घूम’ना फि’रना बंद हो गया था ऐसे में हमारे पर्यावरण में काफी परिवर्तन देखा गया पर्यावरण काफी स्वच्छ हुआ है। बदलते मौसम के साथ पर्यावरण में एक बड़ा बदलावा उत्तराखंड के जोशीमठ में देखने को मिला है।

 

जहां बहता हुआ खुलता हुआ गर्म पानी पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है। गर्म पानी के इस कुंड में अब सिर्फ भाप ही भाप दिखाई दे रही है. दरअसल, चमोली स्थित जोशीमठ से 18 किलोमीटर दूर तपोवन के समीप सलधार में स्थित वर्षों से निकलने वाला प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत अब पूरी तरह से सूख गया है। पानी के कुंड को देखने आए लोग अचंभित हैं कि अचानक इतना बड़ा बदलाव तपोवन के इस गर्म पानी के कुंड में कैसे हो गया है।

जोशीमठ


जोशीमठ या ज्योतिर्मठ उत्तराखण्ड राज्य में स्थित एक नगर है जहाँ हिन्दुओं की प्रसिद्ध ज्योतिष पीठ स्थित है।। यहां ८वीं सदी में धर्मसुधारक आदि शंकराचार्य को ज्ञान प्राप्त हुआ और बद्रीनाथ मंदिर तथा देश के विभिन्न कोनों में तीन और मठों की स्थापना से पहले यहीं उन्होंने प्रथम मठ की स्थापना की। जाड़े के समय इस शहर में बद्रीनाथ की गद्दी विराजित होती है जहां 6नरसिंह के सुंदर एवं पुराने मंदिर में इसकी पूजा की जाती है। बद्रीनाथ, औली तथा नीति घाटी के सान्निध्य के कारण जोशीमठ एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल बन गया है।

आम लोग भी है हैरान


यहां पहुंचे लोगों का कहना है वह जब यहां पहली बार आए थे, तब यहां दोनों तरफ गर्म पानी की धाराएं बहती थीं. बीच में पानी उबलता हुआ निकलता दिखाई देता था. यहां की मुल्तानी मिट्टी घर ले जाते थे. यहां अंडे उबाले जाते थे, चावल बनाए जाते थे, लेकिन आज पानी पूरी तरह से गायब हो चुका है उनका कहना है कि हालांकि गहराई पर पानी तो दिखाई देता है लेकिन पानी में इतनी ताकत नहीं रह गई कि वह ऊपर आकर दोनों किनारों से बह सके। यहां की मिट्टी हर कोई अपने घर ले जाता था, लेकिन आज यहां मुल्तानी मिट्टी के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है सब खत्म हो चुका है।
इस परिवर्तन को देखकर लोग हैरान हैं। लोगों का मानना है कि यह सब बदलते मौसम का परिणाम है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मौसम और पर्यावरण पर भी व्यापक असर दिख रहा है।

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