उत्तराखंड के चमोली सहित छः जिलों में ट्राउट मछली ने बदली तकदीर,जाने इसकी खासियत

अजब गजब

देहरादून राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत उत्तराखंड में पांच हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट मछली के उत्पादन को और अधिक गति देने की सरकार ने योजना बनाई है । इसके तहत राज्य में ट्राउट मछली के 12 नए आउटलेट खोले जाएंगे । अभी तक एक मात्र आउटलेट देहरादून स्थित आईटी पार्क में है । 12 नए आउटलेट में तीन देहरादून , हरिद्वार , ऊधमसिंह नगर , पौड़ी और अन्य जिलों में एक – एक आउटलेट खोले जाएंगे ।

पहाड़ के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट मछली की बेहतर पैदावार की जा रही इसकी डिमांड को देखते हुए सरकार का लक्ष्य 2023 तक इसकी पैदावार को 10 गुना तक बढ़ाने का है । यह मछली बाजार में एक हजार से 12 सौ रुपये किलो तक बिकती है । राज्य के छह जिलों चमोली , रुद्रप्रयाग टिहरी , उत्तरकाशी बागेश्वर , पिथौरागढ़ में क्लस्टर आधारित ट्राउट मछली का पालन हो रहा है । राज्य में 2017-18 का आंकड़ा देखा जाए तो 144 टन मछली का उत्पादन हुआ है ।

बता दें कि औषधीय गुणों से संपन्न होने के साथ ही यह मछली अपने टेस्ट के लिए जानी जाती है. इसे मीठे पानी में पाला जाता है जिसके लिए किसी पोखर या तालाब की भी मदद ली जा सकती है. इस मछली की खासियत ऐसी है कि देश-विदेश के फाइल स्टार होटलों में भी भारी मांग है. औषधीय गुण होने के कारण भी लोग इसे चाव से खरीदते हैं. इससे मछली पालन करने वाले लोगों को अच्छी कमाई होती है । राज्य में वर्तमान में चार हैचरी में 10 से 12 लाख मत्स्य बीज का उत्पादन हो रहा है। अगले दो वर्षों में यह संख्या 70 से 80 लाख करने का लक्ष्य है। इसके लिए हैचरी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा डेनमार्क से भी मत्स्य बीज मंगाया जा रहा है, जिसके अच्छे नतीजे सामने आए हैं।

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