10 दिनों तक गणपति जी को चढ़ाएं अलग-अलग प्रसाद

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हिन्दू धर्म में मान्यता के अनुसार आज के दिन ही गणेश जी का जन्म हुआ था. ऐसे में गणेश जी भक्त इस पर्व को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाते हैं. वह गणेश जी की प्रतिमा को अपने घर लाते हैं और पुरे 10 दिनों तक उनकी पूजा पाठ करके उन्हें समुन्द्र या नहर में अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जित कर देते हैं.आज हम आपको बताने जा रहें हैं की कैसे आप इन 10 दिनों के अंतराल में गणेश जी को उनकी पसंदिता भोग चढ़ाकर उन्हें खुश कर सकते हैं.मोदक: नारियल और गुड़ से बनी यह मिठाई गणेश जी को सबसे प्रिय हैं. इसलिए सबसे पहले दिन आप उन्हें मोदक का भोग लगाएं.मोतीचूर के लड्डू: शुद्ध घी से बने मोतीचूर के लड्डू गणपति जी और उनके वाहन मूषकराज को बहुत अधिक प्रिय होता हैं. ऐसे में आप दूसरे दिन इन शुद्ध घी से बने मोतीचूर के लड्डू की मिठाई का भोग लगाकर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं.

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नारियल चावल: नारियल चावल बनाने के लिए आप सूखे नारियल का चूरे और चावलों को दूध में पकाकर उसको तैयार कर लें. ठंडा होने पर आप उनको यह भोग तीसरे दिन लगा सकते हैं.पूरण पोली: पूरण पोली भी गणेश जी को बहुत ज्यादा पसंद आती हैं. ऐसे में आप चौथे दिन पूरण पोली का भोग लगा सकते हैं.श्रीखंड: पांचवे दिन आप गणेश जी को उनके सबसे प्रिय मिठाई, श्रीखंड का भोग लगा सकते हैं. श्रीखंड बाजार से आसानी से मिल जाता हैं, अगर न मिले तो आप पंचामृत या पंजीरी का भी भोग लगा सकते हैं.केले का शीरा: छठे दिन आपको कच्चे केले को मैश कर सूजी और चीनी मिलाकर पकाते हुए केले के शीरे को तैयार करना हैं. ठंडा होने के पश्चात आप इसे गणेश जी को भोग लगवा सकते हैं.रवा पोंगल: रवा यानी सूजी और मूंग की दाल को देसी घी में बनाते हुए बहुत सारे मेवे मिलाकर तैयार किया जाता हैं. सातवें दिन आप इसे बनाकर गणेश जी भोग लगाएं.

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पयसम: पयसम एक तरह से खीर को ही कहा जाता हैं. यह भी बाकी व्यंजकों की तरह भगवान् गणेश जी को बहुत पसंद आता हैं. ऐसे में आप आठवें दिन इसको बनाकर गणेश जी को भोग लगाएं.शुद्ध घी और गुड़: छुआरे और नारियल मिलाते हुए आपको देसी घी में गुड़ डालकर इसे तैयार करना होगा. इस व्यंजक को आपको नौंवे दिन गणेश जी को भोग लगाना चाहिए.छप्पन भोग: 10 वें दिन आप ऊपर दिए सभी भोग तैयार करें, इन्हें 56 भोग इसलिए कहा जाता हैं क्यों इनमे इस्तेमाल होने वाली चीजों की संख्या 56 होती हैं.इस तरह से आप गणपति जी को प्रसन्न करके उन्हें फिर विसर्जित कर सकते हैं. ध्यान रहें गणपति जी घर लाते हुए ध्यान दें की वह आर्गेनिक मिट्टी से बने हो जिससे समुन्द्र या फिर नदियों का पानी दूषित न हो.

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