चारों धाम को जोड़ने पर काम कर रहा भार’तीय रेलवे, पी’यूष गोयल ने कहा करोड़ों श्रद्धा’लुओं को लाभ

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उत्तराखंड जिसे पर्यटन के क्षेत्र के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में उत्तराखण्ड उल्लेख देखने को मिलता है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। इस लिए इसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है।


रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वीडियो ट्वीट पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी कि अब श्रद्धालुओं के लिए चार धाम यात्रा आसान की जाएगी। रेल मंत्री ने “चारधाम तक आसान होगी श्रद्धालुओं की पहुंच” उन्होंने यह जानकारी ट्विटर के माध्यम से दी । ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि रेल मंत्रालय चारधाम रेल परियोजना का निर्माण करने जा रहा है

रेल मंत्री पीयूष गोयल के ट्वीट पर धन्यवाद देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन्हें फोन कर धन्यवाद दिया, मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने ट्वीट देखा। उसके बाद रात को ही रेल मंत्री को धन्यवाद किया कि उन्हें गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ धाम को रेल परियोजना से जोड़ने का विचार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का भी ख्वाब है कि सीमा तक रेल पहुंचे। उसे आगे बढ़ाने का काम रेल मंत्रालय ने किया है। हमें राज्य में अवस्थापना सुविधाएं चाहिए। परियोजना के निर्माण से उत्तराखंड को इसका लाभ मिलेगा।

327 किमी की होगी चारधाम रेल परियोजना

चारधाम को ऑलवेदर रोड से जोड़ने के बाद अब केंद्र सरकार का फोकस चारों धामों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य आरंभ हो चुका है। इस परियोजना को विस्तार देकर इसे बदरीनाथ और केदारनाथ तक बढ़ाया जाएगा।

प्रस्तावित चारधाम रेल परियोजना 327 किमी की है। डोईवाला से गंगोत्री और देहरादून से उत्तरकाशी को रेल लाइन से जोड़ने की इस योजना का पायलट सर्वे हो चुका है। परियोजना पर 43 हजार करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके तहत 21 नए स्टेशन, 61 सुरंग, 59 पुल बनाए जाने प्रस्तावित हैं। रेल लाइन का 279 किमी हिस्सा सुरंगों में होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है चारधाम

गंगोत्री

गंगोत्री उत्तराखण्ड में वह स्थान है जंहा राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजो की मुक्ति के लिए गंगा जी (प्राचीन नाम भागीरथी ) को पृथ्वी पे उतारा था।
गंगोत्री नदी गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है जो गंगोत्री शहर से लगभग 18 किमी दूर है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित, गंगोत्री का मूल मंदिर 19वीं शताब्दी में बनाया गया था।

 यमुनोत्री

यमुनोत्री उत्तराखण्ड में वो जगह है जंहा भारत की दूसरी सबसे पवित्र नदी यमुना नदी का उद्गम स्थल है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धाम तीर्थ यात्रा में प्रथम पड़ाव है। ऐसा माना जाता है कि उसके पानी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है और असामान्य और दर्दनाक मौत से बचा जा सकता है। माना जाता है कि यमुनोत्री का मंदिर 1839 में टिहरी के राजा नरेश सुदर्शन शाह द्वारा बनाया गया था। यमुना देवी (देवी) के अलावा, गंगा देवी की मूर्ति भी मंदिर में स्थित है। मंदिर के पास कई गर्म पानी के झरने हैं; उनके बीच सूर्य कुंड सबसे महत्वपूर्ण है। इस कुंड में चावल और आलू उबालें जाते है और इसे देवी के प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता हैं।


केदारनाथ बद्रीनाथ जिसके साथ हिंदुओं की आस्था से जुड़ी हुई हैं वहां हर साल भारी मात्रा में श्रद्धालु पहुंचते हैं वह पूरे साल मंदिर के कपाट खुलने की प्रतीक्षा करते हैं इस लिहाज से वह श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है केदारनाथ मन्दिर भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है।

यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। बद्रीनाथ भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक स्थान है जो हिन्दुओं एवं जैनो का प्रसिद्ध तीर्थ है। यह उत्तराखण्ड के चमोली जिले में स्थित एक नगर पंचायत है। यहाँ बद्रीनाथ मन्दिर है जो हिन्दुओं के चार प्रसिद्ध धामों में से एक है। इस लिहाज़ से यह रेल परियोजना अधिक महत्व रखती है।

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