अब सभी कर पाएंगे चार धाम की यात्रा: इन नियमो का करना पड़ेगा पालन।

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लाखों लोग अपनी आध्यात्मिक क्षुधा को पूरा करने के लिए हर साल चार धाम की यात्रा पर जाते हैं। आध्यात्मिकता एक को शांति और शांति प्राप्त करने के लिए एक दिव्य यात्रा पर चलने के लिए प्रेरित करती है और एक ऐसी यात्रा, हिमालय के आकर्षक गढ़वाल में स्थित पवित्र चारधाम यात्रा है। चारधाम यात्रा, चतुर हिंदू संस्कृतियों और आकर्षक हिमपातिक हिमालय की सुंदरता का पता लगाने का शानदार अवसर है। यात्रा – चार प्रमुख पवित्र स्थलों के माध्यम से एक यात्रा – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ (जिन्हें चार ‘धाम’ भी कहा जाता है) भक्तों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव से कम नहीं है। स्थानों में से प्रत्येक का अपना अलग-अलग और पौराणिक इतिहास रहा है।

कोविड-19 के चलते चार धाम यात्रा पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने चमोली, रूद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलाधिकारियों की सलाह के आधार पर यह आदेश जारी किया है। और इस प्रतिबंध को कुछ नियमों के साथ हटा दिया गया है यानी कि आप श्रद्धालु चार धाम की यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ गाइडलाइन जारी की गई है। इससे पहले केवल उत्तराखंड में रहने वाले लोगों के लिए ही चार धाम यात्रा को खोला गया था परंतु अब इसे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी खोला जा रहा है परंतु यह नियम उन लोगों पर लागू नहीं होते जो कंटेनमेंट जोन में रहते हैं आइए जानते हैं उन कुछ नियमों के बारे में।

पुजारियों और स्थानीय निवासियों ने तीर्थयात्रियों को रहने की अनुमति।

उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन द्वारा दिए गए एक आदेश के अनुसार, स्थानीय पुजारियों के साथ-साथ जिन जिलों में चार धाम मंदिर स्थित हैं, वहां के जिला मजिस्ट्रेट, पुजारियों और स्थानीय निवासियों ने तीर्थयात्रियों को रहने की अनुमति दी है। सभी दिशानिर्देशों का पालन करते हुए जिन जिलों में चारों तीर्थ मौजूद हैं वहां के लोग और आस-पास दर्शन लिए सीमित संख्या में आ सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग इन जिलों में होटल, गेस्ट हाउस और दुकान चलाते हैं या इन जिनों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी जो अपना काम फिर से शुरू करना चाहते हैं, उन्हें भी आने-जाने की अनुमति होगी।

टोकन प्रणाली

बदरीनाथ मंदिर में दर्शन के लिए बोर्ड ने अलग से एक मानक प्रचालन विधि (एसओपी) भी जारी किया है जिसमें दर्शन के लिए निशुल्क टोकन की व्यवस्था की जाएगी। तीर्थयात्रियों को मंदिरों में मौजूद काउंटर से अनिवार्य रूप से मुफ्त टोकन लेना होगा। टोकन पर एक निश्चित समय और दर्शन की तारीख का उल्लेख किया जाएगा। मंदिर के प्रवेश द्वार पर टोकन की जांच की जाएगी। जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति को एक बार में तीन से अधिक टोकन नहीं दिए जाएंगे।

सीमित होगी ​तीर्थयात्रियों की संख्या

9 जून को जारी यात्रा दिशानिर्देशों के अनुसार, बदरीनाथ के लिए एक दिन में 1200, केदारनाथ के लिए 800, गंगोत्री के लिए 600 और यमुनोत्री के लिए एक दिन में अधिकतम 400 लोगों को दर्शन की अनुमति दी जाएगी। केदारनाथ मंदिर के अंदर हर घंटे सिर्फ 80 तीर्थयात्रियों को दर्शन के लिए प्रवेश की अनुमति होगी। वहीं बदरीनाथ मंदिर में सिर्फ 120 तीर्थयात्रियों की अनुमति होगी। हालांकि, बाहरी लोगों के लिए यात्रा 30 जून तक स्थगित रहेगी।


दर्शन के लिए केवल एक मिनट

केदारनाथ मंदिर में तीर्थयात्रियों को दर्शन के लिए केवल एक मिनट का समय दिया जाएगा, जबकि बद्रीनाथ मंदिर में दर्शन के लिए केवल 30 सेकंड का समय दिया जाएगा। इससे पहले, चारों धामों के पुजारियों तथा अन्य हितधारकों के यात्रा को फिलहाल खोले जाने को लेकर विरोध के चलते राज्य सरकार ने रविवार देर रात इस संबंध में जिला प्रशासन सहित विभिन्न पक्षों से राय-मशविरा करके निर्णय लेने का अधिकार नवगठित चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर छोड़ दिया था।


​इन बातों का रखें ख्याल

एसओपी के अनुसार, सभी तीर्थयात्रियों को मास्क पहनना होगा और हर तीर्थस्थल पर एक-दूसरे से निर्धारित दूरी पर रहना होगा यानी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। लोगों को कतार से ही प्रवेश मिलेगा। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का पूरा खयाल रखा जाएगा और गेट पर सैनिटाइजर रखा होगा। अगर आप भी मंदिर में दर्शन और प्रार्थना के लिए जा रहे हैं, तो हमारी सलाह है कि आसपास मौजूद लोगों से थोड़ी दूरी बनाकर रखें। मंदिर में दूसरों के स्पर्श से बचें और दर्शन के दौरान किसी के आगे नहीं खड़े हों।

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