भाजपा में शामिल हुई उठाने वाली सायरा बानो

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तीन तला”क” के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी जंग लड़ने वाली सायरा बानो ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले की रहने वाली सायरा बानो ने प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की मौजदूगी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।

सायरा बानो देश की पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उत्तराखंड की रहने वाली सायरा बानो ने ही पहली बार तीन तलाक (Triple Talaq), बहुविवाह (Polygamy) और निकाह हलाला पर प्रतिबंध लगाने की माँग करते हुए फरवरी 23, 2016 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। इस कानूनी लड़ाई में उन्हें जीत हासिल हुई।
बीजेपी में शामिल होने पर सायरा बानो ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से प्रेरित होकर वो पार्टी में शामिल हुईं हैं। वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेंगी। बीजेपी में शामिल होने पर प्रतिक्रिया देते हुए सायरा बानो ने पीटीआई से कहा, “बीजेपी का मुस्लिम महिलाओं के प्रति प्रगतिशील दृष्टिकोण और जिस प्रतिबद्धता के साथ समावेशी विकास के दरम्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ट्रिपल तलाक मुद्दे पर काम किया, उसने मुझे पार्टी में शामिल होने के लिए आकर्षित किया।”
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर की रहने वाली सायरा बानो (38) कहती हैं कि वह अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के बीच बीजेपी के बारे में मौजूद ग़लतफ़हमियाँ दूर करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने और उच्च शिक्षा तक पहुँच से वंचित करने जैसे अन्याय से छुटकारा पाने के लिए भाजपा में शामिल हुई।

बानो ने यह भी कहा कि वह भाजपा के बारे में गलत धारणाओं को तोड़ने की कोशिश करेंगी कि यह अल्पसंख्यक विरोधी है। उन्होंने कहा, “मैं अल्पसंख्यकों के प्रति पार्टी के निष्पक्ष इरादों में विश्वास करती हूँ। पार्टी के अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने की गलत धारणा को तोड़ दिया जाना चाहिए।”
जब सायरा से पूछा गया कि क्‍या वह चुनाव लड़ेंगी तो उनका कहना था कि वह चुनाव लड़ने के मकसद से बीजेपी में नहीं आई हैं लेकिन अगर बीजेपी उन्हें टिकट देगी तो वह इनकार नहीं करेंगी। सायरा ने कहा, “मेरी पार्टी मुझसे जो कहेगी वह मैं करूँगी।”

उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं सायरा बानो


उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली सायरा बानो ने ही पहली बार तीन तलाक (Triple Talaq), बहुविवाह (Polygamy) और निकाह हलाला पर बैन लगाने की मांग करते हुए फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सायरा का​ निकाह 2002 में इलाहाबाद के एक प्रॉपर्टी डीलर से हुई थी. सायरा का आरोप था कि शादी के बाद उन्हें हर दिन पीटा जाता था. पति हर दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था. पति ने उन्हें टेलीग्राम के जरिए तलाकनामा भेजा. वह एक मुफ्ती के पास गईं तो उसने कहा कि टेलीग्राम से भेजा गया तलाक जायज है. इसके बाद सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के रिवाज को चुनौती दी.

पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था

सायरा बानो देश की पहली मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने 23 फरवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ याचिका दायर की थी. इस कानूनी लड़ाई में उन्हें जीत हासिल हुई थी.
सायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके ट्रिपल तलाक के साथ ही निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी. याचिका में उन्होंने मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह प्रथा को भी गलत करार देते हुए इसे खत्म करने की मांग उठाई थी. सायरा का तर्क रहा है कि तीन तलाक संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

बीजेपी में शामिल होने पर सायरा बानो ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी की नीतियों से प्रेरित होकर वो पार्टी में शामिल हुईं हैं. वो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेंगी. बता दें कि तीन तलाक के मुद्दे पर 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए. इस फैसले के बाद केंद्र सरकार तीन तलाक के खिलाफ कानून भी लेकर आई और आज देशभर की मुस्लिम महिलाएं सुकून की जिंदगी जी रही हैं.

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