उत्तराखंडः ग्रामिणों ने मरीजों को डोली में मरता देख किया निश्चय, 6 दिन में खुद बनाई 300 मीटर सड़क

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उत्तराखंड में पहाड़ पर भले ही ऑलवेदर प्रोजेक्ट के लिए करोड़ो रूपए खर्च हो रहे हो, लेकिन कई गांव दशकों से सड़क से महरूम है। ग्रामीण दशकों से सड़क की मांग कर रहे है। सांसद विधायक जनप्रतिनिधि उन्हे महज आश्वसन देकर टाल देते है। अल्मोड़ा के सोमेश्वर से सटे केवल ढाई किलोमीटर सड़क नहीं बन पाने के कारण सांसद आदर्श गांव सुनोली के सीमा – कालीगाड़ तोक के लोग आज भी पतली और दुरूह पगडंडियों पर मरीजों को डोली में ले जाने के लिए मजबूर हैं ।

शासन – प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने की ठानी और गैंती , फावड़ा- बेलचे हाथ में लेकर जुट गए सड़क बनाने में । छह दिन में ही गांव वालों दोपहिया वाहन चलने लायक करीब 300 मीटर सड़क बना ली है । अल्मोड़ा – बागेश्वर मार्ग पर बसौली कसबे से ग्राम पंचायत सुनोली तक सड़क बनी । सुनोली पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्व . सोबन सिंह जीना का पैतृक गांव है । लेकिन ढाई किमी स्थित इसके तोक ( मझरा ) सीमा और कालीगाड़ तक सड़क नहीं है सीमा – कालीगाड़ वाले दशकों से सांसद , विधायक और लोनिवि अधिकारियों से सड़क बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई । इन दोनों तोकों के 50 परिवारों में से आधे पलायन भी कर चुके हैं ।

यहां के लोगों को मरीज को अस्पताल ले जाना हो या गैस सिलिंडर लाना हो तो सीले रास्ते पर करीब ढाई किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना होता है । हर तरफ से निराशा हाथ लगने पर ग्रामीणों ने आपस में विचार विमर्श कर सीमा – कालीगाड़ तोक को सड़क से जोड़ने का निर्णय लिया । कोरोनाकाल में घर लौटे दर्जनभर युवाओं ने भी उनमें जोश भरा। जिसके बाद अब यहां छह दिन में ही गांव वालों दोपहिया वाहन चलने लायक करीब 300 मीटर सड़क बना ली है ।

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