डी’एम स्वाति एस भदौरिया की पहल: जिले में गठित सर’कारी समितियों के माध्यम से किसानों से उचित मूल्य पर मंडुवा और झंगोरा खरीदा जाएगा।

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सीमांत जिले चमोली में पारंपरिक फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में धीरे-धीरे मंडुवा, झंगोरा, चौलाई जैसी पारंपरिक फसलों को अच्छा बाजार मिलने लगा है। मांग बढ़ने की वजह से ग्रामीण भी मंडुवा-झंगोरा की खेती करने के लिए आगे आ रहे हैं।


इसी कड़ी में चमोली जिला प्रशासन ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। मंडुवा और झंगोरा की खरीद के लिए चमोली जिले में पांच क्रय केंद्र खोले गए हैं। इससे काश्तकारों को अपनी फसल का उचित दाम मिलेगा। उन्हें मंडुवा-झंगोरा की बिक्री के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। किसान इसे सरकारी केंद्रों पर बेचेंगे, जहां हर किसान को इसका सही दाम मिलेगा। डीएम स्वाति एस भदौरिया की पहल पर उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ के अंतर्गत जिले में सरकारी समितियों का गठन किया गया है। जिले में गठित सरकारी समितियों के माध्यम से किसानों से उचित मूल्य पर मंडुवा और झंगोरा खरीदा जाएगा।

Dm स्वाति भदौरिया


चमोली जिले की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने देश में हुए एक सर्वे में 50 लोकप्रिय कलेक्टर की सूची में स्थान पाया है। सर्वे में जिलाधिकारी चमोली को जहां उम्दा अधिकारियों की श्रेणी में रखा गया है।नव नियुक्त जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया वर्ष 2012 बैच की आइएएस हैं। इससे पहले वे हरिद्वार जिले की मुख्य विकास अधिकारी रह चुकी हैं। डीएम के पदभार ग्रहण करने के बाद जिला मुख्यालय गोपेश्वर में जिलाधिकारी का पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने सबसे पहले भगवान बदरीनाथ व गोपीनाथ के दर्शन किए।

पर्वतीय क्षेत्रों की मुख्य फसलों में शुमार है,मंडुवा और झंगोरा


उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खरीफ की मुख्य फसलों में शुमार मंडुवा व सांवा (झंगोरा-मादिरा) का रकबा घट रहा है। राज्य गठन से लेकर अब तक की तस्वीर इसकी तस्दीक कर रही है। वर्ष 2001-02 में 1.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मंडुवा की खेती होती थी, वह 2018-19 में घटकर करीब 92 हजार हेक्टेयर पर आ गई। इसी तरह झंगोरा के क्षेत्रफल भी 18 हजार हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। ऐसे में सरकार की पेशानी पर भी बल पड़े हैं। वजह ये कि देश-दुनिया में पौष्टिकता से लबरेज मंडुवा-झंगोरा की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए अब इन फसलों के लिए क्लस्टर आधारित कृषि को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि केंद्र की परंपरागत कृषि विकास योजना का संबल मिलने पर इस वर्ष वह मंडुवा-झंगोराका क्षेत्रफल बढ़ाने में सफल रहेगी।

मंडुवा और झंगोरा राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की महत्वपूर्ण परंपरागत फसलों में शामिल हैं। खरीफ में मंडुवा दूसरी व झंगोरा तीसरी मुख्य फसल है। असिंचित भूमि में उगाई जाने वाली वर्षा आधारित यह फसलें मृदा संरक्षण के साथ ही सूखे की स्थिति को सहन करने की क्षमता रखती हैं। पौष्टिकता से लबरेज होने के कारण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग में भारी इजाफा हुआ है।

किसान उत्पादित मंडुवा और झंगोरा बेच सकते हैं।


इन उत्पादों की खरीद के लिए उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ ने चमोली जिले में पांच क्रय केंद्र खोले हैं। जहां किसान उत्पादित मंडुवा और झंगोरा बेच सकते हैं। केंद्र कौन-कौन से क्षेत्रों में स्थापित हैं, ये भी नोट कर लें। चमोली जिले में नारायणबगड़, गैरसैंण, थराली में क्रय केंद्र खोले गए हैं। इसके अलावा दशोली ब्लॉक के छिनका और कर्णप्रयाग ब्लॉक के ढुंगल्वाली में भी क्रय केंद्र स्थापित किया गया है। सरकारी संघ ने मंडुवा और झंगोरा खरीद के लिए दरें भी निर्धारित की हैं। डीएम स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि क्रय केंद्र खुलने से क्षेत्र के किसानों को कई फायदे होंगे। उन्हें अपनी फसल की बिक्री के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। वो इसे क्रय केंद्र पर बेच सकते हैं। जिससे जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को मंडुवा और झंगोरे का उचित मूल्य मिलेगा।

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