पौ’ड़ी गढ़’वाल के वो आक’र्षक पर्यटन स्थल जो बढ़ाते हैं उत्तराखंड की शो’भा

पर्यटन

इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि उत्तराखंड प्रकृति का दिया हुआ एक तोहफा है। हमारी पृथ्वी का स्वर्ग है खूबसूरत में खूबसूरती है उत्तराखंड। उत्तराखंड में इतने खूबसूरत दर्शनीय स्थल है जिसे देखे बिना मनुष्य का जीवन बिन जल मछली की तरह है इसीलिए इसी खूबसूरती को देखने जगह-जगह देश-देश से लोग यहां आते हैं। ऋषिकेश, नैनीताल, धनोल्टी, पौड़ी आदि जगहों को देखने हर साल अधिक पर्यटक उत्तराखंड में आते हैं उन्हीं में से एक है पौड़ी गढ़वाल।


उत्तराखण्ड का पौडी गढवाल जिला क्षेत्रफल के हिसाब से उत्तरांचल का तीसरा सबसे बडा जिला है। पौडीगढवाल जिले का क्षेत्रफल 5399 वर्ग किलोमीटर है। इस जिले मै पौडी, श्रीनगर, कोटद्धार, लैंसडाउन, दुगड्डा, देवप्रयाग जैसे प्रमुख शहर आते है। पौडीगढवाल जिले का मुख्यालय पौडी शहर है यह जिला केदारनाथ व बद्रीनाथ यात्रा का प्रवेशद्धार भी माना जाता है। तथा सौंदर्य की दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण जिला है। पौडी गढवाल में पर्यटन तथा धार्मिक स्थलो की कोई कमी नही है। पौडीगढवाल जिले की सीमा उत्तराखण्ड के टिहरीगढवाल,रूद्रप्रयाग,चमोली,अल्मोडा,नैनीताल,देहरादून,हरिद्धार तथा उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की सीमा से मिली हुई है।

इस मनोरम स्थल से हिमशिखर के सुंदर नजारे पर्यटकों को आकर्षित करते है।

खिर्सू


पौड़ी भ्रमण की शुरूआत आप यहां के चुनिंदा खास पर्यटन स्थलों में शामिल खिर्सू से कर सकते हैं। खिर्सू पौड़ी से ही जुड़ा हुआ एक खूबसूरत पहाड़ी गांव है, जो शानदार पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है। पौड़ी से खिर्सू तक जाने वाला पहाड़ी रास्ता एक ट्रेकिंग मार्ग है, जिसके माध्यम से आप रोमांच का अनुभव कर सकते हैं। इस मार्ग के द्वारा गांव तक पहुंचने में 50 मिनट का समय लगता है। यह सफर रोमांचक के साथ-साथ काफी दिलचस्प भी है। चारों तरफ फैले ओक के पेड़ इस मार्ग को खूबसूरत बनाने का काम करते हैं। खिर्सू से आप हिमालय चोटियों के अद्भतु दृश्यों का आनंद जी भरकर ले सकते हैं। खिर्सू देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरा है।

कंडोलिया

पौड़ी से आप प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कंडोलिया मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर पौड़ी से लैंसडाउन के मार्ग पर स्थित है, जहां रोजाना स्थानीय श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। यह मंदिर गढ़वाल की स्थानीय देव कंडोलिया देवी को समर्पित है। यह मंदिर अपने वार्षिक मेले के लिए भी जाना जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दौरान भोजन वितरण और साफ-सफाई संबंधी काम भी किए जाते हैं। इस मंदिर में स्थानीय लोगों के अलावा ट्रैवलर्स को भी आगमन होता है। इसके अलावा आप यहां आकर पहाड़ी खूबसूरत का आनंद भी ले सकते हैं।

चौखंभा व्यू प्वाइंट

अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, और कुदरती खूबसूरती के साथ थोड़ा क्वालिटी टाइम स्पेंड करना चाहते हैं तो यहां चौखंभा व्यू प्वाइंट जरूर आएं। हिमालय की शानदार पहाड़ियों और बर्फ से ढकी चोटियों को देखने के लिए यह स्थल काफी आदर्श माना जाता है। यह खास स्थल मुख्य शहर पौड़ी से मात्र 5 किमी की दूरी पर स्थित है। चौखंभा व्यू प्वाइंट घनी वनस्पतियों के साथ प्रकृति के बेहतरीन दृश्य पेश करने का काम करता है। अगर आप फोटोग्रामी का शौक रखते हैं तो यह जगह आपके लिए जन्नत साबित होगी। जीवन के एक अलग अनुभव के लिए आप यहां आ सकते हैं।

क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर


पौड़ी के नजदीक धार्मिक स्थलों में आप प्राचीन क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 700 ईस्वी में संकराचार्य ने करवाया था। यह प्राचीन मंदिर यहां के सबसे प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में गिना जाता है, जहां आप अपार आत्मिक और मानसिक शांति का अनुभव किया जा सकता है। क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर समुद्र तल से लगभग 1800 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। धार्मिक महत्व के अलावा यह मंदिर अपनी खास भौगोलिक सरंचना के बल पर दूर-दराज के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह मंदिर घने जंगल और हिमालय की अद्बुत चोटियों के मध्य बसा है। आध्यात्मिक अनुभव के लिए आप यहां जरूर आएं।

तारकेश्वर महादेव मंदिर


यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। ‘गढ़वाल राइफल’ के मुख्यालय लांसडाउन से यह मंदिर 36 किलोमीटर दूर है। देवदार और पाइन के घने जंगलों से घिरा यह स्थान उन लोगों के लिए आदर्श स्थान है, जो प्रकृति में सौंदर्य की तलाश करते हैं। शिवरात्रि के दौरान यहाँ पैर एक विशेष पूजा की जाती है। मंदिर समिति आवास के लिए एक धर्मशाला की सुविधा प्रदान करता है

तारा कुंड

उपरोक्त स्थलों के अलावा आप पौड़ी के प्रसिद्ध तारा कुंड की सैर का आनंद ले सकते हैं। यह जलाशय समुद्र तल से लगभग 2250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां स्थित प्राचीन मंदिर और जलाशय पौड़ी के इस स्थल को खास पर्यटन स्थल बनाने का काम करते हैं। तारा कुंड खूबसूरत हिमालय पहाड़ियों और घने जंगलों के साथ बसा है। एक रिफ्रेशिंग एहसास के लिए आप यहां का भ्रमण के लिए आ सकते हैं। अगर आप एकांत प्रेमी हैं तो यह स्थल आपके लिए ही बना है। यहां आकर आप अपना एकांत समय एंजॉय कर सकते हैं। इन सब के अलावा ताराकुंड एडवेंचर के शौकीनों को भी यहां आने के लिए आमंत्रित करता है। यहां आप रोमांचक ट्रेकिंग का आंनद ले सकते है।

माँ धारी देवी मंदिर

देवी काली को समर्पित मंदिर यह मंदिर इस क्षेत्र में बहुत पूजनीये है। लोगों का मानना है कि यहाँ धारी माता की मूर्ति एक दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं पहले एक लड़की फिर महिला और अंत में बूढ़ी महिला । एक पौराणिक कथन के अनुसार कि एक बार भीषण बाढ़ से एक मंदिर बह गया और धारी देवी की मूर्ति धारो गांव के पास एक चट्टान के रुक गई थी। गांव वालों ने मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई सुनी और पवित्र आवाज़ ने उन्हें मूर्ति स्थापित करने का निर्देश दिया।
हर साल नवरात्रों के अवसर पर देवी कालीसौर को विशेष पूजा की जाती है। देवी काली के आशीर्वाद पाने के लिए दूर और नजदीक के लोग इस पवित्र दर्शन करने आते रहे हैं।मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है ।यह मंदिर दिल्ली-राष्ट्रीय राष्ट्रीय राजमार्ग 55 पर श्रीनगर से 15 किमी दूर है ।अलकनंदा नदी के किनारे पर मंदिर के पास तक 1 किमी-सीमेंट मार्ग जाता है।

नागदेव मंदिर

यह मंदिर पौड़ी-बुबाखाल रोड पाइन और रोडोडेंड्रन के घने जंगल के बीच में स्थित है। मंदिर के रास्ते में एक वेधशाला स्थापित की गयी है जहां से चौखंबा, गंगोत्री समूह, बन्दर पूँछ , केदरडोम, केदारनाथ आदि जैसे शानदार हिमालय पर्वतमाला के विशाल और रोमांचकारी दृश्य देखे जा सकते हैं। मंदिर बस स्टेशन से 5 किमी दूर स्थित है तथा यहाँ पर 1 और 1/2 किलोमीटर ट्रेक द्वारा भी पहुंचा जा सकता है।

माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर


देवी दुर्गा को समर्पित इस क्षेत्र का प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ ज्वाल्पा देवी का मंदिर पौड़ी-कोटद्वार मोटर सड़क पर पौड़ी से लगभग 33 किमी दूरी पर स्थित है।लोग दूर दूर से अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए नवरात्रों के दौरान एक विशेष पूजा के लिए आते हैं।पर्यटक विश्रामगृह और धर्मशाला यहां उपलब्ध हैं।मंदिर नदी नायर नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है तथा पास का स्टेशन सतपुली लगभग 17 किमी है।

श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर


1428 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर में बैऔलाद जोड़ों के बीच बहुत प्रसिद्ध है । मंदिर में एक शिवलिंग है जो पूर्व में हिमालय पर्वतमाला, पश्चिम में हरिद्वार और दक्षिण में सिद्ध पीठ मेदानपुरी देवी मंदिर से घिरा हुआ है। किंवदंती यह है कि खुदाई करते समय एक गांव की महिला ने शिव लिंग पर अनजाने ने चोट कर दी थी तब एक दिव्य आवाज सुनाई पड़ी और लोगों को शिव को समर्पित मंदिर बनाने का निर्देश प्राप्त हुआ ।तदनुसार, कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण किया गया ।यह माना जाता है कि श्रावण के पूरे महीने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महामृतुन्जय मंत्र का पालन करने वाले बैऔलाद जोड़ों को भगवान का आशीष मिलता है और उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

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