शेफ की नौकरी छूटी तो गढ़वाल के इस मेहनती युवा ने घर में ही बनाया लिंगुड़े का अचार..

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कोरोना काल में कई लोगों की नौकरियां गई। लोगों को शहर छोड़कर वापस गांव जाकर काम करना पड़ा। कई लोग जहां हाथ पर हाथ धर कर हालात सुधरने का इंतजार करते रहे, तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे। जिन्होंने अपने हुनर के जरिए ना सिर्फ अपनी बल्कि अपने जैसे कई बेरोजगारों की किस्मत संवारने की ठान ली। ऐसे ही लोगों में से एक हैं उत्तराखंड के रहने वाले टीकाराम पंवार। उत्तरकाशी के रहने वाले टीकाराम पंवार आज स्थानीय पहाड़ी व्यंजनों को बेहतर पैकेजिंग में ढाल कर दूर-दूर तक पहुंचा रहे हैं। टीकाराम पंवार के इस प्रयास से क्षेत्रीय किसानों, महिलाओं और श्रमिकों को रोजगार का साधन तो मिला ही है, साथ ही लोकल फूड प्रोडक्ट को बड़े स्तर पर पहचान भी मिली है। ठांडी गांव के रहने वाले टीकाराम पंवार बेंगलुरु के फाइव स्टार होटल में शेफ के तौर पर कार्यरत थे।

लॉकडाउन लगा तो टीकाराम गांव लौट आए। उनका गांव वापस चले आना यहां के लोगों के लिए वरदान बन गया। गांव लौटकर उन्होंने अपने हुनर का इस्तेमाल किया और लिंगुड़े का अचार, पहाड़ी मसाले, मिक्स दाल, भुजेला की बड़ी और हर्बल-टी जैसे प्रोडक्ट तैयार करने लगे। उन्होंने पहाड़ में मिलने वाले लिंगुड़े और खुबानी के अचार की रेसेपी तैयार की। घराट यानी पनचक्की में मसाले पीसे। औषधीय पौधों से हर्बल टी तैयार की और इन्हें आय का साधन बनाया। पहाड़ में बने उत्पाद बेचकर वो अब तक 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर चुके हैं।
टीकाराम पंवार 8 साल तक दुबई में शेफ के तौर पर काम करते रहे। साल 2018 के बाद वो बंगलुरु के फाइव स्टार होटल हयात में काम करने लगे।

मई में जब वह शहर वापस आया, तो उसने स्ट्रीम चैनलों के करीब विकसित होने वाले लिंग से अचार बनाना चुना। सबसे पहले, उन्होंने परिवार के साथ दो क्विंटल अचार की व्यवस्था की। जिसे देहरादून और उत्तरकाशी में प्रत्येक किलो के लिए 400 रुपये में बेचा गया था। इस उपलब्धि से सशक्त होकर, टीकाराम आज ढलान की वस्तुओं और प्रथागत भोजन का अनुभव करने के लिए उत्साहित है। वे अतिरिक्त रूप से ज़ोन के निवासियों से बीट्स, मांडुवा और अन्य ढलान की वस्तुओं की खरीद कर रहे हैं, जो गरुड़ बाजार के माध्यम से बेचे जा रहे हैं। बॉस मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अपने प्रयासों को सराहा है। टीकाराम कहते हैं कि हमारा काम पहाड़ के नतीजों को गढ़वाल के सभी होटल मालिकों तक पहुंचाना है। यह हमारे प्रथागत खाना पकाने के लिए एक और चरित्र देगा।

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