देहरादून के नए SSP योगेंद्र रावत कड़क एक्शन में .

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पुलिस की छवि आम लोगों के बीच अच्छी नहीं है, लेकिन कुछ पुलिस अफसर हैं, जो खाकी की छवि को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। देहरादून के नए एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ऐसे ही पुलिस अफसरों में से एक हैं। दून एसएसपी का प्रभार संभालने के साथ ही उन्होंने लापरवाह मातहतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। बीती रात एसएसपी ने रात्रि चेकिंग में लापरवाही बरतने के आरोप में एक चौकी प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। इसके अलावा एसएसपी ने पीएसी के दो कांस्टेबलों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत सोमवार देर रात शहर के औचक निरीक्षण पर निकले थे। वो निजी वाहन से शहर का दौरा कर रहे थे।

इस दौरान एसएसपी ने थाना पटेलनगर, रायपुर, बालावाला, बाजार क्षेत्र में पिकेट आदि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बाजार क्षेत्र और बालावाला में पिकेट ड्यूटी में मौजूद पीएसी कर्मियों की लापरवाही सामने आई। एसएसपी योगेंद्र सिंह रावत ने रात एक बजे शहर का दौरा किया। उन्होंने राजपुर से चेकिंग शुरू की। इसके बाद रायपुर और बालावाला बैरियर पर पहुंचे। यहां पर पुलिसकर्मी मौजूद तो थे, लेकिन गाड़ियों की चेकिंग सही तरह से नहीं हो रही थी। शहर कोतवाली होते हुए एसएसपी पटेलनगर स्थित निरंजनपुर मंडी पहुंचे। यहां पुलिसकर्मी बैरियर लगाकर खड़े थे, लेकिन उन्होंने एसएसपी के वाहन को नहीं रोका। एसएसपी ने पुलिसकर्मियों से चेकिंग न करने संबंधी सवाल पूछा तो पुलिसकर्मी कोई जवाब नहीं दे सके।

इसके बाद एसएसपी ISBT के माध्यम से ISARODI और नयागांव गए। यहां उनके वाहन को रोककर जांच की गई। दायित्व के दौरान लापरवाही के लिए एसएसपी के दिशा निर्देशों पर एक स्टेशन को चार्ज के लिए याद करते हुए छह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाया गया था। जिन व्यक्तियों को लाइन में लगाया गया है उनमें बलवाला आउटपोस्ट इंचार्ज प्रेम सिंह नेगी, हेड कांस्टेबल विजय जखमोला पुलिस स्टेशन पटेल नगर, कांस्टेबल लक्ष्मण सिंह रायपुर और कॉन्स्टेबल आदेश कुमार पुलिस स्टेशन पटेलनगर शामिल हैं। इसी तरह, पीएसी कार्यकर्ताओं कांस्टेबल पवन कुमार और कांस्टेबल देवेंद्र को अतिरिक्त रूप से प्रस्तुत किया गया है। एसएसपी डॉ। योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रत्येक वाहन को शाम के समय के आसपास रोकने और अनुरोध करने के निर्देश दिए गए हैं, फिर भी कई पिकेट पर ऐसा नहीं हो रहा है। नतीजतन कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाया गया। भविष्य में भी जाँच होगी। Indiscreet पुलिस को बचाया नहीं जाएगा।

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