अब उत्तराखंड में हुआ बड़ा खुलासा CM तीरथ समेत सांसदों के बारे में RTI से ..आप भी जानिए

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उत्तराखंड के नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इन दिनों चर्चा में हैं। मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाले हुए उन्हें कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन एक के बाद एक विवादित बयानों को लेकर उनकी लगातार आलोचना हो रही है। पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें कोरोना का सुपर स्प्रेडर भी कहा जाने लगा था, क्योंकि सीएम बनने के बाद उन्होंने बिना मास्क लगाए कई बैठकों में हिस्सा लिया। अब नए सीएम को लेकर एक और खुलासा हुआ है। पौड़ी से सांसद रह चुके तीरथ सिंह रावत ने साल 2019-20 की सांसद निधि में से दिसंबर 2020 तक सिर्फ 8 फीसदी धनराशि खर्च की। जबकि 92 फीसदी निधि डंप पड़ी है। इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में हुआ है। मुख्यमंत्री ने सांसद निधि खर्च करने में कोताही क्यों बरती, इसे लेकर विपक्ष उन पर हमलावर हो सकता है। उत्तराखंड के सांसदों की बात करें तो साल 2021 की शुरुआत में 32.20 करोड़ की सांसद निधि खर्च होना बाकी है। जिसमें से 17.68 करोड़ की सांसद निधि लोकसभा सांसदों और 14.52 करोड़ की सांसद निधि राज्यसभा सांसदों की शामिल है। वर्तमान सीएम और पौड़ी के सांसद तीरथ सिंह रावत की वर्ष 2019-20 की सांसद निधि में से दिसंबर 2020 तक सिर्फ 8 प्रतिशत धनराशि खर्च हुई। जबकि हरिद्वार सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक कोई भी धनराशि खर्च नहीं कर पाए।


इस मामले में अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा का रिकॉर्ड बेहतर रहा। उन्हें ब्याज सहित 250.23 लाख की सांसद निधि मिली थी। जिसमें से 89 फीसदी निधि खर्च हुई है। पौड़ी सांसद तीरथ सिंह रावत को 250 लाख की सांसद निधि मिली है। जिसमें से केवल 20.25 लाख की धनराशि ही खर्च हो सकी है। टिहरी सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह को 250 लाख की सांसद निधि मिली, जिसमें से 77 प्रतिशत धनराशि खर्च हो चुकी है। नैनीताल सांसद अजय भट्ट को 251.21 लाख की धनराशि उपलब्ध हुई है। जिसमें से 61 प्रतिशत यानी 152.61 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। राज्यसभा सांसदों में प्रदीप टम्टा को 1512.11 लाख की सांसद निधि मिली। जिसमें से 86 प्रतिशत यानी 1302.30 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को साल 2018-19 की ब्याज सहित 504.22 लाख की सांसद निधि स्वीकृति के लिए उपलब्ध हुई है। जिसमें से दिसंबर 2020 तक 20 प्रतिशत यानी 102.22 लाख की धनराशि खर्च हो सकी है। बता दें कि काशीपुर में रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता और एडवोकेट नदीमुद्दीन ने ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से सांसद निधि खर्च संबंधी सूचना मांगी थी। जिसके अनुसार उत्तराखंड के वर्तमान लोकसभा सांसदों को साल 2019-20 की ही सांसद निधि मिली है। साल 2020-21 और 2021-22 की सांसद निधि भारत सरकार द्वारा स्थगित किए जाने के कारण किसी सांसद को नहीं मिली है।

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