वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड में बड़ा भूकंप आने के दिये संकेत……….

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भू”कं”प” की दृष्टि से उत्तराखंड बेहद संवे”दनशी”ल है। यहां जमीन के भीतर हो रही हल’च’ल के नतीजे अ”क्स’र सामने आते रहते हैं। कुछ दिन पहले चमोली में ”भू”कं”प” के झट”के” मह”सूस किए गए और फिर पिथौरागढ़ में धर”ती डो”ल गई। ”भूकं”प से इन इलाकों में कोई नुक”सा”न नहीं हुआ। पर अगर आप ये सोच रहे हैं कि ख”त”’रा टल गया है, तो सं”भ”ल जाइए। क्योंकि वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही उत्तराखंड में बड़ा भू”कं”प आ सकता है। पिछले चार साल की बात करें तो उत्तराखंड में 77 बार भू”कं”प” के झ”ट”के” म’ह’सू’स’ किए गए। 95 फीसदी भू”कं”प” के झट”के’ उत्तराखंड की महज चार जगहों पर केंद्रित रहे। ये जिले हैं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़। वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र के भूगर्भ में बड़ी भू”कं”पी”य” ऊर्जा जमा हो रही है। ये ऊर्जा केवल 4 जगहों से ही बाहर निकल रही है, इसीलिए इन जगहों पर लगातार भू”कं”प के झ”ट”के आ रहे हैं। चिं”ता की बात ये है कि अभी ये ऊर्जा कम स्तर पर ही बाहर आ पाई है। उत्तरकाशी में भू”कं”प”’ का केंद्र कोटला गांव है। रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ में भी एक ही जगह पर भू”कं”प आ रहे हैं।

परीक्षा ने दिखाया है कि यह पूरा क्षेत्र 18 मिलीमीटर की गति से सिकुड़ रहा है। पृथ्वी के अंदर होने वाला यह विकास ऊर्जा के भंडार में परिवर्तित हो रहा है, जो एक महत्वपूर्ण भू”कंप के रूप में कभी भी बाहर निकल सकता है। ऐसा होने की स्थिति में, इस पूरे क्षेत्र में 7 से 8 रिक्टर पैमाने पर भू”कं”प आएगा, जिससे भारी तबाही होगी। कुमाऊँ क्षेत्र में अंतिम गं’भी”र भू”कं”प 1334 और 1505 के वर्षों में हुआ था। उस समय से, कोई भी गं”भीर भू”क”म्प का झ”ट”का नहीं आया है। उत्तराखंड की गं”द”’गी’ के अंदर लगातार दबाव की स्थिति बनी हुई है, जो एक अविश्वसनीय जो”खिम को उजागर कर रही है। जब भी यहां आ सकता है, यहां भू”कंप का झ”टका आ सकता है।

देर से, सिंगापुर में आयोजित एशिया ओशनिक जियोसाइंस सोसाइटी 2019 ने इस मामले को लेकर आंदोलन किया, दुनिया भर के शोधकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी ने सार्वजनिक प्राधिकरण को इस तरह से अपनी रिपोर्ट पेश की है। शोधकर्ताओं ने चट्टानी क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों को नुस्खे की क्षमता के रूप में प्रस्तावित किया है, ताकि व्यक्ति सुरक्षित रहें। जब भू”कंप के झ”टके आए तो वे समर्थन पा सकते थे।

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