वो ऐतिहासिक जेल गढ़वाल में मौजूद है आज भी, जहां दिखती हैं 3 चराटें और 19 ओखलियां

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उत्तराखंड राज्य के इतिहास को खंगाल के देखने पर कई ऐसी अनोखी चीजें और स्थान मिलेंगे जो कई वर्षों से अस्तित्व में हैं मगर हमारी नजरों से ओझल हैं। धीरे-धीरे समय के साथ ये जगहें सबके सामने आ रही हैं और उत्तराखंड के लोग इनसे रूबरू हो रहे हैं। राज्य के अंदर मौजूद कई सौ वर्षों से अस्तित्व में रहीं ये जगहें अपने अंदर एक पूरी गाथा समेटे हुई हैं। समय के साथ सब कुछ धीरे-धीरे बदलता गया मगर उत्तराखंड में अब भी कई ऐसी जगहें मौजूद हैं जिनके अंदर कोई बदलाव नहीं आया है। वे अब भी वैसी की वैसी ही हैं जैसी सालों पहले हुआ करती थीं। आज हम आपको उत्तराखंड की एक ऐसी ही ऐतिहासिक जगह से रूबरू कराने वाले हैं जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते होंगे। यह जगह कई वर्षों से अस्तित्व में है और इस जगह से एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहलू जुड़ा हुआ है। इसके लिए चलिए हम आपको इतिहास की सैर कराते हुए कई वर्षों पूर्व ले जाते हैं। भारत की गुलामी का वह काला और अविस्मरणीय समय….. वह समय जो देश के लिए बहुत मुश्किल था। अंग्रेजी हुकूमत ने भारत के ऊपर अपना वर्चस्व कायम कर लिया था। अंग्रेजों ने भारतीयों पर बहुत अधिक जुल्म किए। जब भारत उनके अधीन था तब वे अपनी मनमर्जी करके लोगों के ऊपर जुल्म करते थे और उनको टॉर्चर करने के अलग- अलग तरीके अपनाते थे। वे बर्बरता से पकड़ कर भारतीयों को जेल में डाल कर उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार करते थे, तानाशाही अपने चरम पर थी।

अंग्रेजों द्वारा निर्मित किए गए जेल की बात करें तो जेल के अंदर भी कैदियों को टॉर्चर करने का और उनके ऊपर जुल्म करने का बहुत ही क्रूर तरीका होता था। उत्तराखंड में भी ऐसे जेल, ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं जो कि आजादी के समय में इस्तेमाल में लाए जाती थीं और उनका प्रयोग भारतीयों को टॉर्चर करने के लिए किया जाता था। एक ऐसा ही कैदखाना उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के अंदर में स्थित है। आज हम आपको उसी कैदखाने के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल के डूंगरा गांव में अंग्रेजी हुकूमत और इतिहास की एक धरोहर अभी भी अस्तित्व में है और इतिहास को दर्शा रही है। पौड़ी गढ़वाल में देखने में हवेली जैसे लगने वाला एक आलीशान भवन अब भी अस्तित्व में है। अंग्रेजों के शासन के समय यह अंग्रेजों का जेल हुआ करता था। यह क्षेत्र तत्कालीन समय में देवलगढ़ में आता था और उस समय इसके अंदर 11 कमरों की जेल हुआ करती थी।

वर्तमान में एक मनोर जेल के रूप में प्रकट हुआ है, फिर भी इसके अंदर सावधानी से झलकने के बाद भी, कई चीजों की खोज की जाएगी जो दर्शाती है कि अंग्रेजों के दौरान भारतीयों को पीड़ा देने के लिए इस जेल का उपयोग किया गया था। इस जेल के अंदर लगभग 11 कमरे थे, हालांकि समय के कारण, अलग-अलग हिस्से अवशेष के रूप में दिखाई दिए। वर्तमान में इसके अंदर सिर्फ तीन कमरे बचे हैं। क्या आप महसूस करते हैं कि अंग्रेजों को इतना ठंडा कर दिया गया था कि उन्होंने बंदियों को अपने पैरों पर नहीं रहने दिया। यह हम नहीं कह रहे हैं कि यह पूरा जेल बना हुआ है। इसका आकलन इस जेल में जेंडर लेने से किया जा सकता है। इस जेल में व्यक्ति के अंदर बने रहने के लिए इतना कुछ नहीं है, जो यह दर्शाता है कि उन्हें अपने घुटनों पर सजा के माध्यम से जाना चाहिए। इसी तरह एक प्रमुख पत्थर बाहरी इस शानदार संरचना है। जिस पर अभी तक 19 मनुष्य और 3 क्षेत्र हैं। अंग्रेज बंदियों से उन पर अनाज गिराते थे। अंतहीन स्पॉट राज्य में मौजूद हैं जो इतिहास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह महत्वपूर्ण है कि इस तरह की रिकॉर्ड की गई विरासत को बचाया जाना चाहिए ताकि आने वाली उम्र भी इन पूर्व-स्वतंत्रता योजनाओं के बारे में जान सकें।

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