उत्तराखंड के खुब’सू’रत हनी’मू’न प्ले’स: अ’गर सो’च र’हे है हनी’मून पर जा’ने की तो जा’निए इन स्था’नों के बा’रे में।

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उत्तराखंड की शां’ति’पूर्ण पहा’ड़ व शह’र बे’स्ट हनी’मून स्पॉ’ट है, जो आप’को शा’दी के बाद की थकान से छुटकारा पाने और अपने साथी के साथ गुणवत्ता’पूर्ण स’मय बिता’ने के लिए बे’स्ट प्ले’स है। गढ़’वाल हिमालय में बसा उत्तराखंड, हर नववि’वा’हित जोड़े के लिए एक सु’खदा’यक है।


उत्तराखंड में पहाड़ी इलाकों में स्थित विस्मयकारी हनीमून स्थल हैं, जो पृष्ठभूमि में महान हिमालय के साथ अलंकृत हैं। घने अल्पाइनों के साथ बिंदीदार, सर्दियों के दौरान बर्फ में लिपटे, और गर्मियों में फूलों के साथ अच्छी तरह से सजाए गए, उत्तराखंड के ये हनीमून गंतव्य लवबर्ड्स को सही मौसम और सुंदर मौसम के साथ अच्छा समय बिताने का मौका देते है।
सुखद मौसम की स्थिति और रोमांटिक स्थानों का आनंद ले रहे पहाड़ी और आकर्षक हिल स्टेशन प्रकृति के अनूठे दृश्य के साथ उत्तराखंड को हनीमून के लिए एक इलाज बनाते हैं। आकाश से गले लगाने वाले पहाड़, कभी खत्म नहीं होने वाली हरी घाटियाँ, चित्र-परिपूर्ण झीलें, और तेज़ी से बढ़ती नदियाँ हनीमून के लिए उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों के प्रमुख आकर्षण हैं! इन लुभावना स्थलों में हनीमून की योजना बनाने के लिए तैयार हो जाइए।


उत्तराखंड में सबसे लोकप्रिय हनीमून स्थलों की स्थलाकृति बहुत अलग नहीं है। उनमें से अधिकांश बर्फबारी के साथ एक सुंदर सर्दियों के मौसम का अनुभव करते हैं, और रंगीन घाटियों और हरे-भरे घास के मैदानों के साथ सुखद गर्मियों का आनंद लेते हैं।
उत्तराखंड में गर्मियों में मौसम: ग्रीष्मकाल ज्यादातर सुखद होता है; तापमान 18 – 25 डिग्री के बीच रहता है उत्तराखंड में सर्दियों में मौसम: तापमान शून्य डिग्री तक गिर जाता है और सर्दियों में 15 डिग्री तक चला जाता है।

 

लैंसडाउन


उत्तराखंड की वादियों में बसा लैंसडाउन एक ऐसा ही हिल स्टेशन है, जहां जाने के लिए आपको लंबी छुट्टियों की ज़रूरत नहीं है। लैंसडाउन खूबसूरत और शांत होने के साथ सुरक्षित भी है, क्योंकि यहां सैनिक छावनी है। 1706 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लैंसडाउन भारत के सबसे शांत पहाड़ी गंतव्यों में से एक है। चीड़-देवदार के जंगलों के घिरा यह स्थल बहुत हद तक सैलानियों को आकर्षित करने का काम करता है। लैंसडाउन का मौसम गर्मियों के दौरान भी काफी सुहावना बनारहता है।आप यहाँ अपने पार्टनर के साथ हनीमून का प्लान बना बना सकते है।

कैसे पहुुचे रत की राजधानी दिल्ली से लैंसडाउन करीब 270 कि॰मी॰ की दूरी पर है। यहाँ विभिन्न मार्गों से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से लैंसडाउन आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह कई शहरों से जुड़ा हुआ है। निजी और सरकारी बसें कोटद्वार तक जाती हैं, जहाँ से लैंसडाउन करीब 40 कि॰मी॰ की दूरी पर है।

औली


भारत के उत्तराखंड में स्थित, औली है जो करीब 5-7 किमी छोटा सा स्की- रिर्सोट है। यह स्थान हरे-भरे देवदार के पेड़ो से घिरा हुआ है। यह स्थान विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीवों के लिए घर होने के अलावा, यह कई तरह के साहसिक गतिविधियों जैसे स्कीइंग, ट्रेकिंग और कैम्पिंग के लिए जाना जाता है। औली के उत्तर में, बद्रीनाथ मंदिर है जो हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां पर आपको एक और अन्य आकर्षण वैली ऑफ फ्लॉवर्स नेशनल पार्क है जो अल्पाइन वनस्पतियों और वन्यजीव जैसे हिम तेंदुओं और लाल लोमड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता चलते औली पर्यटकों के लिए मनपसंद गंतव्य में से एक है। वह नवविवाहित जोड़ो के लिए हनीमून का बेस्ट प्लेस है।
औली घूमने का सही समय
बर्फ से ढके पहाड़ों का आनंद लेने के लिए एक दिसंबर से फरवरी के बीच अपनी यात्रा का कार्यक्रम तय कर सकते है। इसके अलावा, यदि आप गर्मी से राहत की तलाश में है तो आप मई और जून के महीनों के बीच यात्रा का चयन कर सकते है। यहां की शरद ऋतु भी बहुत सुंदर और सुखद होती है तो, जुलाई से सितंबर के महीनों के बीच औली ट्रिप के लिए अपने टिकट बुक कर सकते है।
दिल्ली से उत्तर पूर्व में 492 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा औली पहुँचने के लिए 15 घंटो का समय लगता है।

देहरादून


उत्तराखंड राज्य में दून घाटी के बीच स्थित देहरादून भारत के दर्शनीय स्थलों में से एक हैं।उतराखण्ड राज्य की राजधानी देहरादून पर्यटकों के मध्य बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है, जोकि अकेले यात्री, परिवारों जनों और जोड़ों से जाने वाले व्यक्तियों के लिए एक अनूठा स्थान हैं। उतराखण्ड राज्य में गढ़वाल हिमालय की एक सुंदर पृष्ठभूमि पर स्थित देहरादून समुद्र तल से 1400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।भारत के दर्शनीय स्थल देहरादून के नजदीक ही एक अन्य पर्यटक स्थल मसूरी भी हैं जो पर्यटकों को बहुत अधिक आकर्षित करता हैं. देहरादून से मसूरी की दूरी लगभग 33 किलोमीटर हैं। हर साल नव विवाहित जोड़े यहाँ आते है। आप भी यह जाने का प्लान बना सकते है।
रेलः देहरादून उत्तरी रेलवे का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह भारत के लगभग सभी बड़े शहरों से सीधी ट्रेनों से जुड़ा हुआ है। ऐसी कुछ प्रमुख ट्रेनें हैं- हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस, चेन्नई- देहरादून एक्सप्रेस, दिल्ली- देहरादून एक्सप्रेस, आदि। वायु मार्गः जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून से २५ से किलोमीटर है। यह दिल्ली एयरपोर्ट से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं। एयर डेक्कन दोनों एयरपोर्टों के बीच प्रतिदिन वायु सेवा संचालित करती है।

कसौली


चंडीगढ़ से शिमला जाने वाली सड़क की आधी दूरी पर स्थित है, खूबसूरत हिल स्टेशन−कसौली। कालका से करीब 20 किमी ऊपर पहाड़ी की ओर सड़क पर मोड़ है और यहीं इस मोड़ के दूसरी ओर से आता पहाड़ की पहली हवा का झोंका यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। प्रकृति की अनुपम छटा को देखकर पर्यटक अभिभूत हो जाता है। यह मधुर हवा का झोंका कहीं ओर से नहीं बल्कि पर्वतीय स्थल कसौली की तरफ से आ रहा होता है। इस खुबसूरत हिल स्टेशन की सैर आप अपने पार्टनर के साथ कर सकते है।

कैसे पहुँचे निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर विमानक्षेत्र है।
रेल मार्ग नजदीकी रेल जंक्शन काठगोदाम है। जहां से बस या टैक्सी द्वारा कौसानी पहुंचा जा सकता है। सड़क मार्ग
दिल्ली के आईएसबीटी आनन्द विहार बस अड्डे से कौसानी के लिए नियमित रूप से बसें चलती हैं। प्रदेश के अन्य जिले से भी बस द्वारा कौसानी जाया जा सकता है।

रानीखेत


रानीखेत उत्तरा खंड का एक छोटा सा हिल स्टेशन है। जोकि समुद्र तल से 1824 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।। यहां का शांत वातावरण, फूलों से ढके रास्ते, देवदार औऱ पाईन के लम्बे लम्बे पेड़ बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। यहां पर बर्फ से ढकी मध्य हिमालयी पहाड़ियां भी दिखाई देती हैं।
किराया: दिल्ली से काठगोदाम का रेल किराया प्रति व्यक्ति लगभग 300 रुपए (दोनों तरफ का)। यहां से रानीखेत की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। बस से यहां तक का किराया प्रति व्यक्ति आना-जाना लगभग 100 रुपए। दिल्ली से रानीखेत तक का किराया पति-पत्नी और 8 साल तक के दो बच्चों के साथ लगभग 1000 रुपए आएगा।

ऋषिकेश


ऋषिकेश गढ़वाल हिमालय पर्वत की तलहटी में समुन्द्रतल से 409 मीटर की ऊँचाई पर स्थित और शिवालिक रेंज से घिरा हुआ है | हिमालय की पहाड़िया और प्राकर्तिक सौन्दर्यता से ही इस धार्मिक स्थान से बहती गंगा नदी ऋषिकेश को अतुल्य बनाती है | ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है | हर साल ऋषिकेश के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शांति के लिए आते है।
ऋषिकेश राफ्टिंग की वजह से भी काफी प्रसिद्ध है यहाँ आप अपने दोस्तों के साथ महज 5 हजार के अंदर घूमने के साथ राफटिंग का भी मजा ले सकते हैं।

नैनीताल


प्राकृतिक सुंदरता एवं संसाधनों से भरपूर जनपद नैनीताल हिमालय पर्वत श्रंखला में एक चमकदार गहने की तरह है । कई सारी खूबसूरत झीलों से सुसज्जित यह जिला भारत में ‘झीलों के जिले’ के रूप में मशहूर है चारों ओर से पहाडियों से घिरी हुई ‘नैनी झील’ इन झीलों में सबसे प्रमुख झील है। नैनीताल अपने खूबसूरत परिदृश्यों और शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। इस खुबसूरत झीलों के जिले में आप हनीमून का प्लान बना सकते है।
किराया: दिल्ली से काठगोदाम का रेल किराया प्रति व्यक्ति लगभग 300 रुपए (दोनों तरफ का) आएगा। नैनीताल यहां से सिर्फ 35 किलोमीटर की दूरी पर है। बस से यहां तक का किराया प्रति व्यक्ति आना-जाना लगभग लगभग 50 रुपए। दिल्ली से रानीखेत तक का किराया पति-पत्नी और 8 साल तक के दो बच्चों के साथ लगभग 800 रुपए आएगा।

धनोल्टी


देवदार, रोडोडेंड्रोन और ओंक के वनों से आच्छादित यह नगर चंबा मसूरी मार्ग पर स्थित है | धनोल्टी में लम्बे जंगली ढलान शांत माहौल सुन्दर मौसम, सर्दियों में बर्फ से ढकी पहड़िया. इसे छुट्टियाँ बिताने व अपने पार्टनर के साथ खूबसूरत पल बिताने के लिए एक आदर्श पर्यटन स्थल बनती हैं| चंबा मसूरी मार्ग पर यह नगर चंबा से 29 कि0मी0 एवं मसूरी से 24 कि०मी० की दूरी पर स्थित है | रहने के लिए यहाँ पर्यटक विश्राम गृह, वन विभाग के विश्राम गृह, अतिथि गृह एवं होटल उपलब्ध हैं|
किराया: दिल्ली-देहरादून रेल किराया प्रति व्यक्ति लगभग 350 रुपए (दोनों तरफ का) और बस किराया भी प्रति व्यक्ति आना-जाना लगभग 150 रुपए मान लें। होटल व खाना-पीना: गढ़वाल मंडल विकास निगम के होटल का किराया 1500 व 1900 रुपए प्रति रात है। खाने-पीने के लिए पूरे परिवार के लिए 500 से एक हजार रुपए मान कर चलें।

मसूरी


मसूरी उत्तराखंड की प्रकृति की गोद में बसा हुआ एक छोटा सा शहर है जिसे ‘पहाड़ों की रानी’ भी कहा जाता है। मसूरी सौंदर्य, शिक्षा, पर्यटन व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। पहाड़ों के बीच बसा मसूरी देहरादून का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। हिमालय और दून घाटी के बीच बसा मसूरी का नज़ारा बर्फ़ से ढके होने के कारण बहुत ही मनमोहक लगता है। मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार भी है। देहरादून में पायी जाने वाली वनस्पति और जीव-जंतु इसके आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं। दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए यह लोकप्रिय ग्रीष्मकालीन पर्यटन स्थल है। वह नव विवाहित जोड़ो के लोए बेस्ट हनीमून प्लेस है।
कैसे पहुंचे
दिल्ली से देहरादून के लिए मसूरी एक्सप्रेस के साथ-साथ देहरादून जनशताब्दी और देहरादून एक्सप्रेस भी हर रोज चलती है। दिल्ली से देहरादून तक की 329 किलोमीटर की यात्रा का किराया स्लीपर क्लास में लगभग 160 रुपए है। जनशताब्दी से 2 सिटिंग में 117 रुपए में यात्रा की जा सकती है, जबकि देहरादून एक्सप्रेस से 158 रुपए में स्लीपर क्लास की यात्रा कर यहां पहुंच सकते हैं। नियमित बसों से मात्र 250 रुपये में पहुँच सकते है।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क


जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में हिमालय पर्वत की तलहटी और रामगंगा नदी के किनारे स्थित है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत में सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है जिसको 1936 में बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सबसे खास बात यह है कि इसमें रॉयल बंगाल टाइगर की गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां पाई जाती है। जिम कॉर्बेट नेशनल में पेड़ों की लगभग 50 प्रजातियों पाई जाती है जो 500 से अधिक वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैली हुई हैं। और जानवरों की 50 प्रजातियों के अलावा के साथ 580 पक्षियों की प्रजातियां और 25 सरीसृप की प्रजातियां पाई जाती है।

अल्मोड़ा


उत्तराखंड से रानीखेत से लगभग 34 किमी दूर द्वाराहाट नाम का एक ऐतिहासिक गांव मौजूद हैं जो कभी कत्यूरी साम्राज्य का हिस्सा था। इस खास स्थल को स्वर्ग का मार्ग भी बताया जाता है। द्वाराहाट अपने खूबसूरत प्राचीन मंदिरों के लिए जाना जाता है जिनपर आप गुर्जारी स्कूल ऑफ आर्ट का प्रभाव है देख सकते हैं। ऐतिहासिक स्थलों के प्रेमी इस स्थल की यात्रा कर सकते हैं। यहां उन्हें 55 ऐतिहासिक मंदिरों को देखने का मौका मिलेगा। आप इन मंदिरों की खास वास्तु और शिल्पकला को देख सकते हैं, जिसका श्रेय कत्यूरी राजवंश को जाता है। ये वो राजवंश था जिसने काफी लंबे समय तक कुमाऊं पर राज किया।
कैसे पहुचे निजी वाहन अल्मोड़ा में स्थानीय परिवहन के प्रमुख साधन हैं। नगर में स्थानीय लोग आमतौर पर पैदल ही यात्रा करते हैं। पंतनगर विमानक्षेत्र निकटतम हवाई अड्डा है, जबकि काठगोदाम अल्मोड़ा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। अल्मोड़ा से नैनीताल ६७ कि॰मी॰, काठगोदाम ९० कि॰मी॰, पिथौरागढ़ १०९ कि॰मी॰ और दिल्ली ३७८ कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित है। इन स्थानों के लिए नियमित बस-सेवायें उपलब्ध है। हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं।

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