अपने खेतों और मकान को रख दिया था गिरवी पढ़ाई पूरी करने के लिए और बन गया आईएएस अफसर कड़ी मेहनत और लगन से

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हमारे जीवन में हर समय कोई न कोई कठिनाई है तो चलती है लेकिन उसको कैसे निपटना है या हर व्यक्ति का व्यक्तित्व बताता है। आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाने वाले हे जिसमे अपने मंजिल तक पहुंचने के लिए एक वयक्ति ने अपनी घर तथा जमीन तक गिरवी रख दिया और मेहनत , लगन से अपनी मंजिल तक पहुंच क्र अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया और पूरे गांव के लोगों को गलत साबित किया।  जीवन में अत्यधिक संघर्षों के बाद भी कुछ लोग वह मुकाम प्राप्त कर लेते हैं, जिनके बारे में हम सिर्फ़ सोच ही सकते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं महाराष्ट्र के माधव गिट्टे (IAS Madhav Gitte), जिन्होंने वर्ष 2020 बैच में UPSC की परीक्षा पास की और IAS ऑफिसर बने। थोड़े-थोड़े पैसों के लिए परेशान होते हुए एक किसान माधव से IAS माधव बनने की उनकी जीवनयात्रा की कहानी जिसने भी सुनी, हैरान रह गया। इस मुकाम तक पहुँचने के लिए माधव ने बहुत कष्ट झेले। चलिए जानते हैं इनके संघर्षों से सफलता तक का सफ़र कैसा था…

IAS Madhav Gitte Success Story

माधव (IAS Madhav Gitte) महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के रहने वाले हैं। इनकी ज़िन्दगी में बहुत ज़्यादा परेशानियाँ आयीं, पर इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन की हर समस्या का डटकर मुकाबला किया और अपना भाग्य ख़ुद लिखा। माधव, जिनके पास 1 साल की फीस भरने के भी पैसे नहीं होते थे, उन्होंने कैसे अपनी पढ़ाई पूरी की होगी और किस हद तक मुश्किलें झेली होंगी, इसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। कभी तो इन्होंने सिर्फ़ पचास-साठ रुपए के लिए खेतों में मजदूरी का काम किया और कभी अपने खेत और मकान सब पढ़ने के लिए गिरवी रख दिए। इस प्रकार से अत्यंत संघर्षों का सामना करते हुए माधव जीवन में आगे बढ़ते गए।

छोटी उम्र से ही खेतों में काम किया

माधव (IAS Madhav Gitte) के पिताजी और माता दोनों ही अशिक्षित थे। उनके परिवार में उनके माता-पिता और 5 भाई बहन भी थे। इनके माता-पिता की अपनी थोड़ी ज़मीन थी जिसमें वह खेती का कार्य किया करते थे, परंतु घर में सदस्य ज़्यादा थे तो अपनी ज़मीन पर खेती करने से उनका घर ख़र्च नहीं निकल पाता था। फिर माधव तथा उनके अन्य भाई बहनों ने भी खेत में अपने माँ पिताजी की सहायता करना शुरू कर दिया था और कभी-कभी तो है दूसरों के खेतों में मजदूरी का काम भी किया करते थे, जिससे उन्हें 1 दिन में चालीस से साठ रुपए तक की आय प्राप्त होती थी।

बीमारी के कारण माँ का देहांत हो गया

माधव और उनका परिवार जैसे तैसे आर्थिक परेशानियों का सामना करते हुए गुज़ारा कर रहा था, फिर ऐसे में उनकी माता बीमारी हो गई, जिसका ऑपरेशन भी करवाया परंतु फिर भी यह बीमारी ठीक नहीं हुई और जिस समय माधव 11वीं कक्षा में पढ़ाई किया करते थे, तब उनकी माता का स्वर्गवास हो गया। एक माँ के जाने से उनके बच्चों की क्या हालत होती है, यह तो हम समझ ही सकते हैं।

इनका परिवार पहले से ही पैसों के अभाव में बहुत परेशानियों से जूझ रहा था, वहीं माँ के गुजर जाने से सारा परिवार अस्त-व्यस्त हो गया। अब तो माधव की जिम्मेदारी परिवार के लिए और बढ़ गई थी। अब वे ज्यादातर समय खेतों में ही काम करते हुए बिताते थे। उन्होंने बारहवीं कक्षा का फॉर्म भी तब भरा, जब एक सरकारी विद्यालय में काफ़ी कम फीस में उनका दाखिला हो गया था।

रोजाना 22 किमी साइकिल चलाकर जाते थे स्कूल

माधव का विद्यालय घर से बहुत दूर था, उन्हें विद्यालय पहुँचने के लिए प्रतिदिन 22 किमी। साइकिल चलाकर जाना होता था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि मैं इतना थक जाता था कि घर आकर खाना खाकर सो जाता था। इसलिये 12वीं कक्षा में उनके सिर्फ़ 56 % नम्बर ही आए थे। अपने आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए वे ग्रेजुएशन करने का तो विचार भी नहीं कर सकते थे, क्योंकि 3 वर्षों तक उन्हें बिना जॉब के पढ़ना पड़ता, जो वे नहीं कर सकते थे। माधव इस तरह से पढ़ना चाहते थे कि जिससे उन्हें शीघ्र जॉब भी मिल जाए।

तभी वहाँ के एक कॉलेज में बहुत कम फीस में एक डिप्लोमा कोर्स शुरू हुआ था। माधव ने जैसे तैसे गाँव वालों से कहकर अपनी फीस जुटाई और यह डिप्लोमा कोर्स अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण कर लिया। इसमें उन्होंने टॉप किया, जिससे उनमें आत्मविश्वास आया और आगे पढ़ाई करने का भी मन हुआ, लेकिन पैसों की परेशानी की वज़ह से आगे बढ़ने के बारे में कुछ सोच नहीं पा रहे थे।

खेत और मकान गिरवी रखकर फीस भरी

माधव (IAS Madhav Gitte) ने जब यह डिप्लोमा प्राप्त किया उसके बाद में कुछ ऐसे हालात हुए कि उन्हें पुणे के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला प्राप्त हो गया था। दाखिला तो हो गया पर वे फीस कहाँ से लाते? फिर उन्होंने इंजीनियरिंग के फर्स्ट ईयर की फीस भरने के लिए अपने खेत गिरवी रख दिए तथा गाँव वालों से पैसे उधार लिए, इस प्रकार से उनके फर्स्ट ईयर की पढ़ाई पूरी हो गई। अब उनको अगले सालों की पढ़ाई के लिए भी फीस का इंतज़ाम करना था।

इसके बाद उन्होंने फीस भरने के लिए बाक़ी बचे हुए खेत और यहाँ तक कि घर भी गिरवी रख दिया और बीच-बीच में कई लोगों से ब्याज पर पैसे भी लिए। इस प्रकार से यहाँ वहाँ से पैसे लेकर और घर खेत सब कुछ गिरवी रख कर माधव ने बड़ी मुश्किल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। फिर उनको किसी अच्छी कंपनी में जॉब मिल गई। एक बार जब उन्हें पैसों की बहुत तंगी आई तो उन्होंने एजुकेशन लोन लेना चाहा था, परंतु उन्हें नहीं मिल पाया। यह बात उनके दिल पर लग गई थी कि जो गरीब बच्चे वाकई पढ़ना चाहते हैं, सरकार उनके लिए भी एजुकेशन लोन का इंतज़ाम नहीं करती है।

जॉब लगने पर बदले हालात

जब माधव की नौकरी लगी तो उन्होंने जिस से भी पैसे लिए थे उसे चुकाना शुरू कर दिया और गिरवी रखा घर, खेत वगैरह भी धीरे-धीरे करके छुड़वा लिए। ब्याज पर लिए पैसे भी चुका दिए। फिर 2 साल तक उन्होंने यही जॉब की। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने माधव को यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) के टॉपर स्टूडेंट का इंटरव्यू दिखाया तो वह बहुत प्रेरित हुए और इस करियर की तरफ़ आकर्षित हुए। पहले तो 2 माह तक उन्होंने UPSC Exam के बारे में सारी इनफार्मेशन प्राप्त की, फिर इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से निश्चय कर लिया था कि उन्हें यह परीक्षा देनी है।

माधव (IAS Madhav Gitte) ने पढ़ने के लिए जो परेशानियाँ झेली, वे नहीं चाहते थे कि ऐसी परेशानियाँ किसी और बच्चे को भी सहन करनी पड़े। जिसकी वज़ह से भी उन्होंने सिविल सर्विसेज में जाने का फ़ैसला किया। इस परीक्षा की तैयारी के लिए उन्हें जॉब छोड़ने की आवश्यकता पड़ी लेकिन अगर वे जॉब छोड़ दे तो उन्हें पैसों की बहुत दिक्कत हो जाती, क्योंकि फिर उनके पास पढ़ाई के लिए पैसे ही नहीं बचते। इन परिस्थितियों में माधव के दोस्तों ने उनकी बहुत मदद की, जिससे वे अपनी पढ़ाई कर पाएँ।

दिल्ली जाकर परीक्षा की तैयारी की

जब माधव के फ्रेंड्स ने उनकी मदद की तो वे UPSC एग्जाम की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए। पहले तो उन्होंने अपनी जॉब नहीं छोड़ी थी और जॉब के साथ ही पढ़ाई करने का प्रयास करते थे परंतु जॉब की वज़ह से होने पढ़ने के लिए टाइम ही नहीं मिल पाता था, इसलिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। पहले वर्ष 2017 में तो उनका प्री भी क्लियर नहीं हो पाया। फिर अगले वर्ष 2018 में उनका सिलेक्शन इंडियन ऑडिट और एकाउंट्स सर्विस के लिए हुआ, परंतु वह IAS ही बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक और बार प्रयास किया और इस बार वर्ष 2019 में आख़िर कार्य सफल हुए और 2020 के बैच के IAS ऑफिसर बने।

सभी को प्रेरित करती है उनके जीवन की दास्तां

माधव की कामयाबी और संघर्ष की दास्तान उन जैसे कई लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, जो पैसों की कमी की वज़ह से या दूसरी किसी समस्या की वज़ह से पढ़ना छोड़ देते हैं और अपने भाग्य को कोसते हुए बैठ जाते हैं। माधव यूपीएससी की तैयारी कर रहे अन्य प्रतिभागियों को भी यही सुझाव देते हैं कि अगर आपने सफल होने का निश्चय कर लिया है और पूरी लगन से उसके लिए मेहनत करते हैं तो कोई भी मुश्किल आपको कामयाब होने से रोक नहीं सकती है।

इसके साथ ही माधव गिट्टे (IAS Madhav Gitte) के जीवन की इस कहानी से सरकारी सिस्टम की तरफ़ भी ध्यान जाता है, जिसमें ज़रूरतमंद लोगों को एजुकेशन लोन लेने में बहुत कठिनाई आती है या फिर उन्हें यह लोन नहीं मिल पाता है, इस मुद्दे पर सरकार को विचार करने की आवश्यकता है।

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