इंग्लिश में थोड़ा कमजोर थे तो दीया इंटरव्यू हिंदी में और बन गए आईएएस ऑफिसर

समाचार समाज

हमारे भारत देश में अभी भी ऐसे कई लोग हैं जो इंग्लिश में थोड़ी कमजोर हैं और वह इसी कमजोरी के कारण अपने आपको और उसे कम समझने लगते हैं लेकिन इस समस्या को दरकिनार कर अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए आईएएस दिलीप कुमार ने एक मिसाल पेश की जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे उन्होंने अपने इंटरव्यू इंग्लिश में ना देते हुए हिंदी में दिया और अपनी बात पूर्ण रूप से स्पष्ट कर दी और अपनी योगिता अर्जित की।आज हमारे देश में IAS और IPS जैसे बड़े-बड़े कंपटीशन एग्जाम्स और उनके लिए साक्षात्कार भी इंग्लिश लैंग्वेज में ही लिए जाते हैं। जिसकी वज़ह से बहुत से होनहार प्रतियोगी पीछे रह जाते हैं।

हर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती है कि वह अपने बच्चों को अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा पाए, हिन्दी मीडियम में पढ़ने वाले बच्चे जब बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं तो अंग्रेज़ी बोलते छात्रों को देखकर उनका आत्मविश्वास गिर जाता है और वे हार मान लेते हैं। परंतु आज हम जिस व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हैं उन्होंने भले ही हिन्दी मीडियम स्कूल से पढ़ाई की हो लेकिन अपनी शख्सियत को ना खोकर इन्होंने अपनी मातृभाषा हिन्दी में ही इंटरव्यू दिया और कामयाब होकर IAS बने।

लक्ष्य के आगे खड़ी थी अंग्रेज़ी की दीवार

आज हम जिन शख़्स की बात कर रहे हैं उनका नाम है दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar). जिन्होंने पहले दो बार UPSC के एग्जाम में नाकामयाब होने के बाद फिर भी हार ना मानते हुए तीसरी बार कोशिश की और सफल हुए। IAS Officer बनना इन का सपना था जो यह सच करना चाहते थे, लेकिन इस परीक्षा की तैयारी के दौरान अंग्रेज़ी भाषा की वज़ह से इन्हें काफ़ी दिक्कतें आ रही थी, क्योंकि यह हिन्दी मीडियम स्कूल से पढ़े हुए थे, तो इनकी अंग्रेज़ी इतनी अच्छी नहीं थी।

IAS Dilip Kumar – हमारे भारत देश में कई भाषाएँ बोली जाती है। वैसे तो हमारी मातृभाषा हिन्दी है लेकिन वर्तमान समय में अंग्रेज़ी भाषा का चलन बहुत बढ़ गया है। बहुत से लोग तो किसी व्यक्ति को इसी बात से जज करते हैं कि वह कितनी अच्छी इंग्लिश बोलता है। इतना ही नहीं, आज हमारे देश में IAS और IPS जैसे बड़े-बड़े कंपटीशन एग्जाम्स और उनके लिए साक्षात्कार भी इंग्लिश लैंग्वेज में ही लिए जाते हैं। जिसकी वज़ह से बहुत से होनहार प्रतियोगी पीछे रह जाते हैं।

हर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती है कि वह अपने बच्चों को अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा पाए, हिन्दी मीडियम में पढ़ने वाले बच्चे जब बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं तो अंग्रेज़ी बोलते छात्रों को देखकर उनका आत्मविश्वास गिर जाता है और वे हार मान लेते हैं। परंतु आज हम जिस व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हैं उन्होंने भले ही हिन्दी मीडियम स्कूल से पढ़ाई की हो लेकिन अपनी शख्सियत को ना खोकर इन्होंने अपनी मातृभाषा हिन्दी में ही इंटरव्यू दिया और कामयाब होकर IAS बने।

लक्ष्य के आगे खड़ी थी अंग्रेज़ी की दीवार

आज हम जिन शख़्स की बात कर रहे हैं उनका नाम है दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar). जिन्होंने पहले दो बार UPSC के एग्जाम में नाकामयाब होने के बाद फिर भी हार ना मानते हुए तीसरी बार कोशिश की और सफल हुए। IAS Officer बनना इन का सपना था जो यह सच करना चाहते थे, लेकिन इस परीक्षा की तैयारी के दौरान अंग्रेज़ी भाषा की वज़ह से इन्हें काफ़ी दिक्कतें आ रही थी, क्योंकि यह हिन्दी मीडियम स्कूल से पढ़े हुए थे, तो इनकी अंग्रेज़ी इतनी अच्छी नहीं थी।

इंटरव्यू में अपनी बात को सही से रख पाना है ज़रूरी

दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) का कहना है कि जब जो पहली बार इंटरव्यू देने जा रहे थे तो थोड़ा कंफ्यूज थे कि उन्हें हिन्दी में इंटरव्यू देना चाहिए या इंग्लिश में, क्योंकि वह इंग्लिश बोलने में ज़्यादा अच्छे नहीं थे। तब सोचते थे कि अगर हिन्दी में इंटरव्यू देंगे तो उनके मार्क्स पर प्रभाव पड़ेगा, जैसा कि हर जगह देखा जाता है अंग्रेज़ी का बोलबाला है तो उनका ऐसा सोचना लाजमी था। फिर उन्होंने दो बार इंग्लिश लैंग्वेज में ही इंटरव्यू दिया लेकिन अच्छे परिणाम नहीं आए।

फिर उन्होंने तय किया कि अब वे हिन्दी में ही इंटरव्यू देंगे, क्योंकि इसी भाषा में सहजता से बात कर सकते हैं और अपनी बात अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। वे बताते हैं कि इंटरव्यू के समय ऐसा नहीं होता कि आपको शुद्ध हिन्दी में बोलने होती है आप बीच-बीच में इंग्लिश का भी उपयोग कर सकते हैं जैसा कि आपको कंफरटेबल लगे। अतः इस बार उन्होंने हिन्दी माध्यम चुनकर इंटरव्यू में अपना बेस्ट दिया और अपनी बात को ठीक प्रकार से रख पाए, नतीजन उन्होंने 73वीं रैंक हासिल की।

फिर उन्होंने तय किया कि अब वे हिन्दी में ही इंटरव्यू देंगे, क्योंकि इसी भाषा में सहजता से बात कर सकते हैं और अपनी बात अधिकारियों के सामने रख सकते हैं। वे बताते हैं कि इंटरव्यू के समय ऐसा नहीं होता कि आपको शुद्ध हिन्दी में बोलने होती है आप बीच-बीच में इंग्लिश का भी उपयोग कर सकते हैं जैसा कि आपको कंफरटेबल लगे। अतः इस बार उन्होंने हिन्दी माध्यम चुनकर इंटरव्यू में अपना बेस्ट दिया और अपनी बात को ठीक प्रकार से रख पाए, नतीजन उन्होंने 73वीं रैंक हासिल की।

इसके बावजूद उन्होंने मेहनत करके दो बार कोशिश की पर जब वे सफल नहीं हुए तो फिर उन्होंने मातृभाषा हिन्दी को ही चुना और हिन्दी में इंटरव्यू देकर IAS Officer बन गए। आपको बता दें कि पूर्व में दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) ने दो बार UPSC Mains Exam में इंग्लिश में इंटरव्यू दिया लेकिन उनका सिलेक्शन नहीं हुआ।

मंजिल वही थी पर रास्ता नया चुना

दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) कहते हैं कि जब वे छोटे थे तभी से उनकी इच्छा थी कि वह एक IAS Officer बनें। यही वज़ह थी कि 2 बार असफल होने के बाद भी उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और फिर से तीसरी बार हिन्दी माध्यम से इंटरव्यू दिया और वर्ष 2018 में दिलीप कुमार 73वीं रैंक के साथ IAS बने।

उन्होंने बताया कि जब पहले दो बार उन्होंने इंग्लिश में इंटरव्यू दिया तो वह इंग्लिश में कमजोर होने की वज़ह से कुछ नर्वस हो जाते थे और इस वज़ह से उन्हें इंटरव्यू में अच्छे मार्क्स नहीं मिले। फिर उन्होंने सोचा कि क्यों ना एक बार अपनी भाषा हिन्दी में इंटरव्यू दिया जाए। फिर उन्होंने हिन्दी भाषा को चुनकर इसमें इंटरव्यू दिया। इसलिए उन्होंने हिन्दी में Interview देने का फ़ैसला किया। दिलीप कुमार बताते हैं कि वर्ष 2016 और 2017 में जब उन्होंने इंग्लिश में इंटरव्यू दिया था उस समय उन्हें 143 अंक प्राप्त हुए थे, फिर जब उन्होंने हिन्दी में इंटरव्यू दिया तो 179 नंबर प्राप्त कर लिए।

कहा-पर्सनैलिटी डेवलपमेंट करना है ज़रूरी

IAS दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) का कहना है कि इंटरव्यू में अच्छी परफॉर्मेंस के लिए सिर्फ़ नॉलेज की ही ज़रूरत नहीं पड़ती बल्कि उससे भी अधिक आपको पर्सनालिटी अच्छी करने की ज़रूरत होती है, खराब पर्सनैलिटी की वज़ह से आपका इंप्रेशन बिगड़ सकता है। साथ ही आपको देश और दुनिया की खबरों की जानकारी रखना और करंट अफेयर्स पढ़कर ताज़ा मुद्दों के बारे में भी नॉलेज रखनी होगी, क्योंकि ऐसे सवाल भी इंटरव्यू में पूछे जाते हैं।

वह बताते हैं कि इंटरव्यू से पहले आपसे एक फॉर्म भरवाया जाता है उस फॉर्म में हॉबी के बारे में भी पूछा जाता है। हॉबी की जानकारी ठीक प्रकार से भरिए, क्योंकि इंटरव्यू में आपसे हॉबीज से जुड़े प्रश्न भी किये जाते हैं, अतः ग़लत इंफॉर्मेशन हॉबीज में बिल्कुल ना भरिए। दिलीप कुमार (IAS Dilip Kumar) कि इस सक्सेस स्टोरी से IAS की तैयारी कर रहे सभी युवाओं को सीख मिलती है कि अगर आप इंग्लिश में कंफरटेबल नहीं है तो उसके पीछे मत भागिए बल्कि अपनी मातृभाषा हिन्दी को चुनिए और अपना बेस्ट दीजिए।

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