इमानदार आईपीएस अफसर का तबादला रोकने के लिए लाखों की संख्या में लोग रोते हुए आय सड़क पर

समाचार समाज

हर एक आईपीएस अफसर यही चाहता है कि वह सकुशल रूप से अपना कार्यकाल पूरा कर सके और अपने पूरे कार्यकाल में संपूर्ण रूप से लोगों का भला कर सके और उनकी सभी समस्याओं का निवारण कर सके लेकिन एक ऐसी घटना सामने आई है जहां पर जब एक ईमानदार अफसर का तबादला हुआ तो लोगों से नम आंखों से सड़क पर आ गए और तबादले को रोकने के लिए भारतक प्रयास करने लगा

कर्नाटक में ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर IPS Officer के. अन्नामलाई (K. Annamalai) 2011 बैच के अधिकारी हैं। उनके काम करने का तरीका अन्य अधिकारियों से बिल्कुल अलग है। इसी कारण वह ना सिर्फ अपने स्टाफ बल्कि आम जनता के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं।K. Annamalai मूलतः तमिलनाडु के करूर जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 4 जून, 1984 को एक किसान परिवार में हुआ था। उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि अन्नामलाई पढ़ाई पर ध्यान दें और इसके लिए उन्होंने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं होने दी। करूर और नामक्कल में स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। उसके बाद वह इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, लखनऊ पहुंचे और वहां से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री प्राप्त की।

2011 बैच के कर्नाटक कैडर के अफसर हैं K. Annamalai

अपनी शिक्षा पूर्ण कर लेने के बाद अन्नामलाई कॉरपोरेट नौकरियों के पीछे नहीं भागे। उनका लक्ष्य सिविल सेवा था, अतः अथक परिश्रम से 2011 में यूपीएससी परीक्षा पास की और 2011 बैच के कर्नाटक कैडर के अधिकारी बने।

उनकी पहली पोस्टिंग 2013 में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में कर्नाटक के उडुपी जिले के करकला में हुई थी। नौकरी के पहले दिन से ही अन्नामलाई ने एक अलग छाप छोड़ी थी। उनका काम करने का तरीका इतना अलग था कि पहली पोस्टिंग में ही उन्हें अपने सीनियर्स की तारीफ मिली। उनकी छवि एक बहादुर और ईमानदार अधिकारी के रूप में सामने आई।

तबादला होने पर रोते हुए लोग कर रहे थे रोकने का प्रयास

उनकी बहादुरी और ईमानदारी का ईनाम उन्हें जनवरी, 2015 में मिला, जब उन्हें पुलिस अधीक्षक के रूप में प्रमोशन प्राप्त हुआ। हालांकि उनकी पोस्टिंग उडुपी जिले में ही रही। अगस्त, 2016 तक वह एसपी के रूप में कार्य करते रहे। उसके बाद उनकी तैनाती कर्नाटक के चिक्कमगलुरू में हुई, यहां उन्होंने अक्टूबर 2018 तक नौकरी की। इन दोनों जगह अन्नामलाई को बहुत लोकप्रियता हासिल हुई। यहां के लोग उन्हें इतना पसंद करते थे कि जब उनका ट्रांसफर हुआ तो लोग रोने लगे और सड़कों पर आकर उन्हें रोकने की कोशिश करने लगे।

जब K. Annamalai अपने करियर के सर्वोच्च पर थे

2018 में अन्नामलाई को फिर से पदोन्नत किया गया और इस बार उनकी नियुक्ति बेंगलुरु दक्षिण में पुलिस उपायुक्त के रूप में हुई। अन्नामलाई लोगों के बीच तो लोकप्रिय थे ही, साथ ही उनके अधिकारी भी उनसे खुश रहते थे। अन्नामलाई को अनेक मंचों से सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

अचानक से लिया इस्तीफे का फैसला

एक उच्च पद की नौकरी, लोगों का प्यार, प्रशासन का सहयोग जब सबकुछ उनके पास था, तब ऐसे में अचानक 28 मई 2019 को उनके इस्तीफे की खबर से सभी लोग चौंक गए। जैसे ही उनके इस्तीफे की खबर आई, वह सुर्खियों में आ गए। लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि, क्यों एक ईमानदार अफसर नौकरी छोड़ रहा है? क्या उन पर किसी तरह का कोई दबाव है? या क्या वह राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं? या कोई और कारण है?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी और उनके तमाम अधिकारियों ने उनसे कई बार कहा कि वह अपने फैसले पर विचार कर लें, लेकिन अन्नामलाई ने नौकरी छोड़ने का जो कारण एक नोट के माध्यम से बताया,वह भी बेहद चौंकाने वाला था।

उन्होंने लिखा,”पुलिस अधिकारी की नौकरी में कई चुनौतियां शामिल है और उन्होंने हर चुनौती का पूरा आनंद लिया। अब वह उन छोटी चीजों का आनंद लेना चाहते हैं, जो उन्होंने मिस कर दी हैं।वह एक अच्छे पिता बनना चाहते हैं और अपने बेटे के साथ वक्त बिताना चाहते हैं। वह घर वापस लौट कर खेती करना चाहते हैं और देखना चाहते हैं कि उनकी भेड़े अब भी उनकी बात मानती है या नहीं।”

नौकरी छोड़ने के बाद सामाजिक सेवा में लगे हैं K. Annamalai

2019 में नौकरी छोड़ने के बाद अब अन्नामलाई अपना पूरा वक्त अपने परिवार को दे रहे हैं। इसके अलावा वह सामाजिक सेवा के कार्यों में भी लगे हुए हैं। वह शिक्षित और बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के गुण सिखा रहे हैं।

उन्होंने ‘वी लीडर्स फाउंडेशन‘ नाम का एक एनजीओ बनाया है, जिसमें वह युवाओं को नौकरी मांगने से लेकर जॉब क्रिएशन तक के तरीके सिखाते हैं। इसके अलावा वह लोगों को जैविक खेती और सामाजिक विकास के लिए भी शिक्षित करते हैं और इस तरह से वह आज भी एक बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।

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