किसान की फरियाद नहीं सुनते थे बड़े अधिकारी फिर बेटी ने आईएएस बन कर रही हैं जनता की सेवा

समाचार समाज

हमारे देश में आए दिन ऐसे किस्से सामने आते रहते हैं जिसमें ज्यादातर खबरें के ही रहती हैं कि बड़े बड़े अधिकारी गरीब तथा बेबस लोगों की फरियाद कभी नहीं सुनते और ना ही कभी उनकी समस्याओं का निवारण करते हैं जिसके कारण वह काफी निराश हो जाते हैं और उनका सिस्टम पर से भरोसा उठ जाता है और कभी कभी लोहा अपने जीवन में कभी गलत कदम भी उठा लेते हैं। आज हम आपको एक ऐसी लड़की रोहिणी भाजीभाकरे की कहानी बताने जा रहे हैं जो पिता को सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाता देख परेशान हो गई थी और उसने इस नौकरशाही में आईएएस ऑफिसर बन कर इस व्यवस्था को सही करने की ठान लिया था।

उनकी IAS ऑफिसर बनने की जिद ने उन्हें सफलता की सीढ़ी पर चढ़ा दिया. आईएएस बनकर ना सिर्फ उन्होंने अपने परिवार का नाम रोशन किया बल्कि जो अधिकारी आम जनता को परेशान करते हैं उनके लिए नजीर भी पेश की.

कौन है (rohini bhajibhakare ias) रोहिणी भाजीभाकरे

महाराष्ट्र के सोलापुर में रोहिणी भाजीभाकरे (rohini bhajibhakare ias family) का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रामदास था। उन्होंने अपने शुरुआती पढ़ाई सोलापुर के एक सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने कंप्यूटर साइंस से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पुणे के सरकारी कॉलेज से पूरी कर ली। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के बाद वो यूपीएससी की तैयारी करने लगी। मेहनती और लगनशील होने की वजह से उन्हें यूपीएससी की परीक्षा में जल्द ही सफलता मिल गई।

घर में आर्थिक तंगी होने की वजह से उन्होंने (rohini bhajibhakare education) यूपीएससी की तैयारी के दौरान किसी भी तरह की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। वो जानती थी की यूपीएससी परीक्षा में आपके धैर्य, ज्ञान और आपके व्यवहार का आकलन किया जाता है। इसलिए उन्हें उन्हें रात-दिन एक कर सेल्फ स्टडी को सफलता का जरिया बना लिया. उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2008 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली। उनके पति का नाम विजयेन्द्र बिदारी (Vijyendra Bidari) है.

बचपन में ही IAS अधिकारी बनने का लिया फैसला

रोहिणी भजिभाकरे एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार से हैं। उनके पिता रामदास खेती-बाड़ी का काम किया करते थे। खेती के काम के सिलसिले में उन्हें आए दिन अधिकारियों के पास अपने काम के सिलसिले में जाना पड़ता था। रोहिणी बताती हैं कि जब वह 9 साल की थी तब उनके पिता को अधिकारी के एक दस्तखत के लिए कई बार चक्कर लगाने पड़ते थे। कभी-कभी तो ऐसा होता था कि कई बार चक्कर लगाने के बावजूद भी अधिकारी दस्तखत करने से मना कर देते थे।

इस तरह की नौकरशाही देखकर उन्होंने बचपन में ही आईएएस बनने का मन बना लिया था। जब रोहिणी ने बड़े होकर अपने इस सपने को पिता के साथ साझा किया तो वो बहुत खुश हुए। उन्होंने अपनी बेटी को सलाह देते हुए कहा कि जब तुम कलेक्टर बन जाओ तो तुम जरूरतमंद लोगों की मदद करना।

IAS की ट्रेनिंग से पहले पिता ने दी सीख

एक इंटरव्यू में रोहिणी ने बताया कि जब वो आईएएस की ट्रेनिंग के लिए जा रही थी, तब उनके पिता ने एक सलाह दी थी। उनके पिता ने रोशनी को बताया था कि तुम जब आईएएस अधिकारी बन जाओगी तब तुम्हारे पास ढेर सारी फाइलें आएंगी। तुम उन्हें सामान्य कागज न समझना। वो फाइलें किसी शख्स की पूरी जिंदगी बना या बिगाड़ सकती हैं। तुम्हारा सिर्फ एक साइन लाखों लोगों की जिंदगी में बदलाव आ सकता है।

हमेशा लोगों की भलाई के लिए ही काम करना। इसके आगे वो बताती हैं कि उनके पिता चाहते थे कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य आईएएस अधिकारी बने और लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहें। पिता ने बताया था कि कलेक्टर बनने के बाद रोहिणी जनता की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें।

2016 में मनरेगा की तरफ से मिला अवार्ड

साल 2008 में रोहिणी की पहली पोस्टिंग तमिलनाडू के मदुरई में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर हुई। इस जिले में रोहिणी ने ऐसा काम किया जिसकी प्रशंसा पूरे राज्य में हुई। उनके कार्यकाल के दौरान ये राज्य का पहला ऐसा जिला बना जो खुले में शौच मुक्त था। उनके इस काम से राज्य में उन्हें काफी सराहना मिली। साल 2016 में उन्हें मनरेगा की तरफ से अवार्ड भी दिया गया। इस जिले में उन्होंने ग्राउंड वाटर को लेकर भी अच्छा खासा काम किया।

उनके बेहतर काम कि वजह से उन्हें तिंदिवनम में सब कलेक्टर के तौर पर तैनात कर दिया गया। अभी वह (rohini bhajibhakare current posting) सलेम जिला में सामाजिक योजनाओं को लेकर निदेशक के तौर पर कार्यरत है। रोहिणी महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी काम करती हैं। अपने शालीन स्वभाव के कारण वो लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। उनके पास जो भी फरियादी जाता है उसकी बार बहुत ध्यान से सुनकर जल्द से जल्द समस्या हल करने की कोशिश करती हैं।

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