जुनून है समाज सेवा करने का ,ऑक्सफोर्ड से पूरी की पढ़ाई बाद में लौट आए अपने देश, आईपीएस बन 42000 युवाओं की जिंदगी बदल डाली

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महाराष्ट्र बहुत बड़े राज्यों में से एक राज्य है बड़े राज्य होने के साथ-साथ इसमें नुकसान भी बहुत से होते हैं। जैसे कि यहां पर अपराधिक गतिविधियां भी बहुत ज्यादा दुखी रहती हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीबीआर के हिसाब से यह भारत का दूसरा ऐसा राज्य है। जहां पर सबसे ज्यादा अपराधिक गतिविधियां देखी जाती है और उन पर रोक लगाने की पहल भी कम की जाती है। ज्यादातर युवा मुंबई सपनों की नगरी पैसा कमाने के लिए और अपना नाम बनाने के लिए आते हैं। और इतने बड़े राज्य में गुमराह होकर गलत रास्ते पर निकल जाते हैं। जिससे कि भारत का भविष्य संकट में पड़ जाता है उनके साथ साथ पूरे देश को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। इतनी बड़ी समस्या को कम करने के लिए एक 32 वर्षीय आईपीएस ऑफिसर हर्ष पोद्दार (Harsh Poddar) ने एक ऐसा रास्ता सोचा है, जिससे युवा ग़लत रास्तों पर ना जाकर अपने लिए एक सही मार्ग का चुनाव करें।

हर्ष मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले हैं और उन्होंने अपने स्कूली शिक्षा ला मार्टिनियर स्कूल से पूरी की है। उसके बाद कोलकाता के ही नेशनल युनिवर्सिटी ऑफ़ जुडिशियल साइंसेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। वह पढ़ाई में इतने अच्छे थे कि उन्हें यूके सरकार की तरफ़ से दी जानी वाली प्रतिष्ठित शेवनिंग स्कॉलरशिप दी गई जिसके बाद उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड युनिवर्सिटी से इंटरनेशनल और कंस्टीट्यूशनल लॉ में मास्टर डिग्री हासिल की। मास्टर्स करने के बाद हर्ष विश्व की बड़ी लॉ फर्म्स क्लिफोर्ड कंपनी में कॉर्पोरेट वकील के तौर पर काम करने लगे।

हर्ष वकालत तो कर रहे थे, लेकिन उनका सपना था कि वह आम आदमी के जीवन में बदलाव लाने के लिए कुछ करें। अपने इसी फैसले के कारण साल 2011 में वह भारत लौट आए। लेकिन हमारे समाज में किसी बुराइयों में बदलाव लाना है इतना भी आसान नहीं है। इसलिए उन्होंने भारत आकर सिविल सर्विसेज में जाना चाहा। सन 2013 में अपने दूसरे प्रयास में 362वां रैंक लाकर यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए और आईपीएस को चुनकर महाराष्ट्र कैडर में ऑफिसर के पद पर कार्यरत हुए।

अपने ट्रेनिंग के दौरान हर्ष ने सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में नेत्रहीन बच्चों के लिए एक वर्कशॉप करवाया। इसके लिए उन्होंने बच्चों को कुछ छोटे-छोटे समूहों में बाँट दिया और उनसे कहा कि अगर विकलांगों के लिए कोई कानून बनाया जायेगा तो वह किन बातों को उसमें शामिल करना चाहेंगे। इस वर्कशॉप में बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और अपनी गहरी समझ से बहुत सारे ऐसे सुझाव दिए जिनका सामना उन्हें अपने दैनिक जीवन में हमेशा करना पड़ता है।

इस प्रोजेक्ट के द्वारा बच्चों को बहुत प्रेरणा मिली ताकि वह ख़ुद की एजेंसीज बनाने, विकलांगता के कानून का मसौदा तैयार करने और दिव्यांगों के आधारभूत अधिकारों को जान सके। जब जा मॉडल सफल हुआ तो यही तरीक़ा वृहद् महाराष्ट्र में भी अपनाया गया और इसी तरह 2015 में महाराष्ट्र पुलिस युथ-पार्लियामेंट चैंपियनशिप की शुरूआत की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं को अपराध से दूर रखना था।

यह पायलट प्रोजेक्ट हर्ष के ही निर्देशन में औरंगाबाद के नाथ वैली स्कूल और औरंगाबाद पुलिस पब्लिक स्कूल में शुरू किया गया। इस प्रोजेक्ट में चुने गए विद्यार्थियों को तीन ग्रुप में बांटा गया और उन्हें बहुत सारे टॉपिक्स जैसे, अपराध, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, घोटाला आदि दिए गए। जिन पर हर टीम को बोलने को कहा गया। उन्हें अपने टॉपिक्स के जरिए यह बताना था कि समाज में इन बुराइयों को कैसे रोका जाए और उनका समाधान भी बताना था।

यह अभियान पूरा होने के बाद पुलिस विभाग ने पाया कि बच्चों में इन बुराइयों के प्रति अच्छी समझ है और खासकर उन बच्चों में और भी अच्छी समझ है जो निचले वर्ग या मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। इस तरह यह प्रोजेक्ट सफल हुआ जिससे बच्चों में अपराध करने की प्रवृत्ति में कमी आई और साथ ही बच्चे अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करने लगे।

इस आइडिया से प्रेरित होकर महाराष्ट्र पुलिस ने दूसरे जिलों में भी इसकी शुरुआत की। उस समय से लेकर अब तक क़रीब 42, 000 युवाओं को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है जिससे बच्चों में अपराध करने की प्रवृत्ति कम हो जायेगी। हर्ष ने मालेगांव में एक और नई पहल की शुरुआत की है जिसका नाम उड़ान है। इसके तहत बच्चों को करियर काउंसीलिंग के बारे में बताइ जाती है। जिससे युवा बच्चे अपनी क्षमताओं को पहचान रहे हैं और हिंसा और सांप्रदायिक गतिविधियों में कम से कम हिस्सा ले रहे हैं।

हर्ष की कहानी यहीं पर नहीं ख़त्म होती। उन्होंने और भी बहुत कुछ किया है। कोल्हापुर, एक ऐसी जगह है जहाँ हाईवे पर बहुत ज़्यादा एक्सीडेंट्स होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में यहाँ 16 किलोमीटर के क्षेत्र में 107 एक्सीडेंट हुए जिसमें 42 लोगों की मौत हो गई। तब हर्ष ने एक डाटा कलेक्शन एक्सरसाइज लांच किया जो यह बताता था कि एक्सीडेंट बाली उस क्षेत्र में क्यों इतनी दुर्घटना होती है?

तब उन्होंने हाईवे सेफ्टी स्क्वाड की एक अभियान की शुरूआत की। जिसमें अगर कोई ग़लत पार्किंग का इशू है तब उससे उपयुक्त चालान लिया जाने लगा और अगर वहाँ कोई गाड़ी बहुत ही स्पीड में चलाता तो स्पीडिंग टिकट लगने लगा। किससे बहुत प्रभाव पड़ा और 2017 के पहले ही 3 महीने में 40% तक एक्सीडेंट्स कम हो गए।

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या कि भी बहुत समस्या थी। जिसका मुख्य कारण था धोखे से किसानों की बचत को इन्वेस्टमेंट स्कीम में लगा देना। इस समस्या को दूर करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 1999 में एक एक्ट महाराष्ट्र प्रोटेक्शन ऑफ़ इंटरेस्ट ऑफ़ डेपोसिटर्स (MPID) बनाया, परन्तु यह उतना प्रभावी नहीं था। तब हर्ष ने महाराष्ट्र CID के साथ और MPID लेखक के साथ मिलकर स्पष्ट अर्थों वाली एक गाइड बनाई, जिससे MPID का उपयोग बहुत आसान हो गया।

हर्ष को 2014 में नेशनल पुलिस अकादमी हैदराबाद से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद साम्प्रदायिक सौहाद्र और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए होम मिनिस्टर अवार्ड से नवाजा गया। महाराष्ट्र सरकार की ट्रॉफी भी उन्हें प्रदान की गई।

वाकई हर्ष ने देश की ऐसी-ऐसी समस्याओं के समाधान पर काम किया जिनसे निजात पाना बेहद ही मुश्किल था। वे अपने काम को लेकर उन सभी पुलिस ऑफिसर्स और आम आदमी के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो देश की सेवा करना और समाज में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं।

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