पिता के साथ गांव में किया करते थे खेती, लेकिन अपने परिश्रम के दम पर पहली बारी में बने यूपीएससी के टॉपर

समाचार समाज

आज हम आपको एक ऐसी शक्ति कहानी सुनाने वाले हैं जिसके कहानी सुनने के बाद आपको भी उनकी इस सफर पर दिलचस्पी होने लगेगी क्योंकि उन्होंने काम किया है उनका नाम है रवि कुमार जिन्होंने अपनी पढ़ाई एक साधारण से हिंदी मीडियम स्कूल में पूरी करी और बिना किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट में जाए हुए अपने दम पर मेहनत मजदूरी कर पहले प्रयास में यूपीएससी के टॉपर बने और इतिहास रच दिया रवि कुमार एक साधारण से परिवार से आते हैं उनके जीवन में पढ़ाई के लिए दिशा प्रदान करने वाला ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं था उसके बावजूद भी उन्होंने अपने काम पर और काबिलियत के दम पर चाहे आप का बैकग्राउंड कितना भी कमजोर क्यों ना हो लेकिन अगर आपके मन में सच्ची निष्ठा और लगन है तो आप अपने बलबूते पर किसी भी पेपर में अव्वल आ सकते हो और अपने परिवार को गौरवान्वित महसूस करने का मौका दे सकते हो।

इस कारण से दी थी यूपीएससी की परीक्षा

आईएएस रवि कुमार ने अपने इंटरव्यू में दर्शकों को यह भी बताया था कि वह बचपन में अपने पिताजी के साथ खेत जाया करते थे और उनके साथ मेहनत मजदूरी करने में उनका हाथ बताते थे जब तक उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी नहीं की तब तक वह अपने परिवार के साथ खेती-बाड़ी में उनका हाथ बताया करते थे और उनकी हर मुमकिन मदद करते थे उनसे बन पढ़ती थी। जब भी उनके गांव में किसी भी प्रकार की खेती से जुड़ी हुई समस्या सामने आती थी तुम्हें हर बार कलेक्टर ऑफिस में जाना पड़ता था और किसी भी परेशानी का हल ढूंढने के लिए उन्हें हमेशा ही कलेक्टर ऑफिस जाकर उनसे गुहार करनी पड़ती थी फिर उन्होंने सोचा कि आखिर या कलेक्टर कौन व्यक्ति है जो हर छोटी से बड़ी समस्या का इतनी आसानी से हल निकाल देता है और उन्होंने कई लोगों से आप भी सुना था कि लोग ताने देते हैं कि कलेक्टर हो जो तुमसे यह काम हो जाएगा इस प्रकार से उन्होंने सोचा कि अब मैं भी इसी फील्ड में अपना और लोगों की परेशानी दूर कर उनके काम आऊंगा।

हमेशा पढ़ाई की एनसीईआरटी बुक से और किया था अपना बेस मजबूत

रवि कुमार ने कहा कि हमेशा से ही उन्होंने यूपीएससी परीक्षा का सिलेबस देखा तो उन्होंने सबसे पहले अपने साधारण पढ़ाई को मजबूत करते हुए एनसीआरटी बुक्स की मदद से अपना फेस क्लियर करा और एनसीआरटी बुक्स को पढ़ने के बाद उनसे विशेष रूप से चीजें सीखी आईएएस रवि कुमार का कहना है कि एग्जाम में आपको एक तरीके से मेहनत करने की आवश्यकता होती है। उनका कहना है कि इस टेस्ट में इंसान को पूरी तरह से परखा जाता है कि जॉब के लिए उपयुक्त है या नहीं।

रवि कुमार का कहना है कि चाहे हिंदी मीडियम हो या इंग्लिश दोनों को ही तैयारी करनी होती है

रवि कुमार का कहना है कि हमेशा से ही जो भी व्यक्ति को किसकी परीक्षा की तैयारी करता है उसे हमेशा यही चिंता लगी रहती है कि अगर वह हिंदी मीडियम से है तो उसे आने वाले समय में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इसी वजह से उसका आत्मविश्वास भी थोड़ा कमजोर होने लगता है जबकि आमतौर पर यह बात सही नहीं है चाहे हिंदी मीडियम इंग्लिश मीडियम उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेहनत तो दोनों को ही करनी होती है और जिस की मेहनत और लगन सबसे अच्छी हुई वह हमेशा अपनी मंजिल तक अवश्य पहुंचता है वह बताते हैं कि मीडियम भी हिंदी होने के कारण उनका सोचना भी यही था लेकिन पेपर के लिए करने के बाद उनकी सोच बदल गई और उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा को कर अच्छे नंबर हासिल किए और 2018 के हिंदी माध्यम से जुड़े हुए प्रतिभागियों में से टॉपर बने।

रवि कुमार का मानना है कि इंग्लिश सीखना है आवश्यक

उनका मानना है कि आप चाहे पहले हिंदी मीडियम से परीक्षा देना सही समझे लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि आपको इंग्लिश की आवश्यकता आगे चलकर नहीं पड़ेगी क्योंकि हमारे देश में इंग्लिश और हिंदी दोनों का ही महत्व है आपके करियर में परीक्षा भले ही आप हिंदी मीडियम से दे दे लेकिन परीक्षा में कामयाबी हासिल करने के बाद आपको सर्विस से जुड़े कार्य में इंग्लिश का सामना करना पड़ेगा और इसीलिए आपको इंग्लिश सीखना भी बहुत ही ज्यादा आवश्यक है और आपकी इस परीक्षा को लेकर मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है उन्होंने कहा कि शिक्षा के बारे में हमेशा से ही अनेकों सवार रहते हैं जिसकी वजह से वह काफी परेशान लेने लगते हैं उनका मानना है कि है परीक्षा उतनी भी मुश्किल नहीं है जितनी इसके बारे में लोगों द्वारा परंपरा जा चुका है समाज में अगर आप दृढ़ निश्चय कर लें और मन बना लेंगे आपको इस पेपर में क्लियर होना ही हैं तो आप अवश्य होंगे और शिक्षा को अवश्य ही पास करेंगे उनका मानना है कि यदि मैं इस परीक्षा को पास कर सकता हूं तो भारत देश में से कोई भी नौजवान इस परीक्षा में सफल हो सकता है और अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है रवि कुमार कीइस प्रेरणादायक कहानी को सुनकर सभी नौजवानों को अवश्य ही प्रेरणा मिलेगी और उन्हें भी यूपीएससी की परीक्षा पास करने के लिए कुछ हौसला और सही रास्ता अवश्य दिखा होगा इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद

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