राजस्थान की बेटी कृतिका कुल्हरी फ्लाइंग अफसर बानी वायु सेना में, गाँव वालो के लिए पेश की मिसाल

समाचार समाज

आज हम आपको राजस्थान के एक छोटे से जिले की रहने वाली लड़की के बारे में बताने वाले हैं जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर फ्लाइंग ऑफिसर बन अपने गांव की औरतों के लिए एक मिसाल पेश की है हमें भी अपने जीवन में आगे बढ़ने का मौका दिया हे। सभी के लिए परेणा का एक रूप बन गई है दरअसल हम लोग सभी फादर्स डे पर अपने पिता को उपहार के तौर पर कुछ ना कुछ देते हैं। लेकिन कृतिका ने जो गिफ्ट अपने पिता को फादर्स डे पर दिया शायद उस से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। राजस्थान के झुंझुनू जिला हमेशा से ही सेना में शामिल होने के लिए नंबर एक स्थान पर रहा है।

एनसीसी से आर्मी और फिर एयरफोर्स में हुई शामिल 

कृतिका की बात करें तो पहले एनसीसी में कैडेट के रूप में शामिल थी। वह हमेशा से ही भारतीय सेना में शामिल होने का सपना देखा करती थी। आपको बताएं तो उन्होंने पहले थल सेना यानी आर्मी की परीक्षा को पास कर लिया था और उन्होंने आर्मी की परीक्षा में पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त किया था। आर्मी में शामिल होने के बाद में ट्रेनिंग के लिए चेन्नई चली गई थी। लेकिन कृतिका का मन हमेशा से ही भारतीय वायु सेना में था और इसी के चलते उन्होंने दो महीने बाद थल सेना से वायु सेना में जाने का फैसला किया। अब वह भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग अफसर के तौर पर काम करेंगी।

मेडिकल क्षेत्र की पढाई कर चुकी है कृतिका 

कृतिका कुल्हरी कि शिक्षा की बात करनी थी उन्होंने क्राइस्ट यूनिवर्सिटी बेंगलुरू से क्लिनिकल साइकोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने इंस्टीट्यूट आफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज यानी एनआईएमएच में 6 महीने काम भी किया है।

पिता का सपना हुआ सच

कृतिका के घर पर जब इस बात की जानकारी मिली तो खुशी का माहौल है। दरअसल कृतिका के दादा किसान बहादुर सिंह और दादी मिको देवी अपनी पोती की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। साथ ही कृतिका के पिता जो गुड़गांव में मारुति सुजुकी कंपनी में डीजीएम आईटी के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि कृतिका के अलावा भी उनके परिवार में उनके बड़े भाई के.आर कुल्हरी नेवी में कमांडर है। साथ ही कृतिका के पिता ने बताया कि परिवार में हमेशा से ही सेना की तरफ जाने की प्रेरणा मिली है।

हमारे परिवार में हम लोग सेना में ही रहकर भारत की रक्षा करना चाहते हैं। वह खुद भी सेना में जाने का सपना देखा करते थे, लेकिन किसी कारणवश सेना में शामिल नहीं हो पाए। कृतिका के पिता ने अपने सपने को कृतिका के तौर पर जीने का फैसला किया और कृतिका ने अपने पिता के सपने को खुद का सपना बनाकर मेहनत करना शुरू कर दिया। इसके बाद अब 25 साल की कृतिका अफसर के तौर पर भारत की सेना में शामिल हो गई।

कठिन ट्रेनिंग और परेड के बाद शामिल 

कृतिका कुल्हरी की बात करें तो वह भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद तेलंगाना की डिंडीगल वायु सेना अकादमी में ट्रेनिंग के लिए चली गई थी। वहां 1 साल से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद व पासिंग आउट परेड के बाद वायु सेना में शामिल हुई हैं।

कृतिका की माता डॉ विजयलक्ष्मी कुल्हरी का कहना है कि उनकी बेटी ने पूरे परिवार का नाम रोशन किया है। उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी वायु सेना में रहकर भारत की रक्षा करेंगी।

कृतिका कुल्हरी अपने आप में एक उदाहरण बन कर सामने आई है। उन्होंने साबित किया है कि लड़कियां भी लड़कों से कम नहीं होती। जब से वायुसेना, थलसेना व जल सेना में महिलाओं को जाने के अवसर मिले हैं, तभी से देश की कई नौजवान लड़कियां सेना में अफसर के तौर पर शामिल हो रही हैं।

देश की भविष्य के लिए अच्छी बात मानी जा सकती है। वही झुंझुनू जिले की पिलानी की रहने वाली कृतिका ने भी इस बात को सत्य साबित किया है कि राजस्थान में अब बेटियों को उनके सपने जीने से रोका जाता है।

वही आपको बताएं तो झुंझुनू जिले की कई बेटियां भारतीय वायुसेना में शामिल हो चुकी हैं। वायु सेना व देश की सबसे पहली फाइटर पायलट बनने वाली बेटियां भी राजस्थान के झुंझुनू जिले की थी।

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