शादी होने के बाद अपनी सुरक्षा के लिए दलित लड़की और लड़का पहुंचे पुलिस स्टेशन फिर राजस्थान पुलिस ने किया

समाचार समाज

वैसे तो भारत देश में जाति पाति के ऊपर काफी विषय हमेशा ही बना रहता है। लेकिन अभी भी तो कैसे गांव है जहां पर जातिवाद सबसे पहले आता है और यहां पर इस कारण से काफी लड़ाई झगड़े भी देखने को मिलते रहते हैं। लेकिन वहां के सरकार उस पर कुछ एक्शन ले रही है जिसके कारण से मार के नीति लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है पूजा करते हुए आज हम आपको बताने वाले हैं। दरअसल, 18 जून को लड़की के कथित तौर पर लापता होने के बाद यह घटना प्रकाश में आई। लड़की के परिजनों ने दावा किया कि उनकी बेटी नाबालिग थी और राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ नगरपालिका में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करने वाले दलित हिंदू लड़के ने उसे शादी का प्रलोभन दिया था।

वहीं दूसरी तरफ, राजस्थान के नागौर जिले के मकराना कस्बे की लड़की ने दावा किया कि वह बालिग़ है और उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है। उसने दावा किया कि उसके परिवार के सदस्य उसकी शादी के विरुद्ध हैं और उसके पति के परिवार को हिंसा की धमकी देने का प्रयास कर रहे हैं। उसे डर था कि अंतरधार्मिक विवाह से नाराज उसके परिवार के सदस्य उसे और उसके पति की हत्या कर देंगे। इस जोड़े ने जान के खतरे के डर से बुधवार (जून 23, 2021) को अजमेर में कलेक्ट्रेट में पनाह ली थी। लेकिन लड़की के माता-पिता को इसके बारे में पता चल गया। वे मकराना पुलिस अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुँचे और जिला कार्यालय में हो-हल्ला करने लगे। पुलिस और लड़की के परिवार ने दावा किया कि उनके पास ऐसे डॉक्यूमेंट हैं, जो साबित करते हैं कि लड़की नाबालिग है। उन्होंने युवक पर नाबालिग लड़की को शादी के लिए फुसलाने का इल्जाम लगाया।

दूसरी तरफ, लड़की ने दावा किया कि वह नाबालिग नहीं है और उसने अपनी मर्जी से दलित युवक से विवाह किया था। इसके बाद लड़की और उसके माता-पिता के बीच विवाद मारपीट में बदल गया। इसके बाद लड़की के परिवार वाले मकराना पुलिस अधिकारियों की सहायता से लड़की को अपनी तरफ खींचने लगे, जबकि लड़की मना करती रही। उसने चिल्लाना शुरू कर दिया और अपने माता-पिता के साथ जाने से इंकार किया। हालाँकि मकराना पुलिस ने दंपति को काबू कर लिया। उन्हें कलेक्ट्रेट से बाहर खींच कर अरेस्ट कर लिया, जबकि अजमेर के कलेक्टर कार्यालय के भीतर से अधिकारी ड्रामा देखते रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम लड़की को उसके पति से अलग होने के बाद बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जिसने उसे नागौर के सावित्री बाई फुले गर्ल्स हॉस्टल भेज दिया। वहीं, दलित युवक को अरेस्ट कर एक दिन के रिमांड पर लिया गया। अब बाल कल्याण समिति 28 जून को इस मामले की सुनवाई करेगी।

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