आदिवासियों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए निकाला बेहद अनोखा तरीका उनके घर के चबूतरे पर शुरू की क्लास और दीवार को बनाया ब्लैक बोर्ड

ज्ञान समाज

कोविड-19 की वज़ह से बच्चों की शिक्षा बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई है, चाहे वह बहुत बड़े शहर के हो, गाँव के हो या फिर आदिवासी हो। यहीं समस्या दुमका में रहने वाले आदिवासी बच्चों के लिए भी बनी रहती है। लेकिन उन शिक्षकों के जज्बे को सलाम है जिन्होंने मिलकर इस गाँव की शिक्षा व्यवस्था ही बदल दी।

उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, बाधित न हो इसके लिए पूरे गाँव की दीवारों को ब्लैकबोर्डक और घर के बाहर चबूतरा बनवा कर उसे क्लास का दर्जा दे दिया और लाउडस्पीकर के ज़रिये असाइनमेंट देते हैं।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस, दुमका के जरमुंडी ब्लॉक के अंतर्गत डुमथर गाँव में ‘उत्क्रमित मध्य विद्यालय’ (Utkramit Madhya Vidyalaya) के तहत पढ़ने वाले बच्चों को लाभ पहुँच रहा है। शिक्षक गांव-गांव घूमकर लाउडस्पीकर पर असाइनमेंट देते हैं और छात्र उन सवालों को घर के बाहर ब्लैकबोर्ड पर हल करते हैं।

उन शिक्षकों द्वारा यह तरीक़ा इसलिए अपनाया गया क्योंकि गाँव के बहुत बच्चों के पास स्मार्ट फ़ोन नहीं था पढ़ाई करने के लिए। इस तरह बच्चे अपने घर के बाहर बने चबूतरे पर बच्चे बैठते हैं और शिक्षकों द्वारा दिए गए असाइनमेंट को पूरा करते हैं।

वहाँ के स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि जब उन्होंने देखा कि लगभग 295 बच्चों का जीवन इससे प्रभावित हो रहा है, तो उन्होंने बच्चों के घर तक शिक्षा पहुँचाने का फ़ैसला किया। जिसके लिए उन्हें घर-घर जाकर बच्चों के पेरेंट्स को राज़ी करना पड़ा।

प्रिंसिपल ने यह भी कहा कि हमने इस पहल को “शिक्षा आपके द्वार-समुदाय आपके साथ” नाम दिया है और सभी छात्रों के दरवाजे पर ब्लैकबोर्ड की तरह पेंट किया गया है और हर बच्चे का अपना चाक, डस्टर और ब्लैकबोर्ड होता है। जिन छात्रों को कुछ समझ नहीं आता है, वे उसे ब्लैकबोर्ड पर लिखते हैं और शिक्षक उसे हल करते हैं। “

इस नवाचार के ज़रिये वह सभी बच्चे पढ़ पा रहे हैं जो किसी ना किसी वज़ह से ऑनलाइन क्लासेज नहीं कर पाते थे। ऐसे टीचर्स को सलाम है, जिन्होंने छात्रों के भविष्य में रोशनी लाने का काम किया है।

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