एक साधारण अख़बार बेचने वाले पिता का बेटा लाया 98.54% IIT JEE की परीक्षा में : बेटी का सपना है साइंटिस्ट बनने का

समाज

बुजुर्गों ने कहा है कि जिस भी व्यक्ति के अंदर प्रतिभा होती है। वहां किसी पैसे या अवसर का मोहताज नहीं होता है। इस बात का उदाहरण पेश किया है एक गरीब अखबार बांटने वाले के बेटे ने IIT JEE (Mains) की परीक्षा में 98.54% अंक हासिल किए और अपने पिता का नाम रोशन किया। अखबार बेचने वाले पिता के बेटे का सपना है कि वह बने साइंटिस्ट बने और भारत को अपनी सेवा दे जिससे कि भारत आगे भविष्य में तरक्की कर सके और उसे इस तरक्की में भागीदारी का मौका मिले।

झारखंड के हजारीबाग के रहने वाले करन के पिता कुंदन कुमार अख़बार बेचने का काम करते हैं। 45 वर्षीय उनके पिता ने अपनी पूरी ज़िन्दगी इस काम में लगा दी और आज उनके बेटे ने उनके संघर्षशील जीवन को एक नया आकार दिया है और IIT JEE जैसे कठिन परीक्षा में इतने अच्छे अंक हासिल किए हैं।

कहाँ से मिली प्रेरणा?

एक इंटरव्यू के दौरान करन ने कहा कि:-“मेरे पिता ने हमेशा यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है कि मेरी बड़ी बहन और मैं स्कूल और कॉलेज जाएँ। इसने मुझे हमेशा कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

9वीं कक्षा में, मुझे एलोन मस्क के बारे में एक कहानी पढ़ने को मिली। उनकी कहानी इस बारे में थी कि उन्होंने PayPal (जिसे पहले X. com के नाम से जाना जाता था) की स्थापना कि और बाद में इसे अपने स्पेस एक्स को शुरू करने के लिए बेच दिया। उस दिन, मैंने ख़ुद से कहा कि मैं उनके जैसा उद्यमी बनने के लिए कड़ी मेहनत करूँगा और ऐसा करने के लिए मुझे देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान (IIT) की ज़रूरत है।”

शुरू से ही करन पढ़ने में अव्वल रहे हैं। 10वीं कक्षा में टॉप करने के बाद उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली थी। करन अपने भविष्य में एक साइंटिस्ट और फिर एक इंटरप्रेन्योर बनना चाहते हैं।

रोज़ कितने घंटे किया पढ़ाई?

वो अपनी परीक्षा कि तैयारी के लिए हर दिन 12-14 घंटे मेहनत किया करते थे। ऐसे में, सफलता का उनके क़दमों में झुकना ही था। इसी तरह करण अपने भविष्य में आगे बढ़ते रहें और सफलता कि नई-नई ऊंचाइयों को छूते रहें।

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