कंप्यूटर साइंस इंजनीयर ने मैनेजर की पोस्ट छोड़कर शुरू किया आर्गेनिक खेती का धंधा अब कमा रहे है लाखो

समाज

भारत का युवा आज कल अपनी वेल पेड नौकरी को छोड़कर अपनी रूचि आर्गेनिक खेती की तरफ दिखा रहे है , जहाँ उन्हें अपनी नौकरी में लाखो का पैकेज मिल रहा है वही वो अपना खुद का आर्गेनिक खेती का काम शुरू करना चाह रहे है ,कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने के बाद जैमिन पटेल ने, 7 साल तक जॉब भी किया। वह सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। उनका सालाना पैकेज भी बहुत अच्छा था। माता-पिता डॉक्टर हैं। इसके बाद भी वह सब छोड़कर किसान बन गए. अब वह ऑर्गेनिक तरीके से फल और सब्जियाँ उगा रहे हैं। हर साल 8 से 10 लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं।

गुजरात के भरूज के कविथा गाँव के रहने वाले जैमिन पटेल की यह कहानी उन लोगों को काफ़ी प्रेरित करती है जो एक बंधी बंधाई नौकरी में अपना पूरा जीवन काट देते हैं। वैसे लोग ना तो ख़ुशी से अपनी नौकरी कर पाते हैं और ना ही अपने मन का काम, क्योंकि उनमें रिस्क लेने की क्षमता नहीं होती। दैनिक भास्कर से बात करते हुए जैमिन कहते हैं, “उन्हें पहले खेती की जानकारी नहीं थी। उन्हें ये भी नहीं पता था कि उनके खेत कहाँ हैं, क्योंकि वह सिर्फ़ त्यौहार पर ही गाँव जाया करते थे।”

उन्होंने कहा कि ” जब साल 2011 में अपने एक दोस्त को पॉलीहाउस प्रोजेक्ट पर काम करते देखा था, तब मुझे उसका काम बहुत अच्छा लगा। जॉब के दौरान ही मैं इस काम के सिलसिले में कई राज्यों में घूमता रहा और पॉलीहाउस के साथ-साथ खेती की जानकारी जुटाने में लग गया।

जब साल 2012 में जैमिन इसके लिए तैयार हए तो उनका दोस्त इसके लिए राजी नहीं हुआ। लेकिन, उन्होंने अपने दिमाग़ को इसके लिए पूरी तरह से प्रिपेयर कर लिया था। उनके पास पहले से ही कुछ ज़मीन थी और कुछ ज़मीन उन्होंने खरीद भी लिया। सबसे पहले उन्होंने बीजा रहित खीरा और कलर कैप्सिकम की खेती की। जिसे बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला और इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से अपनी जॉब छोड़कर दिया और खेती करने लगे।

वर्तमान में वह 15 एकड़ खेत में ऑर्गेनिक और सेमी ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं, जिसमें गन्ना, तुअर दाल, कपास, मूंग, तरबूज, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी प्याज, पालक, धनिया जैसी फसलें उगा रहे हैं। वह गुजरात में उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मानित भी हो चुके हैं। अब वह कई लोगों को रोजगार देकर अपने अंडर में रखकर काम करा रहे हैं।

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