कभी खेत में मजदूरी किया करते थे सिर्फ ₹5 के लिए ,आज हे मालिक इस करोड़ों की कंपनी की

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यह बात तो आपने अपने बड़े बुजुर्गों से अवश्य सुनी होगी कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती तथा आपको अनुभव जिस दिन वह में प्राप्त हो अनुभव अनुभव ही होता है तथा जो व्यक्ति उसको जितनी जल्दी समझ जाता है। उसे जीवन में सफलता उतनी ही जल्दी मिलती है इसी तरीके से ज्योति को भी उनके पिता बैंक के डैडी ने सिर्फ 9 वर्ष की उम्र में ही अनाथालय में भेज दिया था इसके पीछे का कारण बहुत ही ज्यादा बड़ा था इसे समझते समझते ज्योति को सालों लग गए अनाथालय में रहने के कारण उनको एक अच्छा माहौल मिला और बहुत कुछ सीखने को मिला जिसका वह आज भी अपने इंटरव्यू में जिक्र करते रहते हैं। और वही ज्योति ने अपने कर्म से अपने हाथों की लकीरों को बदल डाला और अपने मेहनत के दम पर कभी 10-10 घंटे काम कर 5 रु. कमाने वाली ज्योति आज बन चुकी है 15 मिलियन डॉलर की मालकिन।

पैसों की कमी के वजह से ज्योति के पिता ने ज्योति के साथ उनकी छोटी बहन को भी अनाथालय में ही रख दिया था। इस अनाथालय से ही ज्योति की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई क्योंकि उन्हें अपना परिवार अपना घर छोड़कर अनाथालय में रहना पड़ रहा था। लेकिन ज्योति ने कभी हार नहीं माना। आइए जानते हैं ज्योति के अनाथालय से अमेरिका तक का सफर।

ज्योति रेड्डी का परिचय (Jyothi Reddy)

ज्योति रेड्डी (Jyothi Reddy) का जन्म 1970 में तेलंगाना के वारंगल जिले के गुडेम में हुआ था। वह एक बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। काफी मुश्किलों भरा रहा ज्योति का यह सफर। ज्योति के पांच भाई बहन हैं जिनमें ज्योति दूसरे नंबर पर हैं। जब ज्योति 9 साल की थी उसी समय उनके पिता ने ज्योति के साथ उनकी छोटी बहन को भी अनाथालय में रख दिया और इसके पीछे की वजह थी घर में पैसों की कमी। अनाथालय जाने के बाद ज्योति की छोटी बहन बीमार पड़ गई और इस वजह से उनके पिता उन्हें वापस घर ले आए लेकिन ज्योति अब भी वही रह रही थी।

एक इंटरव्यू में ज्योति ने बताया कि अनाथालय में रहने के दौरान उन्हें बहुत परेशानी होती थी एक बाल्टी पानी के लिए घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता था। ना ही नल था और ना ठीक ढंग का बाथरूम था। वहां उनकी मां उन्हें बहुत याद आती थी। लेकिन ज्योति को वहां लोगों को यदि दिखाना पड़ता था कि उनकी मां नहीं है।

अनाथालय में रहने के दौरान उन्हें काफी कुछ अनुभव हुआ

ज्योति ने बताया कि अनाथालय में रहने के दौरान उन्हें काफी कुछ अनुभव हुआ। उन्होंने वहां वोकेशनल स्किल्स में टेलरिंग सीख ली। इसके साथ ही ज्योति अनाथालय के सुपरिटेंडेंट के यहां उनके घरेलू कामों को भी करती थी। इसी दौरान उन्होंने देखा कि एक अच्छी लाइफ जीने के लिए नौकरी और पैसों की कितनी अहमियत होती है। ज्योति वहां सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई पूरी कर सकी।

5 रूपए के लिए 10 घंटे काम करने पड़ते थे

जब ज्योति 16 साल की हुई तब उनकी शादी शम्मी रेड्डी नाम के एक लड़के से कर दी गई। आपको बता दें तो ज्योति के पति यानी शम्मी रेड्डी के पास सिर्फ आधा एकड़ जमीन थी। परिवार के गुजारा के लिए ज्योति को 10 घंटे खेतों में काम करना पड़ा जिसके उन्हें सिर्फ 5 रूपए मिलते थे। शादी के 1 साल बाद ज्योति मां भी बन गईं। जिसके बाद उन्हें खेतों में काम के साथ घर आकर भी सारे कामों को निपटाना पड़ता था।

इसके बाद ज्योति ने फिर से अपने आगे की पढ़ाई शुरू की और केंद्र सरकार द्वारा आई हुई एक योजना नेहरू युवा केंद्र में वॉलिंटियर बनी और पढ़ाना शुरू कर दिया। इसमें उन्हें बहुत कम पैसे मिलते थे तब उन्होंने अलग से आमदनी के लिए रात में सिलाई का काम करना शुरू किया। और साथ में उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर ओपन विश्वविद्यालय से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।

इसके बाद सन 1994 में ज्योति की नौकरी एक गेस्ट टीचर के रूप में हो गई जहां उन्हें 398 रूपए सैलरी मिलती थी। ज्योति ने बताया कि स्कूल आने जाने में उन्हें 2 घंटे लग जाते थे। तब ज्योति ने इस 2 घंटे का इस्तेमाल करते हुए रास्ते में ही यात्रियों को साड़ी बेचने का काम शुरू किया। इससे उन्हें समय की कीमत का पता चला और साथ में कुछ आमदनी भी हो जाती थी।

उसके बाद सन् 1995 के आसपास उन्हें एक Mandal Girl Child Development Officer की नौकरी मिली जहां उन्हें 2750 रुपये तक सैलरी मिलती थी। तब उन्होंने 1997 में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री भी पूरी कर ली।

फिर ज्योति ऐसे अमेरिका पहुँच गई..

इसी दौरान ज्योति ने अपने कजिन के लाइफ़स्टाइल को देखा जो अमेरिका रहती थी। उनकी कजिन ने ज्योति से यह भी कहा कि वह भी अमेरिका में रहकर अपना सब कुछ मैनेज कर सकती हैं यहीं से ज्योति ने भी अमेरिका जाने का प्लानिंग करना शुरू किया। और इसके लिए पैसे बचाने शुरू कर दिए। उन्होंने शिक्षकों के साथ मिलकर चिटफंड शुरू कर लगभग 25000 तक कमा लिए। और इसके साथ ही उन्होंने हैदराबाद जाकर कंप्यूटर क्लास लेना भी शुरू किया। लेकिन इसके लिए उनके पति राजी नहीं थे।

पैसे इकट्ठा करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी से कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपना पासपोर्ट बनवाया। शुरुआत में वह अपने कजिन के साथ रहकर 12 घंटे की नौकरी करती थी जहां उन्हें 60 डॉलर सैलरी मिल जाती थी लेकिन बाद में वह एक पेइंग गेस्ट की तरह गुजराती परिवार के साथ रही। ज्योति ने अमेरिका में कई तरह के छोटे-मोटे काम किए जैसे बेबी सीटर, गैस ऑपरेटर, सेल्स गर्ल इत्यादि के। इसके बाद उन्होंने एक “CS America” नाम की कंपनी में रिक्रूट की जॉब मिली।

बना ली अपनी ख़ुद की कम्पनी

ज्योति 2001 में लगभग डेढ़ सालों बाद अमेरिका से अपनी बेटियों से मिलने के लिए भारत आई। एक दिन मंदिर जाने पर ज्योति की मुलाकात एक पुजारी से हुई जिस ने कहा कि आप आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू करेंगी। यहीं से उनके मन में बिजनेस का आईडिया आया
और उन्होंने एक कंसलटिंग कंपनी शुरू करने का विचार किया जो यूएस के लिए पेपर वर्क वीजा जैसी जरूरतों पर काम करती है।

इस तरह ज्योति ने साल 2001 में 40 हज़ार डॉलर की बचत को इन्वेस्ट करके अपनी एक कंपनी Software Solutions Inc की शुरुआत की। जहां रिक्रूटमेंट और सॉफ्टवेर सोल्यूशन डेवेलप करने का काम होता था। बाद में उन्होंने अपने कजन को भी इस कंपनी में पाटनर बना लिया और इनकम बनने पर अपनी बेटियों को भी अमेरिका बुला लिया।

कंपनी के शुरुआत के पहले साल में उन्हें लगभग 1 लाख 68 डॉलर हजार का मुनाफा हुआ, जो आगे बढ़कर मिलियन डॉलर्स में बदल गया। आज के समय में ज्योति के कंपनी का टर्नओवर लगभग 15 मिलियन डॉलर पहुंच चुका है और लगभग 100 से भी अधिक लोग उनकी कंपनी में काम करते हैं। ज्योति अपनी कमाई से अमेरिका में चार चार बंगले खरीद चुकी हैं, उनका एक बंगला भारत के हैदराबाद में भी है।

ज्योति की यह कहानी वाकई दूसरों को प्रेरणा देने का काम करती है। जिन्होंने लोगों को अपने हिम्मत के द्वारा बहुत कुछ सिखाया।

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