क्या आपको भी नहीं पता कि हवाई चप्पल में “हवाई” शब्द का असल अर्थ क्या है ,जानिए इससे जुड़ी कहानी

समाचार समाज

कोई भी व्यक्ति ऑफिस से अपने घर आने के बाद जूते सैंडल आदि ऐसी कुछ भी चीजें नहीं पहनता है बल्कि घर में आने पर वह हवाई चप्पल ही पहनता है। तथा यह कहानी लगभग हर भारत के घर की है क्योंकि हवाई चप्पल पहनने में सबसे ज्यादा आरामदायक होती है। भारत जैसे देश में पिछले कई वर्षों से हवाई चप्पल हमारे जीवन में अंदरूनी रूप से शामिल है इसलिए आज हम आपको यह बात बताने वाले हैं कि आपको हवाई चप्पल के इतिहास के बारे में आख़िर इसका नाम हवाई चप्पल क्यों पड़ा और इसका मतलब क्या होता है?

चप्पल को अलग-अलग देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बात अगर भारत की जाए तो हमारे यहाँ इसे “हवाई चप्पल” के नाम से जानते हैं। भारत समेत कई देशों जैसे चीन, इजिप्ट, जापान और अमेरिका के इतिहास में इस चप्पल जैसे चित्र का ज़िक्र मिलता है। इस तरह यह पता चलता है कि हवाई चप्पल बहुत ही लंबे अरसे से चला आ रहा है।

बहुत लोग ऐसे सोचते हैं कि हवाई जहाज़ के नाम पर इसका नाम हवाई चप्पल पड़ा लेकिन यह ग़लत है। हालांकि इसके स्ट्रिप्स का शेप V और Y की तरह होता है, जो दिखने में हवाई जहाज़ के आकार की तरह लगता है। इसके पीछे कई और कहानियाँ हैं कि आख़िर हवाई चप्पल आई कहाँ से और बनती कैसे है, या फिर इसमें प्रयोग होने वाला हवाई शब्द का मतलब क्या होता है? इसलिए आज हम इससे जुड़ी आपको कई बातें बताने वाले हैं।

हवाई चप्पल नाम क्यों पड़ा

कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि यह नाम अमेरिका के हवाई आइलैंड के कारण मिला है क्योंकि अमेरिका में हवाई आइलैंड में ‘T’ नाम का एक पेड़ होता है। और इस पेड़ के द्वारा जो रबर नुमा फ़ैब्रिक बनता है, उसी से यह चप्पलें बनाई जाती हैं। यही वज़ह है कि इन्हें ‘हवाई चप्पल’ के नाम से जाना जाता है।

कुछ लोग हवाई चप्पल के वज़न को लेकर भी यह कहते हैं कि इस चप्पल का वज़न हवा जितना हल्का होता है इसलिए इन्हें ‘हवाई चप्पल’ कहा जाता है। हवाई चप्पलों जैसा डिज़ाइन जापान में पहनी जाने वाली फ़्लैट हवाई चप्पल ‘ज़ोरी’ या हाईहील सैंडल्स ‘गेटा’ से मिलता-जुलता होता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि जापान में भी हवाई चप्पल का कनेक्शन जुड़ा हुआ है।

कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि सन 1880 में खेत, कारख़ानों इत्यादि में काम करने के लिए जब जापान के ग्रामीण इलाक़ों से मज़दूरों को अमेरिका के ‘हवाई आईलैंड’ लाया गया था, तब उन्हीं के साथ चप्पलों का ये डिज़ाइन भी ‘हवाई’ पहुँचा। उसके बाद क़रीब 50 वर्षों के बाद सन् 1932 में कोबलर एल्मर स्कॉट ने हवाई में चप्पल को बनाने में प्रयोग किए जाने वाले रबड़नुमा फैब्रिक को जापान के डिज़ाइन में ढाला, जिसके बाद हवाई चप्पलें अस्तित्व में आईं।

पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध होने से पहले हवाई चप्पलों का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों ने ‘प्रथम विश्वयुद्ध’ और ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ के दौरान बड़े पैमाने पर किया था। जिसके बाद ही ये चप्पलें पूरी दुनियाभर में अस्तित्व में आई। जबकि कुछ इतिहासकार ये भी कहते हैं कि अमेरिकी सैनिकों के द्वारा ही जापान से ‘ज़ोरी’ लाया गया था, जो बाद में हर जगह प्रसिद्ध हुआ।

‘हवाई चप्पल’ नाम को लोकप्रिय बनाने का श्रेय ब्राजीलियन शू ब्रांड हवाईनाज़ को जाता है

‘हवाई चप्पल’ नाम को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाने का श्रेय लोग ब्राजीलियन शू ब्रांड हवाईनाज़ को भी देते हैं। यह शू-ब्रांड फ़्लिप-फ़्लॉप चप्पलें बनाने का काम करता है। ‘हवाइनाज़’ कंपनी ने साल 1962 में कामकाजी लोगों के लिए रबर की फ़्लिप-फ़्लॉप चप्पलें लॉन्च की थीं। यह वही सफ़ेद या नीले रंग की नीली स्ट्रिप वाली चप्पलें थीं जिनका रंग आज भी शायद कोई नहीं भूला होगा। यह हवाई चप्पलों का सबसे पॉपुलर और कॉमन डिज़ाइन है। इसे आमतौर पर लोग आज भी इस्तेमाल करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि ‘हवाइनाज़’ के कारण ही भारत और दुनिया के अन्य देशों में इन चप्पलों को ‘हवाई चप्पल’ कहा जाता है और अगर भारत की बात कि जाए तो, भारत में ‘हवाई चप्पल’ को घर-घर और हर लोगों तक पहुँचाने का काम ‘बाटा’ ने किया, जो ‘हवाइनाज़’ से क़रीब 10 साल पहले ही इन्हें लॉन्च कर चुका था। आपको बता दें तो बाटा कंपनी आज जूते, चप्पलों को बनाने वाली टॉप कंपनियों में शुमार है।

इस तरह आज आपने जाना हवाई चप्पल के इतिहास को और इसका नाम हवाई चप्पल क्यों पड़ा, इसके पीछे की वज़ह क्या थी?

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