गरीब चपरासी की बेटी बनी जज पिता का नाम किया रोशन

समाज

वैसे बेटी तो पराया धन होता है यह हमारा समाज कहता है , लेकिन बेटी भी कुछ काम ऐसा कर जाती है जो बेटे भी नहीं कर पाते। ऐसी बेटिया ही प्रेरणा का स्रोत बनती है। और वो अपने माँ बाप का नाम रोशन करती है। कब किसकी क़िस्मत पलट जाए यह कहना मुश्किल है। लेकिन इसके लिए आपको अपनी क़िस्मत से ज़्यादा अपने मेहनत पर भरोसा रखना चाहिए। अर्चना कुमारी (Archana Kumari) ने भी अपनी मेहनत पर भरोसा रखा, उस समय भी हिम्मत नहीं हारी जब उनके सिर से उनके पिता का साया उठ गया। वह अपनी पढ़ाई जारी रखी और अपने मेहनत के दम पर बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा को पास कर बन गई जज, जिसके बाद चपरासी पिता की बेटी की जगह जज बन गई। अब अर्चना के गाँव में लोग उन्हें जज बिटिया कह कर बुलाते हैं।

पिता सोनपुर रेलवे कोर्ट में थें चपरासी
आपको बता दें तो अर्चना जो पटना के मानिक बीघा गाँव की रहने वाली हैं। अर्चना के पिता जो कि सोनपुर रेलवे कोर्ट में चपरासी थें। अचानक से सन 2005 में उनके पिता की असमय मृत्यु हो गई। जिससे अर्चना पूरी तरह से टूट गई और अकेला महसूस करने लगी। अर्चना अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी है इसलिए उनके पिता की मृत्यु के बाद घर की सारी जिम्मेदारी अर्चना पर आ गई। अर्चना ने अपनी शुरुआती शिक्षा पटना के राजकीय कन्या विद्यालय से पूरी की और पटना यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की।

21 साल की छोटी उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई
जीवन में काफ़ी संघर्षों से गुजरी अर्चना जब ग्रेजुएशन में थी उसी समय उनके पिता का देहांत हुआ। अर्चना को ख़ुद भी बचपन से अस्थमा की समस्या है। लेकिन अपने घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्होंने हार नहीं माना। हौसला से काम लेते हुए उन्होंने कंप्यूटर सीखना शुरू किया और स्कूल में कंप्यूटर की ट्रेनिंग देनी शुरू की। अर्चना घर में सबसे बड़ी थी इसलिए पिता की मृत्यु के बाद उन पर बहुत जल्दी शादी का दबाव भी दिया जाने लगा और शादी का दबाव इतना ज़्यादा बढ़ गया कि सिर्फ़ 21 साल की छोटी उम्र में ही उनकी शादी कर दी गई। शादी के बाद अर्चना को अपने सपने धुंधले पड़ते हुए नज़र आए। लेकिन उनके लकीरों में रुकना नहीं लिखा था इसलिए उन्होंने मेहनत करना जारी रखा।

अर्चना ने बताया कि बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें हर क़दम पर साथ देने वाला पति मिला। अर्चना की शादी 2006 में हुई। जब उनके पति ने उन्हें पढ़ने की इच्छा देखी तो उन्होंने अर्चना का दाखिला पुणे विश्वविद्यालय में करवा दिया जहाँ से अर्चना ने एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। एलएलबी की डिग्री प्राप्त करने के बाद 2011 में अर्चना पटना आ गई। अब यहाँ उनकी ज़िन्दगी एक नए मोड़ पर आ गई जब उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। इस तरह उनकी जिम्मेदारियाँ और भी बढ़ गई। लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को ड्रॉप नहीं किया और एलएलएम (LLM) डिग्री पूरी करने के लिए दिल्ली चली गई और तैयारी करने लगी।

चपरासी पिता और जज की कोठी से मिली प्रेरणा
आगे अर्चना ने बताया कि उनके पिता को एक सर्वेंट क्वार्टर मिला था और उनके क्वार्टर के ठीक सामने जज की कोठी थी। वह अपने पिता को पूरे दिन जज के सामने खड़ा रहते हुए देखा करती थी। कहीं ना कहीं यही बात उनके लिए प्रेरणा बनी कि वह मेहनत करके जज बन सकती हैं और अपने इस प्रेरणा को अर्चना ने सच कर दिखाया, जब उन्होंने 2018 में बिहार न्यायिक सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल की।

इस तरह अर्चना अपने पिता और जज की कोठी से प्रेरणा लेते हुए और साथ ही अपने मेहनत और अपने पति के सहयोग के कारण एक महिला जज बन चुकी हैं।

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