गरीब चपरासी की होशियार बेटी ने परीक्षा में किया टॉप किताबे उधार लेकर पढ़ती थी लड़की

समाज

मुश्किलें चाहे जितनी भी हो हार नहीं माननी चाहिए अपनी गरीबी को अपना हथियार बनाकर बस ज़िन्दगी में आगे बढे चलो और कुछ कर दिखाओ ऐसा की तुम लोगो की प्रेरणा का स्रोत बनो।

किताबें उधार लेकर और यूट्यूब की मदद लेकर की पढ़ाई
महाराष्ट्र की निवासी 16 साल की अपेक्षा काले (Apeksha Kale) के पिता जी का नाम तानाजी बाबूराव काले (Tanaji Baburav Kale) है और जो पेशे से एक चपरासी हैं। पैसे ना होने की वज़ह से अपेक्षा काले किताबें खरीदने में समर्थ नहीं थी ऐसे में उन्होंने परीक्षा की तैयारी करने के लिए प्रैक्टिस पेपर और बुक्स खरीदी नहीं बल्कि, अपने चचेरे भाई और फ़्रेंड्स से उधार लेकर पढ़ाई की। अपेक्षा ने फर्ग्यूसन जूनियर कॉलेज (Forgusson Junior Collage) में साइंस सब्जेक्ट में एडमिशन लिया तथा पूरी लगन से इसकी पढ़ाई शुरू कर दी। अपेक्षा उधार ली हुई किताबों से पढ़ाई किया करती थीं और उसके साथ है यूट्यूब की मदद से भी पढ़कर परीक्षा की तैयारी किया करती थी।

अपना हर काम टाइम पर किया करती हैं अपेक्षा
अपेक्षा के पिता बताते हैं कि उन्हें अपेक्षा को कभी भी यह नहीं कहना पड़ा कि पढ़ाई करने के लिए बैठो, या अध्ययन करो। अपेक्षा ख़ुद ही अपना हर कार्य टाइम पर कर लेती है। वह पढ़ाई में एकाग्र चित्त होकर इतना ध्यान लगाकर पढ़ती हैं कि उन्हें कहना पड़ता है कि बीच-बीच में थोड़ा आराम भी कर लिया करो, सारा टाइम तो पढ़ाई करती हो। अपेक्षा की कुछ हॉबीज भी है जैसे उन्हें गाने सुनने का और साइकिल चलाने का शौक है।

आपको बता दें कि अपेक्षा का एक छोटा भाई भी है जो कि मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम है, लेकिन फिर भी वह पढ़ाई किया करता है। अपेक्षा काले ने बताया कि उन्हें लॉकडाउन के समय में लड़ाई करने में कुछ परेशानियाँ आयी थी अपेक्षा तो उन्होंने सिंगिंग का प्रयास किया। परन्तु जब उनकी परीक्षा का परिणाम आ गया तो छोटा भाई भी बहुत खुश हुआ।

अपेक्षा की सफलता से सबको यह सीख मिलती है कि हमारा बैकग्राउंड और घर की स्थिति चाहे जैसे भी हो, पर मन में दृढ़ निश्चय और लगन हो तो हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है।

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