गरीब पिता, 105 किलोमीटर दूर साइकल चलाकर बेटे को परीक्षा दिलवाने गया, फिर आनंद महिंद्रा ने कहा, “अबसे पूरा पढ़ाई का ख़र्च हमारा”

मां बाप अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए उसके जीवन की शुरुआत से ही चिंतित रहते हैं और चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए। जब बात गरीब वर्ग की आती है तब तो ये चिंता दुगुनी हो जाती है क्योंकि साधनों और पैसों के अभाव में उन्हें बच्चों को पढ़ाई कराने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। इसी सन्दर्भ में आज हम आपको एक गरीब मज़दूर पिता के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने अपने बेटे को परीक्षा दिलवाने के लिए 105 किलोमीटर दूर तक साईकिल चलाई।

10 वीं कक्षा का पेपर दिलवाने साईकिल पर बैठ 105 किलोमीटर तक ले गए पिता

एक गरीब पिता जिनका नाम शोभाराम है, वे मध्यप्रदेश स्थित धार जिले में मजदूरी करके अपना परिवार पालते हैं। उनके बेटे का नाम आशीष है। शोभाराम अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलवाकर उसे बड़ा अफसर बनाना चाहते हैं तथा उसकी पढ़ाई के लिए जो बन पड़ता है करते हैं। आशीष को दसवीं की परीक्षा देने के लिए बहुत दूर जाना था और उसके पास कोई साधन नहीं था तब उसके ज़िम्मेदार पिता ने अपने बेटे को साईकिल प्र बिठाया और उसे परीक्षा दिलवाने 105 किलोमीटर दूर तक चल पड़े। उन्होंने रास्ते में खाने पीने की कुछ चीजें भी बैग में रख लीं। जब वे रास्ते में जा रहे थे तो कई लोगों ने उनकी इस हिम्मत को देखा और तारीफ की।

आशीष का परीक्षा सेंटर उनके निवास स्थान से बहुत दूर आया था और कोरोना महामारी की वज़ह से बसें बन्द होने से वह पेपर देने नहीं जा पा रहा था, इसलिए उसके हिम्मती पिता ने 7 घंटों तक साईकिल चलाकर अपने बेटे को परीक्षा हॉल तक उसके पेपर से 15 मिनिट पूर्व ही पहुँचा दिया।

आनंद महिंद्रा ने कहा वे उठाएंगे इस बच्चे की पढ़ाई का खर्च

शोभाराम की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, उन्होंने किसी से 500 रुपए उधार लेकर अपने परिवार के लिए तीन दिन का राशन जुटाया था। उनकी कई फोटोज़ सोशल मीडिया पर वायरल हो हुईं। जिन्हें देखकर मशहूर बिजनेसमैन आंनद महिंद्रा ने उनकी सहायता करने को कहा। उन्होंने शोभाराम की हिम्मत की दाद दी और यह भी कहा कि अब भविष्य में आशीष की पढ़ाई के ख़र्च का जिम्मा वही उठाएंगे।

शोभाराम भी आंनद महिंद्रा के कृतज्ञ हैं और कहते हैं कि अब वे अपने बेटे को अच्छे से पढ़ा पाएंगे। निश्चय ही वे एक ज़िम्मेदार पिता हैं। आंनद महिंद्रा कि मदद पाकर अब वे अपने बेटे को उच्च शिक्षा दिलवाकर उसके सपनों को पूरा करवा पाएंगे।

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