पिता चलाते थे पान की दूकान और आर्थिक स्तिथि थी बहुत ख़राब बेटे ने IAS बन उनकी सभी परेशानियों को किया दूर

समाज

जीवन में परेशानियों आती जाती रहती है , और यह जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी होती है अगर आप अपनी परेशानियों और परिस्थिति को समझकर चलोगे तो सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी और तुम अपनी ज़िदगी में कभी नहीं हारोगे बस ईमानदारी और मेहनत से सभी कार्यो को करते जाओ सफलता अवश्य मिलेगी।

ऐसे ही कड़ी संघर्ष और मेहनत करने के बाद लखनऊ के ईश्वर कुमार कान्दू (Ishwar Kumar Kandu) की प्रतिभा ने आखिरकार अपना लक्ष्य प्राप्त कर ही लिया। ईश्वर ने जीवन की कई कठिनाइयाँ सहने के बावजूद भी सिविल सेवा कि परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। ईश्वर मेहनत और संघर्ष करने वालों के लिए अब एक उदाहरण बन चुके हैं।

पान वाले का बेटा बना आईएएस
हमारे समाज में ऐसी भ्रांतियाँ हैं कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, IAS का बेटा ही IAS बनता है और छोटा कम करने वाले जैसे मज़दूर का बेटा मजदूर, दुकानदार का बेटा दुकानदार ही बनता है। ऐसे ही तानों के बीच ईश्वर ने भी अपना जीवन यापन किया, उन्हें हमेशा यह सुनने को मिला कि पान वाले का बेटा पान वाला ही बनता है। पर लखनऊ के गणेशगंज में पान की दुकान चलाने वाले शिव प्रसाद गुप्ता के बेटे ईश्वर कुमार कान्दू ने समाज की इस अवधारणा को ग़लत साबित कर दिया।

ईश्वर ने सिविल सेवा कि परीक्षा पास करके आईएएस अफसर बनने के अपने और अपने पिता के सपने को साकार करके दिखा दिया है। ईश्वर की मेहनत को भगवान ने भी देखा और उनका संघर्ष अब फलिभूत हो चुका गया।

यूपीएससी परीक्षा 187 रैंक मिली
ईश्वर कुमार कान्दू ने यूपीएससी परीक्षा में 187वीं रैंक प्राप्त की, जब से सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने की ख़बर ईश्वर के परिवार मिली है पूरे परिवार एवम पड़ोसियों में ख़ुशी का माहौल है। गणेशगंज निवासी ईश्वर ने पाँचवीं से दसवीं कक्षा तक शिक्षा आजमगढ़ के जिले में प्राप्त की, जब वे पांचवी कक्षा में थे तो वे एसडीएम द्वारा सम्मानित भी किये गए थे। दसवीं के मेरिट में उन्हें 18वीं रैंक मिली थी। आगे की पढ़ाई उन्होंने राजधानी लखनऊ के ब्वायज कॉलेज से किया यहाँ उन्होंने इंटर 73 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण किया।

इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नलॉजी से वर्ष 2013 में इन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में बीटेक किया। घर के खराब हालातों के कारण इन्होंने निजी कम्पनी में कार्य करना शुरू कर दिया, साथ ही सिविल्स कि तैयारी भी शुरू रखी। इस संघर्ष में इन्होंने तीन बार असफलता का सामना किया। तीन बार असफल होने के बाद चौथे प्रयास में ईश्वर ने सिविल्स परीक्षा उत्तीर्ण की और अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।

विश्वास और मेहनत से मिली सफलता
ईश्वर 18 अप्रैल को सिविल्स परीक्षा का साक्षात्कार देने के बाद एक दिन के लिए लखनऊ अपने माता पिता से मिलने आये थे। माँ के पूछने पर उन्होंने कहा कि था कि तेरे बेटे को आईएएस बनने से कोई रोक नहीं सकता। परीक्षा का परिणाम आने पर सबसे पहले ईश्वर ने यह जानकारी अपनी माँ को दी। पिता शिव प्रसाद ने बैंक से 3.65 लाख रुपये का लोन लेकर बेटे को पढ़ाई करवाई थी, बेटे की सफलता कि ख़बर सुनकर उनके आंखों से भी आँसू छलक पड़े। पिता ने कहा सालों पहले जो सपना देखा था वह आज साकार हो गया।

ईश्वर के इस मेहनत, संघर्ष और उससे मिली सफलता को देख कर उनके छोटे भाई रामेश्वर गुप्ता ने भी आगे पढ़ाई करने का मन बना लिया है, रामेश्वर अभी इंटर पास करके नौकरी कर रहे थे। ईश्वर के पिता ने कहा इससे पहले उनके परिवार में किसी ने सरकारी नौकरी नहीं की, ईश्वर ने उस रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.