भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन ‘तेजस’ आज डूबने की कगार पर क्यों ,आधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद भी

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भारत के लोग ज्यादातर ट्रैन से सफर करना पसंद करते है। इसका कारण है यहाँ पर मिड्ल क्लास फॅमिली। मिड्ल क्लास फॅमिली ज्यादातर अपनी आमदनी सेव करने में लगे रहते है , ताकि उनका और उनके बच्चो का भविष्य सुरक्षित रहे। इसलिए मिडिल क्लास लोग फ्लाइट से काम और ट्रैन से सफर करना पसंद करते है। एसी के बदले स्लीपर से यात्रा करते है। जितने भी उच्च वर्ग के लोग हैं उनके पास समय की बहुत कमी होती है और इसी वज़ह से वह लोग कम दूरी का सफ़र भी प्लेन के द्वारा करते हैं।

अगर आपको ऐसा लग रहा है कि अचानक ये मध्यमवर्ग, उच्च वर्ग की बातें क्यों होने लगी तो आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं कि हमारे देश में जो प्राइवेट ट्रेन है, जिसका नाम है तेजस (Tejas), वह अब बंद होने के कगार पर पहुँच चुकी है। इसका एक मुख्य कारण है कि इस ट्रेन का किराया बहुत ज़्यादा है जो आम आदमी के बस के बाहर की बात है। वैसे यह ट्रेन तो बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। लेकिन फिर भी यात्री के ना मिलने के कारण इसे बार-बार स्थगित करना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि तेजस ट्रेन लखनऊ से नई दिल्ली तक का सफ़र तय करती थी, जिसकी जिम्मेदारी आईआरसीटीसी (IRCTC) की थी। कोविड-19 के कारण मार्च में ही इस ट्रेन का परिचालन ठप था। फिर इसे 17 अक्टूबर से शुरू किया गया। शुरुआत में तो इसके एडवांस टिकट के आरक्षण के लिए 10 दिन का वक़्त दिया गया लेकिन फिर भी यात्रियों ने उतनी संख्या में रिजर्वेशन नहीं कराएँ तब इसकी मोहलत 1 महीने की फिर बढ़ाई गई। उसके बाद भी जब इसके लिए यात्री नहीं मिले तो इसे फिर से बंद करना पड़ा।

वैसे पहली बार इस ट्रेन का परिचालन लखनऊ से नई दिल्ली के लिए 2019 में किया गया था और इस ट्रेन का अंतिम परिचालन सिर्फ़ 200 यात्रियों के सफ़र के लिए ही हुआ। दुर्भाग्यपूर्ण एक बार फिर इस ट्रेन का परिचालन 23 नवंबर से स्थगित कर दिया गया है। यह कहना उचित नहीं होगा कि सिर्फ़ तेजस ट्रेन का ही यह हाल है बल्कि अन्य कई ट्रेन भी इन स्थितियों से गुजर रही है।

जो कि भाड़ा अधिक होने के कारण लोगों का आना जाना बहुत कम हो चुका है, जिससे ज्यादातर सीटें खाली रह जा रही हैं। शताब्दी-लखनऊ मेल और इसकी तरह अन्य वीआईपी ट्रेन को भी फिलहाल इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। पहले जहाँ हर सेकंड के बाद सीटें फुल हो जाया करती थी वहीं अब सीटों को भरने में कई-कई दिन लग जा रहे हैं।

हमारे भारत के जीडीपी (GDP) में रेलवे का बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि रेलवे से सबसे ज़्यादा कर सरकार को जाता है और अगर यह ऐसे ही ठप पड़ा रहा तो निश्चित ही हमारे देश का विकास बाधित होगा और लोगों के रोजगार पर भी ख़तरा मंडराएगा।

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