भारत के एक गांव के टेक्नीशियन ने बढ़ी समस्या का किया हाल , 500 करोड़ लीटर पानी को बचाकर जीता राष्ट्रिय पुरुष्कार

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कहते है न की साफ़ मन से किया गया काम कभी गलत नहीं होता , बस आप उसे मन से करो दिल लगाकर किसी की परवाह न करो। क्युकी हर छोटा योगदान कब बढ़ा बन जाए हमें इसके बारे में कुछ पता नहीं होता है। आज हम आपको ऐसे अविष्कारक के बारे में बातयेंगे जिसने पुरे गांव की समस्या ही हल करदी और यह कहानी भारत के एक छोटे गांव से है न की विदेश की तो चलिए जानते है। इस तकनीक को बनाने वाले शख्स का नाम है के.जे.अन्तोजी. जिन्होंने पौधों की सिंचाई करते वक्त ऐसी तकनीक खोज निकाली जिससे जमीन के जलस्तर को बढ़ाया जा सकता है. के.जे.अन्तोजी बताते हैं कि “इस तकनीक की मदद से अभी तक तकरीबन 500 करोड़ लीटर बारिश के जल को संरक्षित किया है। इस जल को संरक्षित कर उसका सदुपयोग किया जाता है”।

कौन हैं के.जे.अन्तोजी
के.जे.अंतोजी केरल के कोचीन जिले के चेल्लानाम नामक स्थान पर रहने वाले हैं। अंतोजी एक टेक्नीशियन और छोटे टीवी कारीगर थे। लेकिन आज उनकी एक खोज ने उन्हें पूरे देश में उन्हें अलग पहचान दिला दी है. वो अपने एक आविष्कारक के तौर पर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए थे. यहां तक की सरकार ने भी उनकी सराहना की थी.

‘रेनवाटर सिरिंज टेक्नोलॉजी’ जो बचाएगा पानी
उन्होंने ‘रेनवाटर सिरिंज तकनीक’ की खोज की है। यह वर्षा के पानी को बचाने की ऐसी तकनीक है, जिसके द्वारा बारिश के पानी को समुद्र तल के नीचे एकत्रित करते हैं। इससे जमीन में मौजूद पानी का जलस्तर बढ़ जाता है. बारिश का पानी भी सुरक्षित हो जाता है। उस पानी को हम जरूरत के समय निकाल कर प्रयोग कर सकते हैं। ये एक तरह से टंकी की तरह प्रयोग किया जाता है। जिसमे पानी भर कर बाद में प्रयोग किया जाता है।

समुद्री इलाकों में अधिक कारगर है ये तकनीक
अंतोजी ने बताया कि समुद्री इलाकों में भू-जलस्तर में भारी गिरावट से पानी नमकीन होता जा रहा है। लोगों को पीने योग्य पानी के लिए भारी किल्लत की सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया की अगर हमें पानी को पीने योग्य बनाना है, तो हमें बारिश के पानी को भूजलस्तर तक पहुंचाना होगा। जिससे वह नमकीन जल को बैलेंस कर सकें, और पानी पीने योग्य हो सके। इसके लिए अंतोजी ने ‘रेनवाटर सिरिंज मेथड’ बताया।

क्या है ‘रेनवाटर सिरिंज टेक्नोलॉजी’
इस तकनीक में सबसे पहले एक 6 मीटर गड्ढा किया जाता है। उसके बाद इसमें 3 मीटर तक नदी की बालू को डाल दिया जाता है, जो की फिल्टर का काम करता है। इसके ऊपर एक टैंक बनाया जाता है, जिसमें पानी एकत्रित होकर प्रेशर द्वारा जमीन के नीचे चला जाता है।

गांव के इलेक्ट्रिक टेक्नीशियन की 500 करोड़ लीटर पानी बचाने की अनोखी तकनीक, मिला राष्ट्रीय पुरस्कार 1
गड्ढे को नीचे एक वॉल्व में लगाया जाता है। जिसको मोटर से जोड़ दिया जाता है। इस प्रकार से सिरिंज की मदद से पानी जमीन के 60 से 70 फीट नीचे चला जाता है। जब भी पानी आवश्यकता होती है, तो मोटर से पानी निकाल लिया जाता है। इससे भूजलस्तर में भी वृद्धि होती है। अंतोजी ने अब तक करीब 400 से अधिक यूनिट लगवा दिए हैं। उनके इस कार्य से करीब 500 करोड़ लीटर से अधिक पानी संरक्षित हो चुका हैं।

पौधों को पानी देते समय आया अनोखा आइडिया
अंतोजी में कहा कि इस खोज के लिए उन्होंने कोई किताब नही पड़ी। वह एक रोचक के किस्सा सुनाते है , वह बताते हैं की एक बार वह पाइप से पौधों को सींच रहे थे। घर में टेलीफोन की घंटी बजी. उन्होंने पाइप छोड़ दिया और टेलीफोन पर बात करने चले गए। वापस आकर देखते हैं,तो पाइप का सिरा जमीन में धँस गया और उसमें से पानी निकल रहा था।

गांव के इलेक्ट्रिक टेक्नीशियन की 500 करोड़ लीटर पानी बचाने की अनोखी तकनीक, मिला राष्ट्रीय पुरस्कार 2
उनके खुराफाती दिमाग में एक आइडिया आ गया. उन्होंने पानी के प्रेशर से 8 फीट गड्ढा कर पानी को दोबारा से उस गड्ढे में गाड़ दिया। अब पानी जमीन में ही जा रहा था। उन्होंने फिर सोचा कि क्यों न बारिश के पानी का सदुपयोग किया जाए. इसके बाद उन्होंने ये तरीका खोज निकाला. पानी संरक्षण का उनका ये प्रयास सफल रहा |

कम दाम में लग जाता है ये सिस्टम
अंतोजी बताते है कि उन्होंने इस सिस्टम की कीमत कम से कम रखने की कोशिश की है। इन्होंने बताया है इस काम में मोटर, पीवीसी पाइप आदि की जरूरत है और इस हिसाब से हम इस सिस्टम को 3000 रुपए/मीटर की दर से रखी है। इस सिस्टम को करीब 10 मीटर गहरा लगवाना पड़ता है. इस आधार पर इसका कुल खर्च करीब 30000 के आसपास आ जाता है।

इन्होंने बताया कि मैं ये सिस्टम 30 साल से प्रयोग कर रहा हूँ। हमें इस सिस्टम को लगाने में कोई शिकायत नहीं आई है। इस सिस्टम में समय के साथ सुधार कर किया जा रहा है। इनका यह आविष्कार तटीय राज्यों जैसे महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गुजरात में काफी प्रभावी साबित हुआ है।

आविष्कार के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
अंतोजी की इस अनोखी खोज के लिए उन्हें साल 2009 में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। पुरस्कार मिलने के बाद अंतोजी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे। अब वह अलग करने की कोशिश करने में लगे रहते हैं।

अंतोजी बताते है कि ” जल का उनके जीवन में भी बहुत महत्व है और जल आम आदमी की तरह होता है, वह उनसे बात करता है। मैं भी उनकी बात सुनता हूँ।” पानी मेरे जीवन में एक मित्र की तरह है। उन्होंने लोगों को पानी के सदुपयोग करने की सलाह दी। वह अब लोगों को पानी के महत्व के बारे में बताते है। अब भी कई तरह के प्रोजेक्ट में लगे है जिससे पानी को बचाया जा सके। आज उनकी यह खोज कई लोगों के जीवन मे बदलाव ला चुकी है।

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