मां घर में करती है सिलाई का काम पिता बेचते थे चाय दोनों बेटे को हुआ आईआईटी में सिलेक्शन…….

समाचार समाज

व्यक्ति के अंदर प्रतिभा होती है उसे किसी भी पहचान की आवश्यकता नहीं होती ऐसा हमने कई बार देखा है जब भी कोई व्यक्ति कठिन परिश्रम करता है। तो उसको उसकी कठिनाइयों से सफलता का परिणाम जरूर मिलता है और इसी बात को साबित किया है मुदित और उनके छोटे भाई मनीष गुप्ता ने दोनों भाइयों ने अपने मां-बाप का सीना गर्व से भुला दिया है। और आईआईटी के पेपर क्लियर कर इतिहास रच दिया है।

चंदौसी के रहने वाले मुदित और मनीष गुप्ता दोनों भाइयों ने आईआईटी जेईई में सफलता पाकर एक नया इतिहास रच दिया है। इनके पिता उमेश गुप्ता चंदौली में ही सीता रोड पर गणेश मंदिर के सामने चाय की दुकान चलाते हैं और इसी चाय की दुकान के बदौलत उन्होंने अपने बेटों को पढ़ाया और उनके बड़े बेटे मुदित गुप्ता का सेलेक्शन 2018 में JEE में हो गया और साथ ही साथ सोमवार को JEE के रिजल्ट में उनके छोटे बेटे ने भी IIT में सफलता पाई।

पने दोनों बच्चों की मेहनत और सफलता पर ख़ुशी जाहिर करते हुए उमेश गुप्ता बताते हैं कि मेरा शुरू से ही सपना था कि मैं अपने बच्चों को इतना पढ़ाऊ लिखाउ कि वह अपनी ज़िन्दगी में कुछ अच्छा कर सके। आज मेरा ये सपना सच हो गया। उन्होंने बताया कि मैं ख़ुद बीकॉम किया हूँ।

लेकिन किसी कारण वश आगे की पढ़ाई न कर सका। उमेश गुप्ता शुरू से ही अपने पिता के साथ यानी (मुदित और मनीष के दादा जी) चाय की दुकान, घर के भरण-पोषण के लिए संभालने लगे। वर्तमान में वह किराए की दुकान में क़रीब ग्यारह साल से चाय बेच रहे हैं। अभी कुछ सालों पहले उनके पिता का निधन हो गया। उसके बाद उमेश गुप्ता ने ही दुकान संभाली।

दोनों भाइयों ने आरआरके स्कूल चंदौसी से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की है और उसमें अव्वल भी रहे हैं। बड़े भाई मुदित ने वर्ष 2018 में JEE की परीक्षा पास करने के बाद अभी आईआईटी खड्गपुर में अध्ययनरत हैं और सोमवार को जब जेईई-एडवांस का रिजल्ट आया तो उसमें मुदित के छोटे भाई मनीष ने भी सफलता हासिल कर ली और इसी के साथ दोनों भाई बन गए आईआईटियन।

उनकी माँ यानी उमेश गुप्ता कि पत्नी ऊषा, घर में ही सिलाई का काम करती हैं। पैसों की कमी के बावजूद भी मुदित और मनीष के माता-पिता ने कभी पढ़ाई के साथ समझौता नहीं किया।

इतनी बड़ी सफलता हासिल करने के बाद उनके माता-पिता अपने बच्चों की मेहनत के साथ ही स्कॉलर्स डेन के विवेक ठाकुर का भी शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने उनके बच्चों का भरपूर सहयोग किया है। संस्थान के निदेशक विवेक ठाकुर ने भी दोनों भाइयों की सफलता पर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ दी हैं।

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