मां ने अपने “गहने बे’चकर” कराई थी बेटे को पढ़ाई, बेटे ने IFS ऑफिसर बन ,दिलाया मान-सम्मान……………………..

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पुरानी बुजुर्गों की कहावत है कि “लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है” यह अनमोल शब्द कहे गए हैं सोहनलाल त्रिवेदी द्वारा जिन्हें भारत देश का लगभग हर एक व्यक्ति जानता होगा और इन पंक्तियों का मतलब भी अच्छे से समझता होगा मुश्किल समय में हिम्मत हारे बगैर जो परिश्रम करता है उसे अपने जीवन में एक ना एक दिन सफलता अवश्य मिलती है लेकिन बस शर्त यह होती है कि उसे कभी भी किसी परेशानी में डरना नहीं चाहिए और अपने लक्ष्य से कभी भी भटकना नहीं चाहिए। उसी कहावत को सेट कर दिखाया है आईएएस ऑफिसर बाला मुरूगन ने जिन्होंने लोगों के सामने एक उदाहरण पेश किया है।

बलमुरूगन एक मध्यम परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिन्होंने बचपन में आर्थिक संकट भी देखे हैं और उनका परिवार आर्थिक कमजोरीथी उनके पिता नशा करते थे और परिवार में करीब 8 से 10 लोग थे जिनका खर्चा उठा ना होता था। यह एक बड़ी समस्या थी उस समय है ऐसे में उनको पेपर बेचने पड़ा और अपने जीवन में बुरे से बुरे हालातों का सामना करना पड़ा ,लेकिन उन्होंने सभी हालातों से डटकर सामना किया और कभी भी अपनी पढ़ाई के साथ समझौता नहीं होने दिया और अपनी इसी कठिन परिश्रम और लगन की बदौलत जब उन्होंने यूपीएससी जैसे कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू करी और उसमें सफलता हासिल करें लोगों के लिए कीर्तिमान स्थापित कर दिया।

उस वक्त पढ़ाई का खर्च उठा पाना बेहद मुश्किल था क्योंकि उनकी पारिवारिक स्थिति भी बेहद कमजोर थी और अपनी पारिवारिक कमजोरी के कारण बाल मुरुगन ने मात्र 9 साल की उम्र से ही अखबार बेचना शुरू कर दिया जिससे वहां मात्र ₹300 कमाते थे और अपने स्कूल की फीस भरा करते थे। अख़बार बेचना उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट था क्योंकि अखबार बेचते वक्त धीरे-धीरे उन्हें अखबार पढ़ने का शौक हो गया और धीरे-धीरे इसी प्रकार से उनका जीवन आगे बढ़ता रह। उन्हें आईएएस ऑफिसर बनने का रुझान पैदा हुआ और उन्होंने उसे पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत करिए अपने जीवन में और सफलता अर्जित करी।

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