” मारी छोरी किसी छोरे ते कम है के ” यह मिसाल बन रही है हरियाणा की एक लेडी किसान जो 11 साल से पिता की मौत के बाद घर संभाल रही है

समाज

दंगल मूवी का यह डायलॉग की ” मारी छोरी किसी छोरे ते कम है के ” असल ज़िन्दगी में भी देखने को मिलता है क्युकी यह वाकय में सच है की हमारे समाज की लड़कियां भी लड़को से कम नहीं है किसी भी मामले में , अब वह हर क्षेत्र में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है चलिए आपको हरियाणा की एक लड़की की कहानी बताते है

सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन के साथ-साथ हरियाणा की गलियों से 29 साल की अमरजीत कौर की चर्चा भी काफ़ी जोर-शोर से चल रही है। आपको बता दें तो अमरजीत कौर जब 18 साल की थी उसी समय उनके पिता काफ़ी बीमार हो गए जिसके कारण वह खेती कर पाने में सक्षम नहीं थे और उसी ने उनका पूरा परिवार खेती पर ही आश्रित था। आमदनी का दूसरा कोई ज़रिया नहीं था। तब अमरजीत ने हिम्मत हार कर सब कुछ छोड़ देने के बजाय ख़ुद से खेती करने का फ़ैसला लिया। उसके बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उन पर ही आ गई और अब तक वह अपनी जिम्मेदारियों का वाहन काफ़ी अच्छे से कर रही हैं।

अमरजीत की मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि उनका भाई अच्छे से पढ़ सका जो आज सरकारी नौकरी कर रहा है। अब तो अमरजीत खेती करने में इतनी एक्सपर्ट हो गई हैं कि गाँव के सारे किसान भी उनसे खेती के बारे में पूछने आते हैं कि किस मौसम में कौन-सी फ़सल लगाई जाए और किस खाद का इस्तेमाल खेती के लिए किया जाए जिससे फसलों की पैदावार अच्छी हो।

अमरजीत के पिता जब 2007 में बीमार होकर पूरी तरह बिस्तर पर आ गए तब से आज तक लगातार अपने मेहनत के दम पर ही अमरजीत खेती को इतना आगे बढ़ा पाई हैं। वह रोज़ सुबह 5: 00 बजे उठ जाती थी और खेत जाकर पशुओं को चारा देती थी और पूरे दिन खेतों में लगी रहती थी। वह बहुत छोटी उम्र से ही फ़सल को बोलने लगी थी और फ़सल पकने के बाद उसे ख़ुद से काटती भी थी और तो और उसके बाद वह उसे मंडी में ले जाकर बेचा भी करती थी। यही कारण है कि अमरजीत कौर को सारे लोग ‘लेडी किसान’ के नाम से भी जानते हैं

खेती में इतनी मेहनत करने के बावजूद भी अमरजीत ने अपनी पढ़ाई बाधित नहीं होने दी और पंजाबी से MA की डिग्री हासिल की। उन्होंने खेती के साथ-साथ घर के कामों पर भी पूरा ध्यान दिया वह ट्रैक्टर भी चला लेती है और पशुओं को चारा भी देती हैं अब तो अमरजीत ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत भी कर चुकी हैं।

अमरजीत कौर के इस मेहनत लगन और काम को देखते हुए “यूनाइटेड स्टेट अमेरिका के एक डेलिगेशन” भी उनसे मिलने आए और उनके काम की काफ़ी प्रशंसा की। उस डेलिगेट ने अमरजीत से खेतों में डाले जाने वाले पेस्टिसाइड्स, बीज, फसल, मंडीकरण इन सबके बारे में सारी जानकारी इकट्ठी की।

आज के समय में हरियाणा की अमरजीत कौर अपने खेती में काफ़ी आगे बढ़ चुकी हैं। खेती में वह इतनी दक्ष हो चुकी हैं कि बड़े-बड़े किसान भी उनसे मिलने आते हैं और खेती के बारे में जानकारियाँ हासिल करते हैं।

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