रुद्राक्ष पहनना होता है निजी जीवन के लिए लाभदायक जानिये क्यों

समाज

रुद्राक्ष का अर्थ है – रूद्र का अक्ष , माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रुओं से हुई है. रुद्राक्ष को प्राचीन काल से आभूषण के रूप में,सुरक्षा के लिए,ग्रह शांति के लिए और आध्यात्मिक लाभ के लिए प्रयोग किया जाता रहा है ,हिंदू धर्म में रुद्राक्ष की खास अहमियत होती है। इसे अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष के लिए फायदेमंद माना जाता है। प्रथा है रुद्राक्ष महादेव के आंसुओं से निर्मित हुआ है। कहा जाता है कि इसे धारण करने वाले पर हमेशा महादेव की कृपा बनी रहती है। उसको कभी नकारात्मक शक्तियां परेशान नहीं करतीं। घर परिवार में सुख, शांति तथा संपन्नता बनी रहती है। वैसे तो रुद्राक्ष कई तरह का होता है तथा प्रत्येक रुद्राक्ष की अपनी अलग अहमियत है। किन्तु आज हम आपसे बात करेंगे दोमुखी रुद्राक्ष की। ये रुद्राक्ष अर्द्धनारीश्वर का रूप माना जाता है। प्रथा है कि इसे धारण करने वाले पर महादेव तथा माता पार्वती दोनों की कृपा बनी रहती है तथा वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।

दोमुखी रुद्राक्ष पहनने के लाभ:-

1- दोमुखी रुद्राक्ष आत्मविश्वास बढ़़ाता है। इसके प्रभाव से मनुष्य के कार्यों तथा उसके शब्दों में गंभीरता आती है तथा वो लोगों पर सरलता से अपना प्रभाव बना लेता है।

2- दोमुखी रुद्राक्ष का रिश्ता चंद्रदेव से भी माना जाता है। ये दिमाग को शांत करता है तथा शीतलता प्रदान करता है। इसे पहनने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। जिन व्यक्तियों का मन अक्सर विचलित रहता है, या क्रोध बेहद आता है, उन्हें इसे धारण करना चाहिए।

3- शिव महापुराण के मुताबिक, इस रुद्राक्ष को पहनने से ब्रह्म हत्या तथा गो हत्या जैसे पापों से मुक्ति प्राप्त होती है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा होता है, इस राशि वालों को दोमुखी रुद्राक्ष अवश्य पहनना चाहिए।

4- इस रुद्राक्ष की माला पहनने से पारिवारिक जीवन सुखी होता है। इच्छाएं जल्द पूरी होती हैं।

5- यदि आपसे जाने-अनजाने किसी प्रकार का पाप हुआ है, तो रुद्राक्ष की माला पहनने से आपके पाप कट जाते हैं तथा आपका जीवन बेहतर हो जाता है।

6- अगर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है तो ये रुद्राक्ष धारण करने से स्थिति बेहतर होती हैं तथा दांपत्य जीवन कुछ ही दिनों में सुखद हो जाता है।

7- माला के असर से भूत-प्रेत, बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। मन में किसी तरह का भय नहीं रहता। मनुष्य का मन सत्कर्म की तरफ अग्रसर होता है।

8- वैसे तो दोमुखी रुद्राक्ष की उत्पत्ति इंडोनेशिया, नेपाल तथा भारत देश के कई इलाकों में होती है, किन्तु नेपाल का दोमुखी रुद्राक्ष सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

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