बिना हिम्मत हारे पतियों का साथ छूटने के बाद दोनों बहनों ने इस तरह संवारा जीवन

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हम जानते हैं कि बहुत से ऐसे व्यक्ति हैं जो मुश्किल समय में आत्मसमर्पण कर देते हैं और प्रगति नहीं कर पाते हैं। और फिर भी कुछ व्यक्ति मुश्किलों में भी कठिन परिश्रम से उन्नति करते हैं। आज हम आपको दो ऐसी बहनों के बारे में बताएंगे जो आज कुछ लोगों के लिए उनकी प्रेरणा बन गई हैं। इनके नाम नीति और उर्वशी हैं, जो उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। दोनों ने अपने दैनिक जीवन में अनेक समस्याओं का सामना किया है। बताया जा रहा है कि एक बहन अपने ससुर से बिछड़ गई और दूसरी की जान चली गई, ऐसे में भी दोनों ने सरेंडर नहीं किया और एक-दूसरे के सहारा बन गए और आज एक हो गए हैं कुछ व्यक्तियों के लिए प्रेरणा का स्रोत। आज हर कोई उनके इस प्रयास की तारीफ भी कर रहा है.

शादी के कुछ लंबे समय के बाद, दोनों के सिर पर असुविधा आ गई

हमें इस बात का अंदाजा नहीं है कि जीवन में अगले पल क्या होगा, फिर भी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें कभी भी परेशान नहीं होना चाहिए। दरअसल, आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी उपलब्धि का एक और लेखा-जोखा बनाया है। दरअसल, आज भी दो ऐसी बहनों की कहानी है, जिन्होंने अकेले ही एक किरदार निभाया है। हर कोई दोनों की आत्मा और क्षमता की तारीफ कर रहा है. इनके नाम उर्वशी और नीति हैं और दोनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। आज दोनों अपने-अपने खान-पान से धीरे-धीरे अपना घर चला रहे हैं।

हालांकि दोनों बहनों के लिए यह मुश्किल था, लेकिन उन दोनों ने अपने दैनिक अस्तित्व में कई चुनौतियों का सामना किया है। आपको बता दें कि उर्वशी की शादी के कुछ लंबे अरसे के बाद उनकी प्रेमिका ने एक दुर्घटना में बाल्टी को लात मार दी। साथ ही शादी के कुछ समय बाद नीति भी अलग हो गई। ऐसे में दोनों बहनों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा। साथ ही पिता पहले जा चुके थे और इस बीच उनकी मां ने भी बाल्टी लात मारी। हालांकि, ऐसे में भी उर्वशी और नीति ने सरेंडर नहीं किया।

पहले शुरू हुआ टिफिन प्रशासन

आपको बता दें कि जब इन दोनों के साथ ऐसा हुआ था तब ये दोनों अपनी मौसी के यहां आए थे. वह भोपाल में रहती थी। यहां उन्होंने किराए के मकान से टिफिन प्रबंधन भी शुरू किया। ऐसे में धीरे-धीरे उनका यह काम भी सकारात्मक रूप से चल रहा था। हर कोई उसके द्वारा व्यवस्थित भोजन को भी पसंद कर रहा था और वह उसमें से एक टन खरीद रहा था। बहरहाल, इस बीच देश में प्लेग की दस्तक हो गई, जिससे दोनों का यह काम भी ठप हो गया। ऐसे में उनका काम पूरी तरह से ठप हो गया। दरअसल, ऐसी स्थिति में भी उर्वशी और नीति ने न तो आत्मसमर्पण किया और न ही खुद को कमजोर होने दिया। जब सब कुछ बंद था, उर्वशी घर पर कवर और ब्रेड की दुकान का खाना बनाने लगी। धीरे-धीरे उन दोनों का यह काम भी अच्छे तरीके से चलने लगा।

शुरू हुआ खुद का खाना धीमा

इसके बाद धीरे-धीरे देश में भी हालात जस के तस होने लगे। इसके तुरंत बाद दोनों बहनों ने बाहर जाकर काम करने का फैसला किया। इसके लिए दोनों ने अपना-अपना खाना धीमा करना शुरू कर दिया। इस फूड स्लोडाउन की शुरुआत उर्वशी ने भोपाल में ही की थी। कहा जाता है कि जब उनका टिफिन प्रशासन रुका तो वे अपने घर में खाने के लिए उत्सुक हो गए थे फिर भी दोनों ने सरेंडर नहीं किया। दोनों ने अपने खाने की धीमी गति से रोड फूड बेचना शुरू किया। दोनों ने अपने स्लो डाउन को ट्रायल ऑफ दिल्ली बताया।

दरअसल, उन दोनों के पास दुकान को पट्टे पर देने के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में उन्हें नसीहत मिली कि वह दुकान के आगे धीमी गति से दौड़ें। दोनों ने ऐसा ही किया। इस स्लोडाउन को शुरू करने के लिए उर्वशी और नीति को अपने साथियों से कुछ पैसे भी मिले थे। इसके बाद ही उन्होंने यह काम शुरू किया।

यह मंदी अच्छी कमाई कर रही है

आपको बता दें कि दोनों धीमी गति से छोले कुलचे, मूंग दाल चीला, दाबेली, मैगी और बिरयानी जैसे व्यंजन बेच रहे हैं। वह वर्तमान में इस काम से अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। दोनों इस काम से रोजाना 1 हजार तक की खरीदारी करते हैं। लोग भी बिना किसी शक के उनके हाथ का ट्रायल पसंद कर रहे हैं। दोनों ने बताया कि भले ही अभी बाजार नीचे है, लेकिन उन्हें इतना अधिक लाभ मिलता है कि घर की कीमत बहुत ज्यादा चल रही है। साथ ही इस समय हर कोई दोनों की आत्मा को पहचान रहा है।

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