कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए नाग पंचमी के दिन जरूर करें यह प्रार्थना

ज्ञान धार्मिक

ऋषि मुनियों का यह मानना है कि इस वर्ष जो नाग पंचमी आने वाली है वह काफी शुभ संकेत दे रही है इस नागपंचमी के दौरान जो भी भक्त सच्चे मन हृदय से नाग देवता के प्रमुख का पूजन अर्चना करेगा। उसकी सभी मुरादें पूरी होंगी और उसे सर्प दोष से भी मुक्ति जरूर मिलेगी बस उसे ध्यान से और अपने सब्र का बांध टूट नहीं देना है और अपने भक्ति से देवता को प्रसन्न करना है। यह दिन नाग देवताओं के पवित्र स्मरण के साथ शुरू करना चाहिए क्योंकि यह बेहतरीन शुरुआत होती है. इसी के साथ ऐसा मना जाता है जब प्रत्यक्ष नाग देवता की पूजन कर रहे हों, तब सभी नागों का नाम लेना शुभ होता है. जी दरअसल ऐसा करने से कालसर्प योग में भी राहत मिलती है. नागपंचमी के दिन नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाना चाहिए. अब इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर उन पर गंध, पुष्प, धूप व दीप से पूजन करें तथा सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए. उसके बाद यह प्रार्थना करना चाहिए.

प्रार्थना –
सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले.
ये च हेलिमरीचिस्था येन्तरे दिवि संस्थिता..

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:.
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:..
प्रार्थना के बाद नाग गायत्री का जप करें-
ॐ नागकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्.

सर्प सूक्त का पाठ-

ब्रह्मलोकुषु ये सर्पा: शेषनाग पुरोगमा:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखादय:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
कद्रवेयाश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..

इंद्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखादय:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखादय:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..

पृथिव्यांचैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
ग्रामे वा यदिवारण्ये ये सर्पा प्रचरन्ति च.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..

समुद्रतीरे ये सर्पा ये सर्पा जलवासिन:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..
रसातलेषु या सर्पा: अनन्तादि महाबला:.
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीता: मम सर्वदा..

कहा जाता है ऐसा पूजन करने से नाग देवता खुश हो जाते हैं और काल सर्प दोष भी कम हो जाता है.

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