क्या आप जानते हैं ? आखिर शनिदेव को क्यों चढ़ाया जाता है तेल

ज्ञान धार्मिक

यह बात तो सभी को पता होगी कि भगवान शनि को न्याय का देवता कहा जाता है वह हर एक व्यक्ति के पाप तथा पुणे का फल उसे इसी जन्म में दे देते हैं और किसी की मौत और जीवन का निर्णय भी वह स्वयं ही करते हैं। इस बात से तो हर व्यक्ति अवगत ही होगा लेकिन शनिदेव का नाम लेते हैं बहुत से लोग डरने लगते हैं क्योंकि उनके साढ़ेसाती से हर व्यक्ति को डर लगता है क्योंकि अगर आपकी राशि में साढ़ेसाती प्रवेश कर जाती है तो आपका जीवन जीना दूभर हो जाता है। शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैय्या से बचने तथा शनिदेव को खुश करने के लिए भी तेल से अभिषेक किया जाता है। किन्तु क्या आप जानते हैं कि शनिदेव को तेल चढ़ाने से वे खुश क्यों होते हैं। इसके पीछे दो पौराणिक कथाएं मिलती हैं किन्तु दोनों ही कथाएं हनुमान जी से सबंधित हुई हैं।

कथा के मुताबिक शनिदेव को भी एक बार अपने पराक्रम तथा बल पर घमंड हो गया था। वह रामायण काल का वक़्त था। हनुमान जी के बल तथा यश की कीर्ति चारों तरफ फैली थी। शनि को जब इस बारे में ज्ञात हुआ तो उन्होंने हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा, किन्तु हनुमान जी उस वक़्त प्रभु श्री राम की भक्ति में लीन थे। इसलिए उन्होंने आक्रमण करने से मना कर दिया पर शनिदेव के बार-बार ललकारने पर अंततः दोनों के मध्य भयंकर युद्ध हुआ। किन्तु शनिदेव युद्ध में हार गए। युद्ध में हनुमान जी द्वारा किए गए प्रहारों की वजह से शनिदेव को तीव्र कष्ट हो रहा था। तब हनुमान जी से उन्हें तेल लगाने को दिया जिससे उनका कष्ट शांत हो गया। कहते हैं कि तभी से शनिदेव को तेल चढाने से वे खुश होते हैं।

वही इस सिलसिले में एक और कथा मिलती है जिसके मुताबिक जब प्रभु श्री राम की सेना ने सागर पर सेतु बना लिया। तब उसे कोई राक्षस नुकसान न पहुंचाए इसलिए राम जी ने सेतु की निगरानी की जिम्मेदारी पवनसुत हनुमान को सौंपी। उस वक़्त हनुमान जी राम जी की भक्ति कर रहे थे। तभी वहां पर शनि देव ने हनुमान जी के बल को ललकारते हुए उनसे युद्ध करने को कहा। हनुमान जी ने विनम्रता पूर्वक कहा कि मैं इस वक़्त अपने प्रभु का ध्यान कर रहा हूं कृप्या बाधा मत उत्पन्न कीजिए। अतः आप यहां से चले जाइए। किन्तु शनि देव की हठ की वजह से हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ में लेपट कर कस दिया तथा सेतु के पत्थरों पर पूंछ को पटकना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से शनिदेव का शरीर लहुलूहान हो गया तथा उन्हें कष्ट होने लगा। तब शनिदेव ने हनुमान जी से बंधन मुक्त करने की कामना की। हनुमान जी ने उनके कष्ट को दूर करने के लिए तेल दिया। जिससे उनके घावों की पीड़ा में राहत मिली।

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