क्या को पता है नर्मदा और शिव जी के बीच में आखिर क्या संबंध है

ज्ञान धार्मिक

सावन का पावन पर्व चल रहा है ऐसे में आपने इस पावन पर्व के मध्य में अनेकों खाने सुनी होंगी शिवजी से जुड़ी हुई। जिसे सुनकर आपका हृदय बहुत ही ज्यादा प्रफुल्लित हो उठा होगा इस पावन पर्व में शिव भक्त बड़े ही कृतज्ञ मन से भगवान शिव जी का पूजन और अर्चना करते हैं और अपने देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने का हर भर तक प्रयास करते हैं ताकि वह किसी तरीके से अपने आराध्य को मना सके।अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं सावन के महीने में माँ नर्मदा और शिव जी से जुडी कथा.

पौराणिक कथा – नर्मदा नदी को भगवान शिव की पुत्री कहते हैं इस वजह से वह शांकरी कहलाती हैं. लोक कल्याण के लिए भगवान शंकर तपस्या करने के लिए मैकाले पर्वत पर गए थे. उस समय उनकी पसीनों की बूंदों से इस पर्वत पर एक कुंड का निर्माण हुआ. कहा जाता है इसी कुंड में एक बालिका उत्पन्न हुई और उसका नाम पड़ा शांकरी अर्थात नर्मदा. जी दरअसल शिव ने आदेश दिया कि वह एक नदी के रूप में देश के एक बड़े भूभाग में रव (आवाज) करती हुई प्रवाहित होंगी. वहीं रव करने के कारण उनका एक नाम रेवा भी कहा जाता है. जी दरअसल मैकाले पर्वत पर उत्पन्न होने के कारण वह मैकलसुता के नाम से भी मशहूर हैं.

एक अन्य कथा – चंद्रवंश के राजा हिरण्यतेजा को पितरों को तर्पण करते हुए यह अहसास हुआ कि उनके पितृ अतृप्त हैं. उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की तथा उनसे वरदान स्वरूप नर्मदा को पृथ्वी पर अवतरित करवाया. भगवान शिव ने माघ शुक्ल सप्तमी पर नर्मदा को लोक कल्याणर्थ पृथ्वी पर जल स्वरूप होकर प्रवाहीत रहने का आदेश दिया. नर्मदा द्वारा वर मांगने पर भगवान शिव ने नर्मदा के हर पत्थर को शिवलिंग सदृश्य पूजने का आशीर्वाद दिया तथा यह वर भी दिया कि तुम्हारे दर्शन से ही मनुष्य पुण्य को प्राप्त करेगा. इसी दिन को हम नर्मदा जयंती के रूप में मनाते है. आप जानते ही होंगे नर्मदा जयंती पर जबलपुर के अतिरिक्त नर्मदा तटों में भक्तों की भीड़ लगी रहती है. इसी के साथ अमरकंटक, मण्डला ,होशंगाबाद , नेमावर और ओंकारेश्‍वर में भी नर्मदा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं को भारी संख्या में देखा जाता है जो वहां आकर नर्मदा नदी का दर्शन करते हैं.

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