छोड़ी थी “24 लाख” की नौकरी गांव में खेती शुरू करने के लिए आज कमा रहे हैं लगभग 2 करोड़ रुपए का मुनाफा

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इन दिनों आमतौर पर सभी युवा यही करते हैं कि जब उन्हें डिग्री मिल जाती है तो आज सबसे पहले अच्छी नौकरी की होड़ में लग जाते हैं और नौकरी मिलने के बाद उनका उद्देश्य होता है कि वह जीवन में सेटल हो जाए या तो फिर उन्हें विदेश जाने का मौका मिलता है तो वह लोग वहां चले जाते हैं आज के आधुनिक युग में हर एक युवा का यही सपना है कि उसे अच्छी नौकरी मिल जाए जिसके जरिए वह अच्छे तरीके से अपना जीवन व्यतीत कर सके और शानदार घर ले सके अपने जीवन में और सभी सुख-सुविधाओं के साथ अपने जीवन का लाभ उठा सकते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि इस तरह के तमाम सुविधाओं को प्राप्त 9:00 से 5:00 की नौकरी करने के बाद ही मिल सके अगर आपके मन में कुछ करने की चाहो तो आप इसे अपनी मेहनत के बदौलत भी हासिल कर सकते हैं जिसने आपको किसी के हुकुम सुनने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आप अपने खुद के बिजनेस के मालिक होंगे ऐसा ही कुछ कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के रहने वाले सचिन काले ने जिन्होंने अपने आईडिया के चलते दो करोड़ की कमाई कर रहे हैं हर साल और अपने जीवन को व्यतीत कर रहे है।

सचिन काले के जीवन की कहानी

सचिन काले छत्तीसगढ़ के एक छोटे से जिले बिलासपुर के रहने वाले हैं जो अपने पति और बच्चों के साथ साथ एका रामदेव जीवन व्यतीत कर रहे हैं जिसकी लगभग हर एक व्यक्ति कल्पना करता है उन्होंने भी यह मैकेनिकल में इंजीनियरिंग और फाइनेंस में एमबीए एलएलबी और इकोनॉमी में पीएचडी की डिग्री हासिल करें जिस बात से याद जाहिर होता है कि वह पढ़ाई लिखाई में कितने अच्छे थे क्योंकि इतनी सारी डिग्री लेने के बाद सचिन काले को एक अच्छी सी नौकरी मिलना तो लाजमी सी बात है सचिन की पहली नौकरी सन 2013 में नागपुर शहर में लगी थी।

जिसमें लगभग 2 साल तक उस कंपनी ने काम किया और उसके बाद उन्होंने निर्णय किया कि वह एक नई कंपनी को ज्वाइन करेंगे सन 2005 में सचिन काले को पुणे की एक कंपनी में सालाना 1200000 का पैकेज मिला था जो उस समय के हिसाब से बहुत ही ज्यादा अच्छा ऑफर था कुछ सालों तक पुणे में नौकरी करने के बाद भी सचिन काले को आत्मा मन संतुष्टि नहीं मिली और उन्होंने दिल्ली की कंपनी से ऑफर आया या उन्हें सालाना ₹2400000 का पैकेज मिल रहा था तो सचिन के पास उस ऑफर को ठुकरा ने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि उनको इतने अच्छे पैसे मिल गए थे साथ ही साथ वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए दिल्ली में नौकरी करते हुए सचिन के पास जिंदगी जीने के लिए जरूरी गाड़ियां और कुछ जो व्यक्ति अपने जीवन में कल्पना करता है सचिन काले 9 से 5 की नौकरी और रोजमर्रा के काम से निराश हो चुके थे उनका मन कहीं नहीं लग रहा था क्योंकि वह अपनी जिंदगी में कुछ अलग करना चाहते थे और अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे।

24 लाख की नौकरी छोड़ शुरू करी थी खेती

सन 2014 में सचिन काले ने अपनी नौकरी छोड़कर खेती करने का बहुत ही ज्यादा अहम निर्णय लिया था लेकिन सचिन के इस फैसले से उनके माता-पिता दे दी निराश हुए थे क्योंकि वह उनके इस निर्णय से खासे खुश नहीं थे दरअसल सचिन की पिताजी कहते थे कि वह नौकरी छोड़कर उनके बिजनेस में हाथ बताएं लेकिन सचिन ने उनकी सोच से बिल्कुल उलट खेती करने का निर्णय किया था जो कि एक हैरान कर देने वाली बात थी हालांकि सचिन के फैसले और खेती करने की लगन के आगे आखिरकार उनके पिताजी को भी हार माननी पड़ी और उन्हें इजाजत देनी पड़ी अपने पैतृक गांव में खेती करने का काम शुरु करा सचिन के पास खेती करने के लिए 20 एकड़ जमीन थी जिसमें वह खुद ही मेहनत कर चलाया करते थे और खेती किया करते थे।

दादी जी से मिली थी कुछ अलग करने की सीख

सचिन काले खेती के क्षेत्र में कामयाबी पाने का श्रेय पूर्ण रूप से अपनी दादी जी को समर्पित करना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने सचिन के जीवन में कुछ अलग करने की सलाह दी और उन्हीं से उन्होंने अपने जीवन में कुछ अलग करने की सीख ली दरअसल सचिन जब भी शहर से कुछ दिन के लिए गांव जाया करते थे तो उनके दादी जी समाज कल्याण की बातें किया करती थी जिससे सचिन काले काफी प्रभावित हुआ करते थे और हमेशा कुछ ना कुछ सीख लिया करते थे।

सचिन के दादा जी का कहना था कि वह 9:00 से 5:00 की नौकरी में कुछ नहीं रखा है क्योंकि इससे समाज की बेहतरी के लिए कोई कार्य नहीं हो रहा है जब तुम आत्मनिर्भर हो तो तुम्हें समाज के लिए कुछ कार्य करना चाहिए जो बात सचिन काले की दिन में लग गई और उन्होंने उसके बाद खेती करने का निर्णय लिया वहां सचिन को अपने समय का सही उपयोग करने और समाज कल्याण के लिए काम करने की सलाह दिया करते थे जो सचिन काले को खवासा लुभाने लगी थी ऐसे में दिल्ली लौटकर जब सचिन काले को अपनी नौकरी और दिनचर्या से निराशा हाथ लगी तो उन्हें फिर से अपने दादाजी की कही हुई बात याद आई और उन्होंने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला लिया है जो कि था नौकरी छोड़ने का और अलग मॉडल के साथ खेती करने का निर्णय लिया ताकि वह अपने साथ-साथ दूसरे किसान भाइयों के जीवन में परिवर्तन ला सकें और उन्हें एक अच्छे जीवन जीने के लिए प्रेरणा दे सकें।

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