भगवान शिव ही हैं रचेता ब्रह्मा और विष्णु के जानिए इसके पीछे की पूरी कथा

ज्ञान धार्मिक

भगवान शिव को पूरे विश्व में सबसे बड़ा देवों के देव महादेव माना जाता है क्योंकि उनके बारे में यह कहा जाता है कि ना ही इस दुनिया में उनके जैसा कोई था। और ना ही आने वाले समय में उनके जैसा कोई आने वाला है दुनिया के संरक्षण के लिए भगवान शिव अपने भक्तों से सब से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और उन्हें उनका मनचाहा वरदान दे देते हैं उन्हें केवल भक्तों के मन में सच्चे धर्म और निष्ठा का भाव नजर आता है वह उसके सहयोग गुणों को दरकिनार कर उसकी अच्छाइयों को देखते हुए उसको कर्मफल दे देते हैं। सावन में पूरे माह उन्हें विशेष रूप से पूजा जाता है। सावन में इस बार कुल 5 सोमवार आएंगे। दो सोमवार इस सावन माह के बीत चुके हैं और शिव जी के भक्त अब सावन माह के तीसरे सोमवार के आने की प्रतीक्षा कर रहें हैं। आइये ऐसे में इस सावन माह में आज हम आपको शिवपुराण के माध्यम से बताते हैं कि इस दुनिया में शिव जी ब्रह्मा जी और विष्णु जी से भी कैसे श्रेष्ठ हैं ?

शिवपुराण में यह उल्लेखित है कि एक बार शिव जी और ब्रह्मा जी में इस तरह का विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन हैं ? ऐसे में दोनों खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लग गए। तब ही एक विराट ज्योतिर्मय लिंग दोनों के समक्ष प्रकट होता है। इसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने यह निश्चय किया कि जो भी इसके छोर का पता लगाएगा वहीं श्रेष्ठ होगा।

ब्रह्मा जी और विष्णु जी दोनों ही विपरीत दिशा में ज्योतिर्मय लिंग के छोर का पता लगाने लगे। विष्णु जी इससे हारकर लौट आए और ब्रह्मा ने असत्य का सहारा लेते हुए कहा कि वे छोर का पता लगाने में सफल रहें और केतकी के फूल को उन्होंने इसमें साक्षी बताया। ब्रह्मा जी के असत्य वचन सुनते ही शिव जी प्रकट हुए और वे ब्रह्मा जी की आलोचना करने लगे। विष्णु जी और ब्रह्मा जी दोनों ही हाथ जोड़कर शिव जी की स्तुति करने लगे। महादेव ने दोनों ही देवताओं से कहा कि मैं ही इस दुनिया का कारण, उत्पत्तिकर्ता और स्वामी हूं। साथ ही शिव जी ने यह भी कहा कि मैं ही आप दोनों देव का रचयिता भी हूं।

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