अपनी भूख के चलते केवल 12 वर्ष की उम्र में करते थे मजदूरी आज बन बैठे हैं करोड़ों की कंपनी के मालिक

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कभी कभी जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं कि आप चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते अपने जीवन में और आप समय की मार खेल रहे होते हो और अपने जीवन से बहुत ज्यादा परेशान है और मुश्किलों में होते हो जिंदगी के इन मुश्किल पड़ा वह में कुछ लोग हार मान जाते हैं तो कुछ लोगों के जीवन की कायाकल्प हो जाती है वहीं कुछ गिने चुने लोग उन मुश्किलों को पार कर अपने जीवन का एक नया आयाम देते हैं और अपने जीवन को नई रूपरेखा देते हैं आज हम आपको कुछ ऐसे ही कहानी सुनाने वाले हैं भंवरलाल आ जाएगी जिन्होंने अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनेकों संघर्ष किए और बुरी स्थितियों का सामना किया बल्कि पूरे से बुरे वक्त में उन्होंने अपना हौसला और हिम्मत नहीं खोया और लगातार बुरी परिस्थितियों से लड़कर उन से जीत हासिल करें तो आइए जानते हैं

भंवरलाल आर्य की पूरी कहानी

गरीबी ने सिखाया जीवन का असली मतलब राजस्थान के रहने वाले भंवर लाल आर्यभट्ट को वैसे तो वहां भेज दिया रामदेव जिंदगी जी रहे थे और उनके पास किसी भी चीज की कमी नहीं थी लेकिन भंवरलाल की जिंदगी हमेशा से इतनी सुख और समृद्धि नहीं थी उन्हें यहां धन और दौलत अपने पूर्वजों से नहीं मिली है बल्कि उन्होंने इतना बड़ा नाम और रुतबा केवल और केवल अपने दम पर खड़ा किया है जब पेट को भूख का एहसास होता है तो उसे क्या कुछ नहीं झेलना पड़ता किस बात की आप कल्पना भी नहीं कर सकते क्योंकि भूख को मिटाने के लिए उनके पास आने तक के पैसे नहीं थे जब उन्होंने यहां दिल देखे थे बचपन से ही जीवन में गरीबी और आर्थिक तंगी का सामना किया है जिसकी वजह से उन्हें पेट भरने के लिए हमेशा से बचपन में ही मजदूरी करनी थी पेट की भूख को मिटाना पढ़ा था उन्होंने इतनी मेहनत और संघर्ष किया कि आज जगह उन्हीं के चर्चे है।

भंवर लाल आर्य का जन्म 1 जून को राजस्थान के कल्याणपुर तहसील के ढाणी में हुआ था। लेकिन इस बच्चे ने अपनी जान से ही मांग गरीबी परेशान किया हो भंवरलाल आधे के परिवार भी नदी गरीबी में जीवन व्यतीत करते थे भंवरलाल आर्य के परिवार बेहद गरीब थे यहां तक कि उनके माता-पिता को पीने का पानी भरने के लिए भी अपने गांव से करीब 6 से 7 किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना पड़ता था हर रोज।

केवल ₹30000 से शुरू किया था अपने कपड़े का कारोबार

हालांकि संघ के सदस्य से मिलने और उनके जीवन प्रसंग सुनने के साथ सद्भावना राजा ने कई जगह नौकरी अभी करी हैं अपने जीवन में ताकि उनका खर्चा पानी निकल सके जिसकी पहचान बढ़ती चली जा रही है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते कई सालों तक संघ से जुड़े रहने और नौकरी करने के बाद उन्होंने फैसला किया और नौकरी नहीं करेंगे और अपना काम शुरू करें जिसके बाद उन्होंने महज ₹30000 से कपड़ों का व्यापार शुरू करें जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था उस समय में उस व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने जीवन में दिन रात मेहनत करें और यह उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि उनका कारोबार इतनी जल्दी पढ़ ले उड़ने लगा जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता उस मुकाम पर पहुंच गए वहां अपने जीवन में जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था और उनकी गिनती करोड़पति व्यापारियों की जाने लगी। भंवर लाल के कपड़ों की कंपनी ने महज 1 साल के भीतर ही ₹100000 से ज्यादा का मुनाफा कमा कर दिखाया जो उस समय के लिए एक बहुत ही बड़ा टारगेट था जिसके बाद साल 1990 में उन्होंने एक दूसरी दुकान खरीदी और अपने छोटे भाई के साथ मिलकर जनता टेक्सटाइल से नया बिजनेस शुरू कर दिया और उस क्षेत्र में भी प्रवेश कर लिया भंवरलाल के कपड़े और उनके टेक्सटाइल का नाम पूरे इलाके में मशहूर होने लगा जिसके बाद उनको मैं उनको वय्पारी संध का अध्यक्ष बना दिया गया।

करोड़ों का करते हैं रोजाना व्यापार लेकिन जीवन है सादगी भरा

भंवरलाल ने अपने छोटे भाई के साथ जिस जनता टेक्सटाइल कंपनी की नींव रखी थी आज वह उसकी तरक्की की नई कहानी लिख रहे हैं इस कंपनी का व्यापार पूरे भारत में चलता है जिसके परिणामस्वरूप जनता टेक्सटाइल का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ से भी ज्यादा पहुंच चुका है जो कि आज के समय में एक सराहनीय बाद है और ऐसा कोई दिखाना कोई मामूली खेल नहीं इसके साथ ही भंवर लाल आर्य कर्नाटक राज्य उत्सव संस्कार भारतीय से योग जैसे पर पुरस्कार हासिल कर चुके हैं उनके सामाजिक कल्याणकारी कार्यों की वजह से कई लोग उनके पास अपनी फरियाद लेकर आते हैं जिसकी वजह से उनके एक बार नहीं बल्कि अनेकों बार मंच पर सम्मानित किया जा चुका है और करोड़पति होने के बावजूद भी वह एक बेहद सादगी भरा जीवन व्यतीत करते हैं जो कि काबिले तारीफ बात है और आज के समय में ऐसा व्यक्ति ढूंढना भी मुश्किल कार्य है।

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