करवा चौथ जानिए पूजा और व्रत तोड़ने के लिए शुभ मुहूर्त, महत्व और करवा चौथ व्रत की कथा !

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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं। करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के निस्वार्थ प्रेम और त्याग को दर्शाता है। इस साल करवा चौथ का व्रत आज यानी 24 अक्टूबर, रविवार को है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और भगवान शंकर और माता पार्वती से अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। शाम के समय महिलाएं अर्घ्य देकर चंद्रमा का व्रत करती हैं और व्रत रखती हैं। करवा चौथ व्रत के दौरान, महिलाएं करवा चौथ व्रत कथा पढ़ती या सुनती हैं। आप भी पढ़े करवा चौथ व्रत कथा-

 

करवाचौथ का शुभ मुहूर्त

कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि प्रारम्भ-

रविवार की सुबह 3 बजे 1 मिनट

चतुर्थी तिथि समापन – सोमवार सुबह 5 बजे 43 मिनट चंद्र उदय का समय – 8 बजे 09 मिनट

करवाचौथ पूजन : रविवार की शाम 06:55 से 08:51 तक शुभ मुहूर्त रहेगा.

 

करवा चौथ व्रत पूजा का महत्व

ज्योतिषियों के अनुसार, दुल्हन अपने पति की लंबी उम्र की कामना के साथ निर्जल व्रत रखती हैं। यह व्रत सौभाग्य, सुख और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन शिव परिवार और भगवान गणपति की पूजा करनी चाहिए।

 

पत्नी रोहिणी के साथ दिखाई देंगे चंद्र देव

मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की 27 पत्नियों में सबसे प्रिय रोहिणी के साथ रहकर यह योग बना रहा है। चंद्रमा का उदय होना और नक्षत्र रोहिणी की उपस्थिति अपने आप में एक अद्भुत संयोग है। दोपहर 1:02 बजे तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा।

करवा चौथ व्रत कथा-

प्राचीन काल में करवा नाम की एक महिला अपने पति के साथ एक गांव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में नहाने गया। नदी में मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और उसे अंदर ले जाने लगा। तब पति ने अपनी सुरक्षा के लिए अपनी पत्नी करवा को बुलाया। पति की रक्षा के लिए उसकी पत्नी दौड़ी और उसने मगरमच्छ को धागे से बांध दिया। वह धागे का एक सिरा पकड़कर ले गई और अपने पति के साथ यमराज पहुंच गई। करवा ने बड़े साहस के साथ यमराज के प्रश्नों का उत्तर दिया।

 

करवा का साहस देखकर यमराज ने उसे अपने पति को लौटा दिया। साथ ही उन्होंने करवा को सुख-समृद्धि का वरदान देते हुए कहा, ‘मैं इस दिन व्रत रखकर करवा को स्मरण करने वाली स्त्री के सौभाग्य की रक्षा करूंगा। कहा जाता है कि इस घटना का दिन कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। तब से करवा चौथ के व्रत की परंपरा चली आ रही है।

 

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