केवल ₹30 हजार रुपय से शुरू किया था छोटा सा बिजनेस आज सालाना कंपनी कर रही है ₹60 लाख का टर्नओवर

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ऐसा जरूरी नहीं कि इंसान जब भी देख ले उसे सफलता ही मिले इंसान को जब सफलता मिलती है तो जो जीवन उसे मिलता है उसके बाद कभी कल्पना भी नहीं कर सकता बल्कि कभी-कभी तो आप माननीय अगर आपको जीवन में सफलता की सीढ़ी चढ़ी है तो आपको रिस्क से होकर ही गुजरना पड़ता है ऐसे ही कुछ किया उमंग श्रीधर ने जिन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपने जीवन में बहुत ही बड़ा जोखिम उठाया जिसके लिए उन्हें लगभग हर एक व्यक्ति ने मना करा था लेकिन उन्होंने सफलता हासिल कर सबको चौंका दिया और अपनी कामयाबी को लोगों के लिए प्रेरणा बना दिया।

मध्यप्रदेश के भोपाल में रहने वाले उमंग सीधे ने पिछले साल प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन फॉक्स ने अंडर 88 वर्ष की लिस्ट में उन्होंने अपनी जगह बना कर अपने साथ-साथ भारत देश का भी नाम रोशन करें इतना ही नहीं अमन का नाम भारत की टॉप 50 सोशल उद्यमी की सूची में भी शामिल है जो कि उनके जीवन में एक बड़ी उपलब्धि है लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने जीवन में अनेकों जोखिम उठाया और कुछ ऐसे निर्णय लिए जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते .

मिला अनोखा नाम और पहचान

उमंग श्रीधर ने स्टार्टअप करने से पहले कंपनी का नाम और उसमें बनने वाले कपड़ों के बारे में पूरे रिसर्च करें और जब रिसर्च पूरी हुई तब उन्होंने इस कंपनी को खोलने का निर्णय लिया और अपनी कंपनी का नाम रखा KhaDigi . उन्होंने मुख्य द्वार पर खादी के कपड़े बनाने का निर्णय लिया उमंग से धन ने अपनी कंपनी को डिजिटल रूप में सभी लोगों के बीच पेश किया जिसके जरिए हैंडलूम फैब्रिक और खादी का कपड़ा बेचा जाता था इस कंपनी के जरिए सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बुनकरों को भी रोजगार देते हुए उन्हें अपनी इस कंपनी के साथ जुड़ा और उनको भी आत्मनिर्भर बनाया।

करती हैं बड़ी-बड़ी कंपनी को माल सप्लाई

उमंग सिंघर स्थानीय रूप से मध्य प्रदेश के दमोह जिले की रहने वाली लेकिन उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई और कामकाज के सिलसिले से भोपाल में आकर गई थी उनकी कंपनी विभिन्न इंडस्ट्री को खत्म करने का काम करती है बड़ी-बड़ी डिजाइनर रिटेलर जैसी कंपनियां शामिल है उमंग की मां जनपद के अध्यक्ष भी रह चुके हैं अपने कार्य भार के समय ऐसे में उन हमेशा अपनी मां को देख कर काम करना चाहती थी जिस समाज में कुछ बदलाव ला सके और उन्हें आत्मनिर्भर बना सके इसी सपने को पूरा करने के लिए। उसके बाद उन्होंने ₹30000 देकर अपना छोटा सा बिजनेस शुरू करने का जोखिम उठाया जो कि उस समय बहुत बड़ी बात हुआ करती थी लेकिन उसका यार इसके कामयाबी में बदल गया और एक नया आयाम लिख दिया अपनी कहानी में।

जीवन में और भी आगे बढ़ना चाहती है

इंडिया की टॉप ब्रांड्स में उनकी कंपनी का नाम शामिल होने के बावजूद भी उनके सपने यहीं नहीं थमे उन्हें अपने जीवन में और भी काम करने के लिए वह लगातार मेहनत करती रहती हैं। उमंग की कंपनी लॉकडाउन के दौरान तकरीबन दो लाख से ज्यादा मार्क्स बनाने में कामयाब रही थी और उन्होंने जरूरतमंद लोगों को यह मारने का काम भी करा है इसके चलते लोगों के बीच 50 महिलाओं को रोजगार भी दिया गया जिससे उनको अपने घर का खर्चा चलाने में काफी मदद मिली। और उस मुसीबत की घड़ी में उन्हें चैन से जीवन जीने का एक मौका मिला।

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