Home / News / 62 साल की उम्र में साइकल से 5 किमी जाकर घर–घर दूध बेचती है यह महिला, अकेली उठाती है 6 बेटियों का खर्चा!

62 साल की उम्र में साइकल से 5 किमी जाकर घर–घर दूध बेचती है यह महिला, अकेली उठाती है 6 बेटियों का खर्चा!

दोस्तों, वो कहते है ना कि कोशिश करने वाले कभी हार नहीं मानते। परिस्थितियों से जूझना इंसान को कुछ ऐसा करने के लिए मजबूर कर देता है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। ऐसी ही एक घटना उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से सामने आ रही है जो लोगों के लिए बेहद हैरान करने वाली है। हम बात कर रहे है, आगरा में 62 साल की एक महिला आज भी घर-घर साइकिल से दूध बेचने जाती है।

62 वर्षीया शिला देवी गांव से पांच किलोमीटर दूर अमनपुर कस्बे में साइकिल से घर-घर दूध बेचती हैं। करीब 24 साल पहले माता-पिता की मृत्यु हो गई थी जिसके बाद उन पर चार बहनों और भाई की जिम्मेदारी थी। भैंस पालने के बाद वह गांव में दूध बेचने लगी। फिर मैंने और भैंसें खरीदीं। सभी उन्हें प्यार से शीला बुआ के नाम से बुलाते हैं।

 

शादी के एक साल बाद हुई पति की मृत्यु

 

शीला देवी, जिन्होंने जीवन के सभी संकटों को पार कर लिया है, उनकी पारिवारिक जिम्मेदारी, समझ और कड़ी मेहनत के लिए प्रशंसा की जाती है। साल 1980 में उनकी शादी राम प्रकाश से हुई थी। लेकिन एक साल बाद अपने पति की मृत्यु के बाद, उन्हें अपनी माँ के पास लौटना पड़ा।वर्ष 1996 में, उनके पिता और कुछ समय बाद उनकी माँ का निधन हो गया। शीला स्कूल नहीं जाती थी, लेकिन वह अपनी जिंदगी के हर पड़ाव पर नजर रखती है।

वर्ष 1997 में उन्होंने एक भैंस को पाला। वह साइकिल चलाना जानती थी, अमनपुर शहर गई और दूध बेचने लगी। जब दूध की मांग बढ़ी तो उन्होंने और भैंसें पाल लीं। अब उनके पास पांच भैंसें हैं। रोजाना औसतन 40 लीटर दूध की खपत होती है।

 

बरसों से अकेले उठाती आई है परिवार की जिम्मेदारी:

 

इस महिला यानी शीला के भाई विनोद की 6 बेटियां हैं जिनमें सबसे बड़ी बेटी सोनम भी विधवा है और वह भी उनके साथ रहती है। सोनम की 6 बेटियां भी हैं इसलिए उनकी मायके वालों की संख्या काफी अधिक है, क्योंकि शीला बुआ को रात में बहुत मेहनत करनी पड़ती है और अपनी उम्र को भूलकर काम करते रहे।शीला भगवान ने अपने जीवन में सभी संघर्षों को लड़ा और अपनी मेहनत के दम पर ही अपने परिवार को इतनी दूर तक ले आई। वह अपने जीवन में कभी किसी के पास नहीं पहुंचे लेकिन आत्मनिर्भर बने और अपने घर की जिम्मेदारियों को उठाया। भारत उनके जज्बे को सलाम करता है।